August 9, 2026

आपदा प्रबंधन का 'धामी मॉडल': बचाव से पुनर्वास तक, उत्तराखंड के परिवारों को पुनर्निर्माण में सहायता

आपदा प्रबंधन का 'धामी मॉडल': बचाव से पुनर्वास तक, उत्तराखंड के परिवारों को पुनर्निर्माण में सहायता

By Desk

Time Updated: Sunday, August 9, 2026, 21:35 [IST]

उत्तराखंड में आपदा सिर्फ एक खबर या हेडलाइन नहीं होती। यहाँ के निवासियों (उत्तराखंडियों) के लिए, जब पहाड़ धंसते हैं या टूटते हैं, तो उसका सीधा असर उनके घरों, आजीविका और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ता है। सड़कें गायब हो जाती हैं, कारोबार ठप हो जाते हैं और प्रभावित परिवार असमंजस में पड़ जाते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए इसका जवाब सिर्फ़ शुरुआती राहत और बचाव कार्य (Rescue Operations) तक सीमित नहीं रह सकता था। जब एक साल पहले धराली और थराली में भीषण फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) और मलबे के बहाव ने तबाही मचाई थी, तब पहली प्राथमिकता ज़िंदगियाँ बचाना और ज़रूरी सेवाओं को बहाल करना था। लेकिन धामी सरकार की प्रतिक्रिया केवल आपातकालीन स्थिति से निपटने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका ध्यान इस बात पर केंद्रित हुआ कि प्रभावित परिवार अपनी ज़िंदगी को दोबारा कैसे पटरी पर लाएँ।

राहत (Relief) से पुनर्वास (Rehabilitation) की ओर बढ़ना, बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) का पुनर्निर्माण करना और संवेदनशील समुदायों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना - इसी दृष्टिकोण को 'आपदा प्रबंधन का धामी मॉडल' (Dhami Model of Disaster Management) कहा जा रहा है।

Uttarakhand Dhami Model emphasizes resilience

बचाव से पुनर्वास तक

आपदा के तुरंत बाद SDRF, NDRF, भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया। चिकित्सा सहायता और आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की गई।

मुख्यमंत्री धामी ने खुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, परिवारों से मुलाकात की और ज़मीनी स्तर पर पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मुआवज़े, बुनियादी ढाँचे की मरम्मत और ज़रूरी सेवाओं की बहाली में कोई देरी न की जाए।

धराली, थराली, हर्सील और भटवाड़ी में सड़कों, बिजली और पीने के पानी की व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया गया। पहाड़ों में ये मामूली मरम्मत नहीं होतीं; एक बंद सड़क बाज़ार, स्कूल और अस्पतालों तक पहुँच रोक देती है, जबकि एक क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर पूरी फसल के मौसम को जोखिम में डाल देती है।

सरकार के अनुसार, पिछले एक साल में राहत, पुनर्वास और विकास कार्यों के लिए ₹33 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।

रिकवरी के लिए ₹33 करोड़ से अधिक का प्रावधान

पशुपालन, सिंचाई, उद्यान (Horticulture), कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, पर्यटन, लोक निर्माण (PWD) और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे विभागों के माध्यम से ₹16 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न राहत उपायों के तहत सीधे प्रभावित परिवारों को ₹17 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। क्षतिग्रस्त सेब के बागानों का मुआवज़ा, भेड़-बकरी पालन के लिए सहायता, बीज एवं पौधों का वितरण और खेती की गतिविधियों को दोबारा शुरू करने जैसे कदम उठाए गए हैं।

भविष्य की आपदाओं को ध्यान में रखकर पुनर्निर्माण

सरकार ने पुनरुद्धार को भविष्य की तैयारियों से जोड़ा है। उत्तराखंड में तकनीक, अर्ली वार्निंग सिस्टम (समय से पहले चेतावनी), वेदर ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म और नियमित मानसून समीक्षा ड्रिल के साथ एक सक्रिय आपदा प्रबंधन ढाँचा तैयार किया गया है। नदियों के किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवारें (Landslide mitigation walls), भूस्खलन रोकने के उपाय और आपदा-रोधी (Resilient) निर्माण तकनीकों पर ज़ोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा था, "धराली आपदा केवल बुनियादी ढाँचे के पुनरुद्धार की चुनौती नहीं थी; यह प्रभावित परिवारों के जीवन और भविष्य को पुनर्स्थापित करने की ज़िम्मेदारी थी। हमारी सरकार पहले दिन से ही हर प्रभावित परिवार के साथ मज़बूती से खड़ी रही है। हमारी प्रतिबद्धता भागीरथी घाटी को पहले से अधिक सुरक्षित, मज़बूत और समृद्ध बनाने की है।"

धराली से आगे: जोशीमठ संकट में भी वही दृष्टिकोण

आपदा के दौरान लोगों की सुरक्षा करने और पुनर्वास तक उनके साथ खड़े रहने का यही दृष्टिकोण जोशीमठ भू-धंसाव (Land Subsidence) संकट के दौरान भी दिखाई दिया था।

जब दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 में स्थिति बिगड़ी, तो प्रभावित परिवारों को असुरक्षित मकानों से निकालकर होटलों, स्कूलों, गेस्ट हाउस और गुरुद्वारों में बनाए गए राहत शिविरों में ले जाया गया। जोशीमठ को 'डेंजर', 'बफर' और 'पूरी तरह सुरक्षित' ज़ोन में विभाजित किया गया। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त संरचनाओं को सुरक्षित तरीके से ध्वस्त किया गया।

सरकार ने उस समय प्रभावितों के लिए ये कदम उठाए थे:

  • किराया और अंतरिम सहायता: ₹4,000 प्रति माह का किराया समर्थन, ₹1.5 लाख की अंतरिम सहायता राशि और संकटग्रस्त क्षेत्र के बिजली-पानी के बिल माफ किए गए।
  • पुनर्वास के 3 विकल्प: भूमि और भवनों का नकद मुआवज़ा, 75 वर्ग मीटर तक की भूमि के साथ निर्माण मुआवज़ा, या सुरक्षित भूखंड पर सरकारी मकान।
  • वैज्ञानिक अध्ययन और फंड: GSI, NIH, WIHG, CSIR-CBRI और IIT रुड़की जैसी एजेंसियों द्वारा वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराए गए। केंद्र सरकार (MHA, NDMA) और राज्य के बजट के सहयोग से ₹1,658.17 करोड़ का रिकवरी और रिकंस्ट्रक्शन प्लान स्वीकृत किया गया।

हालांकि जोशीमठ की आपदा धराली से अलग थी, लेकिन सरकार का मूल सिद्धांत वही रहा-पहले लोगों की रक्षा करना, तुरंत राहत देना और फिर दीर्घकालिक पुनर्वास का रास्ता बनाना।