August 8, 2026

Hathras Assembly Caste Equations: हाथरस विधानसभा के जातिगत समीकरण, 2026 में 3.69 लाख वोटर

Hathras Assembly Caste Equations की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा में विधायक बनने का अवसर केवल SC प्रत्याशियों को मिलता है, लेकिन चुनावी जीत का रास्ता ठाकुर, वैश्य, ब्राह्मण, जाटव, धोबी, कोरी-कोली, कुशवाहा, जाट, मुस्लिम, वाल्मीकि, बघेल और दूसरे समुदायों के बीच बनने वाले सामाजिक गठजोड़ से होकर गुजरता है। SIR 2026 की अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक हाथरस विधानसभा में अब 3,69,865 मतदाता हैं। पुनरीक्षण शुरू होने से पहले यहां 4,12,905 वोटर थे। यानी नई सूची में 43,040 मतदाताओं की कमी हुई है, जो करीब 10.42 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।

हाथरस विधानसभा संख्या 78 पर वर्तमान में भाजपा की अंजुला सिंह माहौर विधायक हैं। वह अनुसूचित जाति के कोरी समुदाय से आती हैं और 2022 में पहली बार विधानसभा पहुंचीं। उस चुनाव में उन्हें 1,54,655 वोट यानी 58.79 प्रतिशत मत मिले थे। बसपा के संजीव कुमार 53,799 वोट के साथ दूसरे और सपा के ब्रज मोहन राही 47,185 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा की जीत का अंतर 1,00,856 वोट था।

हाथरस विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।

हाथरस विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाहाथरस
विधानसभा संख्या78
जिलाहाथरस
लोकसभा क्षेत्रहाथरस
आरक्षणअनुसूचित जाति (SC)
वर्तमान विधायकअंजुला सिंह माहौर
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
विधायक की सामाजिक पहचानअनुसूचित जाति–कोरी
2026 कुल मतदाता3,69,865
SIR से पहले4,12,905
मतदाता कमी43,040
कमी प्रतिशतकरीब 10.42%
पुरुष मतदाता 20262,01,086
महिला मतदाता 20261,68,775
अन्य4
मतदान केंद्र237
मतदेय स्थल475
2022 विजेताअंजुला सिंह माहौर, BJP
2022 जीत का अंतर1,00,856 वोट
प्रमुख सामाजिक समूहठाकुर, वैश्य, ब्राह्मण, जाटव, धोबी, कुशवाहा, जाट, मुस्लिम, कोरी-कोली, वाल्मीकि

2026 की अंतिम सूची के बाद भी हाथरस जिले की तीनों विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा मतदाता हाथरस सदर में हैं। सादाबाद में 3,41,533 और सिकंदराराऊ में 3,31,988 मतदाता हैं।

Hathras Assembly Caste Equations को समझने के लिए केवल अनुसूचित जाति मतदाताओं की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। पुराने चुनावी आकलन में यहां ठाकुर मतदाता करीब 50 हजार, वैश्य और ब्राह्मण करीब 43-43 हजार, जाटव करीब 30 हजार, धोबी 27 हजार, कुशवाहा 25 हजार, मुस्लिम 20 हजार और बघेल व जाट करीब 15-15 हजार बताए गए थे। कोली, वाल्मीकि, नाई, कश्यप, कुम्हार, पंजाबी, खटीक और दूसरे समुदाय भी अलग-अलग संख्या में मौजूद हैं।

हाथरस विधानसभा का पुराना प्रकाशित जातीय अनुमान

जाति/समुदायपुराना चुनावी अनुमान
ठाकुरलगभग 50,000
वैश्यलगभग 43,000
ब्राह्मणलगभग 43,000
जाटवलगभग 30,000
धोबीलगभग 27,000
कुशवाहालगभग 25,000
मुस्लिमलगभग 20,000
बघेललगभग 15,000
जाटलगभग 15,000
कोलीलगभग 10,000
वाल्मीकिलगभग 7,000
नाईलगभग 6,000
कश्यपलगभग 5,000
कुम्हारलगभग 5,000
पंजाबीलगभग 4,000
खटीकलगभग 3,000
यादवलगभग 3,000
दर्जीलगभग 2,000
भुजीलगभग 2,000
अन्यलगभग 6,000

इन पंक्तियों का कुल करीब 3.21 लाख बनता है, जबकि उस समय सीट का कुल मतदाता आधार लगभग 3.85 लाख बताया गया था। इसलिए यह सूची पूरी जाति-वार गणना नहीं बल्कि प्रमुख समुदायों का पुराना चुनावी अनुमान है। करीब 64 हजार मतदाता इन सूचीबद्ध श्रेणियों के बाहर या अन्य समूहों में आते थे।

निर्वाचन आयोग विधानसभा मतदाता सूची को जाति या धर्म के आधार पर प्रकाशित नहीं करता। इसलिए इन आंकड़ों को 2026 की आधिकारिक जाति-वार वोटर संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

2026 के 3,69,865 वोटरों के करीब संकेतात्मक जातीय मॉडल

पुराने लगभग 3.85 लाख वोटर बेस को 2026 के 3,69,865 आधिकारिक कुल वोटर बेस के अनुपात में केवल गणितीय रूप से समायोजित किया जाए तो वर्तमान कुल के करीब एक संकेतात्मक मॉडल तैयार किया जा सकता है।

यह 2026 की जातिगत गणना नहीं है। यह केवल पुराने अनुमान को नए कुल वोटर बेस पर समान अनुपात मानकर किया गया गणितीय समायोजन है। वास्तविक सामाजिक संख्या इससे अलग हो सकती है, क्योंकि SIR में किस जाति या समुदाय के कितने नाम जुड़े या हटे, इसका आधिकारिक जाति-वार डेटा उपलब्ध नहीं है।

सामाजिक समूह2026 वोटर बेस पर संकेतात्मक संख्या
ठाकुरलगभग 48,000
वैश्यलगभग 41,300
ब्राह्मणलगभग 41,300
जाटवलगभग 28,800
धोबीलगभग 25,900
कुशवाहालगभग 24,000
मुस्लिमलगभग 19,200
बघेललगभग 14,400
जाटलगभग 14,400
कोलीलगभग 9,600
वाल्मीकिलगभग 6,700
नाईलगभग 5,800
कश्यपलगभग 4,800
कुम्हारलगभग 4,800
पंजाबीलगभग 3,800
खटीकलगभग 2,900
यादवलगभग 2,900
दर्जीलगभग 1,900
भुजीलगभग 1,900
पुराने “अन्य” का अनुपातलगभग 5,800
पुराने अनुमान में असूचीबद्ध/शेष समूहलगभग 61,500
संकेतात्मक कुल3,69,865

इस तालिका का उद्देश्य केवल पुराने जातीय अनुमान और 2026 की नई वोटर संख्या को एक ही संदर्भ में समझना है। इसे वास्तविक जातिगत जनगणना या आधिकारिक वोटर वर्गीकरण नहीं माना जाना चाहिए।

हाथरस वोटर लिस्ट 2026: 3,69,865 मतदाता

हाथरस जिले की SIR 2026 अंतिम मतदाता सूची में कुल 10,43,386 मतदाता दर्ज हैं। अभियान शुरू होने के समय जिले में 11,63,525 वोटर थे। इस तरह अंतिम सूची में शुद्ध रूप से 1,20,139 मतदाता कम हुए। ड्राफ्ट चरण में 1,89,616 नाम हटे थे, लेकिन दावे और आपत्तियों के दौरान 69,477 मतदाता दोबारा या नए रूप में सूची में जुड़े।

हाथरस जिले की विधानसभा-वार वोटर लिस्ट 2026

विधानसभापुरुषमहिलाअन्य2026 कुलपहले कुलकमी
हाथरस2,01,0861,68,77543,69,8654,12,90543,040
सादाबाद1,88,3381,53,19233,41,5333,75,73934,206
सिकंदराराऊ1,81,7691,50,21093,31,9883,74,88142,893
जिला कुल5,71,1934,72,1771610,43,38611,63,5251,20,139

हाथरस सदर में जिले की सबसे अधिक 43,040 मतदाताओं की विधानसभा-वार कमी हुई है। इसके बावजूद यह जिले की सबसे बड़ी विधानसभा बनी हुई है।

2012 से 2026 तक कैसे बदला हाथरस का वोटर बेस?

2008 के परिसीमन के बाद हाथरस विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई और 2012 में नए परिसीमन के आधार पर पहला विधानसभा चुनाव हुआ। 2012 में यहां 3,46,878 मतदाता थे। 2017 में वोटर संख्या 3,84,610, 2019 में 3,97,691, 2022 में 4,16,253 और 2024 में 4,11,805 थी। 2026 की SIR सूची में यह संख्या घटकर 3,69,865 रह गई है।

वर्षकुल मतदाता
20123,46,878
20173,84,610
20193,97,691
20224,16,253
2024 लोकसभा4,11,805
2026 SIR3,69,865

2024 की तुलना में भी वर्तमान वोटर बेस करीब 41,940 मतदाता छोटा है। इसलिए 2027 में 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा के बूथ डेटा को नई मतदाता सूची के आधार पर दोबारा पढ़ना पड़ेगा।

SC आरक्षित सीट पर ठाकुर, ब्राह्मण और वैश्य क्यों इतने महत्वपूर्ण?

हाथरस सीट की राजनीतिक संरचना का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उम्मीदवार SC समुदाय से ही हो सकता है, लेकिन पुराने सामाजिक अनुमान में तीन बड़े गैर-SC समूह—ठाकुर, वैश्य और ब्राह्मण—मिलकर करीब 1.36 लाख मतदाताओं का संकेत देते थे।

इसका अर्थ है कि SC उम्मीदवार के लिए अपने समुदाय के वोट के साथ इन बड़े गैर-SC समूहों में स्वीकार्यता चुनावी सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

2022 में भाजपा प्रत्याशी को 1.54 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। यह किसी एक SC उपजाति या किसी एक सवर्ण समुदाय के बूते संभव नहीं था। भाजपा की बड़ी जीत व्यापक सामाजिक गठजोड़ की ओर संकेत करती है।

इसीलिए हाथरस में उम्मीदवार की SC उपजाति जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी गैर-SC मतदाताओं में स्वीकार्यता भी है।

ठाकुर मतदाता: पुराने अनुमान में सबसे बड़ा अलग सामाजिक समूह

हाथरस के पुराने जातीय आकलन में ठाकुर मतदाता करीब 50 हजार बताए गए थे। यह सूची में किसी एक जाति का सबसे बड़ा आंकड़ा था।

हाथरस-सासनी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में ठाकुर सामाजिक प्रभाव गांववार राजनीति, पंचायत नेटवर्क और स्थानीय नेतृत्व में भी दिखाई देता है।

भाजपा के लिए यह वोट उसके व्यापक सवर्ण आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन आरक्षित सीट होने के कारण ठाकुर मतदाता को अपने समुदाय का उम्मीदवार चुनने का विकल्प नहीं होता। इसलिए SC प्रत्याशी की स्थानीय स्वीकार्यता, पार्टी और राजनीतिक माहौल अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

2027 में BJP अगर 2022 के स्तर का ठाकुर-सवर्ण समर्थन बनाए रखती है तो उसे मजबूत शुरुआती आधार मिलेगा। विपक्ष के लिए इस वोट में कुछ प्रतिशत सेंध भी महत्वपूर्ण होगी।

वैश्य वोट और हाथरस के व्यापारिक चरित्र का संबंध

पुराने चुनावी अनुमान में वैश्य मतदाता करीब 43 हजार बताए गए थे। हाथरस ऐतिहासिक रूप से व्यापारिक शहर है और हींग प्रसंस्करण, छोटे उद्योग, तेल मिल, कपड़ा तथा दूसरे स्थानीय कारोबार इसकी आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं।

इस कारण वैश्य वोट की राजनीतिक भूमिका केवल जातीय नहीं बल्कि आर्थिक भी है।

व्यापारियों और छोटे उद्योगों से जुड़े मतदाताओं के लिए—

बिजली,
व्यापारिक सुविधाएं,
सड़क और माल परिवहन,
स्थानीय बाजार,
कर व्यवस्था,
औद्योगिक रोजगार और
कानून-व्यवस्था

जैसे मुद्दे मतदान के फैसले पर असर डाल सकते हैं।

2027 में किसी भी दल के लिए वैश्य और व्यापारी समुदाय में पकड़ महत्वपूर्ण रहेगी।

ब्राह्मण वोट भी करीब 43 हजार के पुराने अनुमान पर

ब्राह्मण मतदाता भी पुराने आकलन में लगभग 43 हजार बताए गए थे। यानी ठाकुर, वैश्य और ब्राह्मण तीनों बड़े गैर-SC राजनीतिक ब्लॉक हैं।

भाजपा की लगातार 2017 और 2022 की जीत में सवर्ण मतदाताओं की मजबूत गोलबंदी उसकी प्रमुख सामाजिक ताकत रही होगी।

विपक्ष के लिए चुनौती यह है कि SC आरक्षित सीट पर ऐसा प्रत्याशी और सामाजिक संदेश तैयार किया जाए जो दलित वोट के साथ ब्राह्मण, ठाकुर या वैश्य मतदाताओं के एक हिस्से को भी आकर्षित कर सके।

2022 में भाजपा का 58.79 प्रतिशत वोट शेयर बताता है कि विपक्ष केवल अपने कोर सामाजिक आधार पर निर्भर रहकर सीट पर मुकाबला नहीं बना सकता।

जाटव वोट: BSP के पुराने आधार की सबसे बड़ी परीक्षा

हाथरस में जाटव मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 30 हजार है। विधानसभा SC आरक्षित है और बसपा का इस सीट पर लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है।

2008 परिसीमन से पहले रामवीर उपाध्याय बसपा के टिकट पर लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते थे। सीट आरक्षित होने के बाद 2012 में बसपा ने गेंदा लाल चौधरी को उम्मीदवार बनाया और पार्टी ने नई सामाजिक परिस्थितियों में भी सीट बचा ली। उन्होंने BJP के राजेश कुमार को 8,673 वोट से हराया।

लेकिन 2017 के बाद तस्वीर बदल गई।

2017 में BJP ने सीट बसपा से छीनी।

2022 में BSP दूसरे स्थान पर जरूर रही, लेकिन भाजपा से एक लाख से अधिक वोट पीछे रह गई।

2027 में बसपा के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वह अपने पारंपरिक जाटव आधार को कितना वापस संगठित कर पाती है।

कोरी समुदाय और अंजुला सिंह माहौर की सामाजिक पहचान

वर्तमान विधायक अंजुला सिंह माहौर अनुसूचित जाति के कोरी समुदाय से आती हैं। उनका जन्म 30 जून 1969 को हुआ। उन्होंने स्नातक और विधि स्नातक की पढ़ाई की है। मार्च 2022 में वह पहली बार विधानसभा सदस्य चुनी गईं।

पुराने जातीय डेटा में “कोली” मतदाता करीब 10 हजार बताए गए हैं। हालांकि कोरी और कोली शब्दों तथा स्थानीय सामाजिक वर्गीकरण को हर डेटा सेट में समान समझना उचित नहीं है। इसलिए विधायक की कोरी सामाजिक पहचान को पुराने “कोली” आंकड़े से सीधे जोड़कर संख्या निकालना गलत होगा।

अंजुला सिंह माहौर का राजनीतिक सफर विधायक बनने से पहले भी लंबा रहा है। वह 2006 से 2012 तक आगरा की महापौर रह चुकी हैं। इसके अलावा भाजपा संगठन में प्रदेश मंत्री और महिला मोर्चा की जिम्मेदारियों से भी जुड़ी रही हैं।

अंजुला सिंह माहौर का राजनीतिक सफर

वर्ष/अवधिराजनीतिक पड़ाव
2006-2012आगरा की महापौर
बाद के वर्षभाजपा संगठन में प्रदेश मंत्री
महिला संगठनसह-प्रभारी की जिम्मेदारी
2022हाथरस से पहली बार विधायक
2026हाथरस की वर्तमान भाजपा विधायक

2022 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़कर 58.79 प्रतिशत वोट हासिल करना उनके लिए बड़ी राजनीतिक जीत थी।

धोबी वोट करीब 27 हजार, SC उपजातियों में अहम

पुराने सामाजिक अनुमान में धोबी समुदाय के करीब 27 हजार मतदाता बताए गए थे।

आरक्षित विधानसभा में इसका खास राजनीतिक महत्व है।

हाथरस में दलित वोट कोई एक समान ब्लॉक नहीं है। जाटव, धोबी, कोरी-कोली, वाल्मीकि, खटीक और दूसरे SC समुदायों की अपनी सामाजिक पहचान और राजनीतिक प्राथमिकताएं हो सकती हैं।

इसीलिए किसी पार्टी के लिए केवल “दलित वोट” शब्द इस्तेमाल कर पूरी सीट का गणित समझना पर्याप्त नहीं है।

BSP के लिए जाटव आधार मजबूत करना जरूरी है।

BJP के लिए गैर-जाटव तथा दूसरे SC समूहों में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना अहम है।

SP के लिए इन दोनों के बीच सेंध बनाकर व्यापक PDA सामाजिक गठजोड़ तैयार करना चुनौती होगी।

वाल्मीकि वोट और 2024 लोकसभा का संकेत

पुराने चुनावी अनुमान में वाल्मीकि मतदाता करीब 7 हजार बताए गए थे। संख्या जाटव या धोबी के मुकाबले छोटी है, लेकिन 2024 हाथरस लोकसभा चुनाव में इस समुदाय की राजनीतिक चर्चा विशेष रूप से बढ़ी क्योंकि BJP ने अनूप प्रधान बाल्मीकि और SP ने जसवीर वाल्मीकि को उम्मीदवार बनाया था।

पूरी हाथरस लोकसभा सीट पर BJP के अनूप प्रधान बाल्मीकि को 5,54,746 वोट, SP के जसवीर वाल्मीकि को 3,07,428 और BSP के हेमबाबू धनगर को 2,01,263 वोट मिले। BJP ने 2,47,318 वोट से लोकसभा चुनाव जीता।

हाथरस लोकसभा चुनाव 2024

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
अनूप प्रधान बाल्मीकिBJP5,54,74651.24%
जसवीर वाल्मीकिSP3,07,42828.39%
हेमबाबू धनगरBSP2,01,26318.59%
NOTA6,2990.58%
BJP की जीत2,47,318

हाथरस विधानसभा खंड में भी 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने SP पर अपनी बढ़त बनाए रखी। इससे 2027 से पहले BJP की हालिया संगठनात्मक मजबूती का संकेत मिलता है, हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोटिंग पैटर्न अलग हो सकता है।

कुशवाहा मतदाता: करीब 25 हजार का पुराना आधार

हाथरस विधानसभा में कुशवाहा मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 25 हजार रहा है।

यह गैर-यादव OBC समुदाय भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

भाजपा पिछले चुनावों में गैर-यादव पिछड़े समुदायों के एक बड़े हिस्से को अपने साथ जोड़ती रही है।

दूसरी तरफ सपा 2027 से पहले अपने PDA राजनीतिक ढांचे में कुशवाहा, शाक्य, सैनी, पाल, बघेल और दूसरे गैर-यादव OBC समुदायों में हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।

हाथरस जैसी आरक्षित सीट पर अगर विपक्ष SC वोट के साथ कुशवाहा और दूसरे OBC वोटों में पर्याप्त हिस्सेदारी जोड़ लेता है तो मुकाबला 2022 की तुलना में करीबी हो सकता है।

जाट वोट संख्या से ज्यादा राजनीतिक प्रभाव वाला

पुराने जातीय अनुमान में जाट मतदाता करीब 15 हजार बताए गए हैं। संख्या ठाकुर या ब्राह्मण की तुलना में कम है, लेकिन हाथरस और आसपास की ब्रज-पश्चिमी यूपी राजनीति में जाट समुदाय का सामाजिक प्रभाव अपनी संख्या से अधिक माना जाता है।

हाथरस का ऐतिहासिक संबंध जाट शासक राजा दयाराम सिंह से भी रहा है और क्षेत्र की ग्रामीण राजनीति में जाट किसान नेटवर्क सक्रिय है।

2022 में RLD समाजवादी पार्टी के साथ थी।

अब RLD BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ है।

इसलिए 2027 में जाट वोट का समीकरण 2022 जैसा नहीं रहेगा। मौजूदा राजनीतिक स्थिति में RLD का संगठन अगर NDA प्रत्याशी के पक्ष में प्रभावी वोट ट्रांसफर कराता है तो भाजपा को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। यह संभावित राजनीतिक प्रभाव है, निश्चित वोट ट्रांसफर नहीं।

मुस्लिम मतदाता को लेकर अलग-अलग अनुमान

पुराने विधानसभा जातीय अनुमान में मुस्लिम मतदाता करीब 20 हजार बताए गए थे। दूसरी ओर एक अपेक्षाकृत नए जनसांख्यिकीय प्रोफाइल में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत तक आंकी गई है।

दोनों अनुमानों में स्पष्ट अंतर है।

2026 के 3,69,865 कुल मतदाताओं पर 11 प्रतिशत को केवल गणितीय रूप से लागू करें तो संख्या लगभग 40,700 बैठती है, लेकिन इसे वास्तविक 2026 मुस्लिम वोटर संख्या नहीं माना जा सकता।

यही उदाहरण बताता है कि विधानसभा स्तर पर जातीय और धार्मिक अनुमानों को सावधानी से पढ़ना जरूरी है।

इतना जरूर है कि हाथरस में मुस्लिम वोट कोल या अलीगढ़ शहर जैसी सीटों के मुकाबले छोटा सामाजिक ब्लॉक है। विपक्ष के लिए यह वोट अकेले निर्णायक नहीं बल्कि दलित-OBC गठजोड़ के हिस्से के रूप में अधिक महत्वपूर्ण है।

अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत का एक अनुमान

एक जनसांख्यिकीय चुनावी प्रोफाइल में हाथरस विधानसभा में अनुसूचित जाति मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 28.25 प्रतिशत आंकी गई है। सीट का लगभग 63.64 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 36.36 प्रतिशत शहरी मतदाता आधार वाला बताया गया है।

यह प्रतिशत भी 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं है।

लेकिन इससे सीट की राजनीतिक संरचना समझने में मदद मिलती है।

अगर करीब एक चौथाई से अधिक वोटर SC समुदायों से आते हैं और बाकी बड़ा हिस्सा सवर्ण, OBC, जाट, वैश्य, मुस्लिम तथा दूसरे समुदायों का है, तो किसी भी दल को जीत के लिए SC + गैर-SC सामाजिक गठबंधन बनाना ही पड़ेगा।

2022 में भाजपा का 58.79 प्रतिशत वोट शेयर इसी व्यापक गठबंधन की ताकत दिखाता है।

2012 में BSP ने आरक्षित सीट पर पहला चुनाव जीता

2008 परिसीमन के बाद हाथरस सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई। 2012 में नए आरक्षण और सीमा के बाद पहला विधानसभा चुनाव हुआ।

बसपा के गेंदा लाल चौधरी ने 59,161 वोट हासिल किए।

भाजपा के राजेश कुमार को 50,488 वोट मिले।

कांग्रेस के राजेश राज जीवन को 46,284 और सपा के राम नारायण को 30,186 वोट मिले।

BSP की जीत का अंतर 8,673 वोट रहा।

हाथरस विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोट
गेंदा लाल चौधरीBSP59,161
राजेश कुमारBJP50,488
राजेश राज जीवनकांग्रेस46,284
राम नारायणSP30,186
BSP की जीत8,673

यह परिणाम दिखाता है कि आरक्षित होने के तुरंत बाद BSP ने अपना पुराना सामाजिक आधार बरकरार रखा, लेकिन मुकाबला बहुकोणीय था।

2017 में BJP ने 70,661 वोट से पलटा पूरा समीकरण

2017 तक हाथरस की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी थी।

भाजपा के हरि शंकर माहौर को 1,33,840 वोट मिले।

बसपा के ब्रज मोहन राही को 63,179 वोट मिले।

कांग्रेस के राजेश राज जीवन को 27,301 वोट मिले।

भाजपा ने 70,661 वोट की विशाल बढ़त से सीट जीती।

हाथरस विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
हरि शंकर माहौरBJP1,33,84056.10%
ब्रज मोहन राहीBSP63,179
राजेश राज जीवनकांग्रेस27,301
गेंदा लाल चौधरीRLD3,616
BJP की जीत70,661

2012 में BJP 50 हजार वोट पर थी।

2017 में उसका वोट बढ़कर 1.33 लाख के पार पहुंच गया।

यह बदलाव बताता है कि भाजपा ने अपने पारंपरिक सवर्ण वोट के साथ SC और OBC समुदायों में भी बड़ी हिस्सेदारी हासिल की।

2022 में BJP की जीत एक लाख वोट के पार

2022 में BJP ने प्रत्याशी बदलकर अंजुला सिंह माहौर को मैदान में उतारा और पिछली जीत को और बड़ा कर दिया।

हाथरस विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
अंजुला सिंह माहौरBJP1,54,65558.79%
संजीव कुमारBSP53,79920.45%
ब्रज मोहन राहीSP47,18517.94%
कुलदीप कुमार सिंहकांग्रेस2,4360.93%
NOTA1,7710.67%
BJP की जीत1,00,856

कुल 4,16,253 पंजीकृत मतदाताओं में लगभग 63.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। BJP उम्मीदवार अकेले 1.54 लाख से अधिक वोट हासिल करने में सफल रहीं।

2017 से 2022 के बीच BJP का वोट 1,33,840 से बढ़कर 1,54,655 हो गया।

लेकिन BSP का वोट 63,179 से घटकर 53,799 रह गया।

SP 47,185 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही।

2012 से 2022: BSP से BJP की ओर कैसे बदली हाथरस?

चुनावविजेतापार्टीविजेता वोटजीत का अंतर
2012गेंदा लाल चौधरीBSP59,1618,673
2017हरि शंकर माहौरBJP1,33,84070,661
2022अंजुला सिंह माहौरBJP1,54,6551,00,856

सिर्फ दस वर्षों में हाथरस ने 8,673 वोट की BSP जीत से 1,00,856 वोट की BJP जीत तक का राजनीतिक सफर तय किया।

इसमें सबसे बड़ा बदलाव BJP द्वारा SC मतदाताओं के एक हिस्से को अपने सवर्ण और OBC आधार के साथ जोड़ना रहा।

2017 के बाद हाथरस में BJP का सामाजिक गठबंधन लगातार मजबूत दिखाई दिया।

BSP अभी भी क्यों महत्वपूर्ण?

2022 में BSP को 53,799 वोट यानी 20.45 प्रतिशत मत मिले। पार्टी भाजपा से बहुत पीछे थी, लेकिन SP से आगे दूसरे स्थान पर रही।

हाथरस में BSP का इतिहास भी मजबूत है।

2008 परिसीमन से पहले रामवीर उपाध्याय के नेतृत्व में पार्टी लगातार तीन चुनाव जीती थी।

सीट SC आरक्षित होने के बाद 2012 में भी BSP ने जीत दर्ज की।

यानी हाथरस में BSP के पास दलित वोट और पुराने संगठन का ऐतिहासिक आधार मौजूद है।

2027 में BSP के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य जाटव वोट को फिर केंद्रित करना और उसके साथ अन्य SC उपजातियों तथा गैर-SC मतदाताओं का हिस्सा जोड़ना होगा।

अगर BSP 2022 के 20 प्रतिशत वोट से ऊपर जाती है तो मुकाबले की प्रकृति बदल सकती है।

SP 2022 में तीसरे स्थान पर, 2027 में क्या चुनौती?

2022 में समाजवादी पार्टी के ब्रज मोहन राही को 47,185 वोट यानी 17.94 प्रतिशत मिले। पार्टी BSP से भी पीछे रही।

इसलिए हाथरस में SP के सामने चुनौती केवल BJP को पीछे करना नहीं है, बल्कि पहले अपना सामाजिक आधार काफी बढ़ाना भी है।

सपा के लिए संभावित रास्ता होगा—

SC उपजातियों में हिस्सेदारी,
कुशवाहा-बघेल जैसे OBC समूह,
मुस्लिम मतदाता,
किसान वोट और
BSP से खिसकने वाले दलित मतदाता।

2024 लोकसभा चुनाव में पूरे हाथरस संसदीय क्षेत्र में SP दूसरे स्थान पर जरूर पहुंची, लेकिन BJP ने 2.47 लाख से अधिक वोट की बड़ी जीत दर्ज की और हाथरस विधानसभा खंड में भी आगे रही।

इसलिए SP को 2027 में सीट पर मुकाबला खड़ा करने के लिए 2022 के 47 हजार वोट से बहुत बड़ा विस्तार करना होगा।

RLD-NDA समीकरण से जाट वोट पर नया असर

हाथरस में जाट मतदाताओं की संख्या पुराने स्थानीय अनुमान में करीब 15 हजार थी, लेकिन उनका किसान और ग्रामीण नेटवर्क राजनीतिक प्रभाव को संख्या से बड़ा बना सकता है।

2022 में RLD BJP के खिलाफ विपक्षी खेमे में थी।

2027 से पहले RLD BJP-नीत गठबंधन के साथ है।

इससे हाथरस, सादाबाद और आसपास की जाट बेल्ट में BJP को अतिरिक्त संगठनात्मक सहयोग मिल सकता है। लेकिन वोट का पूरा ट्रांसफर स्वतः हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं है। स्थानीय उम्मीदवार, किसान मुद्दे और गांव स्तर के राजनीतिक संबंध अंतिम व्यवहार तय करेंगे।

हाथरस विधानसभा में जाट संख्या सादाबाद जितनी बड़ी नहीं है, इसलिए यहां RLD प्रभाव अकेले परिणाम तय नहीं करेगा, लेकिन करीबी चुनाव में इसका महत्व बढ़ जाएगा।

2024 लोकसभा ने BJP की क्षेत्रीय मजबूती दिखाई

2024 लोकसभा चुनाव में हाथरस संसदीय सीट पर BJP के अनूप प्रधान बाल्मीकि ने 51.24 प्रतिशत वोट हासिल किए और सपा उम्मीदवार को 2,47,318 वोट से हराया। BSP को भी दो लाख से अधिक वोट मिले।

इस नतीजे से तीन राजनीतिक संकेत मिलते हैं।

पहला, BJP का SC + गैर-SC गठजोड़ संसदीय चुनाव में भी मजबूत रहा।

दूसरा, SP BSP से आगे निकलकर मुख्य विपक्ष बनी।

तीसरा, BSP के पास अभी भी इतना बड़ा वोट है कि उसकी मजबूती या कमजोरी BJP-SP मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि लोकसभा और विधानसभा के मतदान व्यवहार में अंतर होता है। इसलिए 2024 की बड़ी संसदीय जीत को 2027 विधानसभा का निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।

BJP के सामने 2027 में क्या चुनौती?

पहली नजर में हाथरस BJP की मजबूत सीट दिखाई देती है।

2017 की जीत—70,661 वोट।

2022 की जीत—1,00,856 वोट।

2024 लोकसभा—हाथरस विधानसभा खंड में BJP आगे।

वर्तमान विधायक BJP की हैं।

लेकिन 2027 में तीन नई परिस्थितियां होंगी।

पहली—SIR के बाद 43,040 मतदाता कम हो गए हैं।

दूसरी—2022 के बाद नए युवा मतदाता भी जुड़े हैं।

तीसरी—SC वोट के लिए BJP, BSP, SP और संभावित नए दलित विकल्पों की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

यहां एक महत्वपूर्ण तुलना भी है।

2022 में BJP की जीत 1,00,856 वोट की थी, जबकि SIR में शुद्ध मतदाता कमी 43,040 है। यानी वोटर लिस्ट का बदलाव BJP के पुराने जीत अंतर से काफी छोटा है।

इसलिए केवल SIR संख्या के आधार पर सीट को करीबी मान लेना उचित नहीं होगा। विपक्ष को वास्तविक वोट स्विंग भी पैदा करना होगा।

BJP के लिए सबसे मजबूत सामाजिक फॉर्मूला क्या?

2022 का परिणाम संकेत देता है कि BJP का हाथरस मॉडल सिर्फ किसी एक SC जाति पर आधारित नहीं था।

संभावित सामाजिक ढांचा इस प्रकार समझा जा सकता है—

कोरी/अन्य SC वोट का हिस्सा + ठाकुर + ब्राह्मण + वैश्य + गैर-यादव OBC + जाट/किसान + शहरी व्यापारी वोट।

अगर 2027 में BJP इसी व्यापक गठजोड़ को बनाए रखती है तो विपक्ष के लिए एक लाख की पुरानी बढ़त खत्म करना मुश्किल होगा।

लेकिन अगर दलित वोट में बड़ा पुनर्संयोजन होता है और सवर्ण/OBC आधार में भी कुछ स्विंग आता है तो मुकाबला बदल सकता है।

BSP के लिए जाटव के बाहर जाना जरूरी

हाथरस SC सीट पर BSP के लिए सबसे मजबूत आधार जाटव मतदाता माने जाते हैं।

लेकिन 2022 का परिणाम बताता है कि सिर्फ कोर दलित वोट पर्याप्त नहीं है।

BSP 53,799 वोट पर रही, जबकि BJP 1,54,655 तक पहुंच गई।

पार्टी को 2027 में जाटव वोट के साथ धोबी, कोरी, वाल्मीकि, खटीक और दूसरे SC समुदायों के अलावा OBC तथा सवर्ण मतदाताओं में भी हिस्सा जोड़ना होगा।

हाथरस का 2012 परिणाम बताता है कि BSP इस सीट पर ऐसा सामाजिक गठजोड़ पहले बना चुकी है।

प्रत्याशी की SC उपजाति क्यों होगी महत्वपूर्ण?

SC आरक्षित विधानसभा में प्रत्याशी चयन सामान्य सीट से अलग तरह का जातीय समीकरण पैदा करता है।

हाथरस में पुराने सामाजिक आंकड़े कई अलग SC समूहों की मौजूदगी दिखाते हैं—

जाटव,
धोबी,
कोली,
वाल्मीकि,
खटीक और दूसरे अनुसूचित समुदाय।

मौजूदा विधायक कोरी समुदाय से हैं।

2017 में BJP के विजेता हरि शंकर माहौर थे।

2022 में BJP ने अंजुला सिंह माहौर को मौका दिया।

2024 लोकसभा में BJP ने बाल्मीकि और SP ने वाल्मीकि उम्मीदवार उतारा।

इसलिए 2027 में BJP, SP और BSP किस SC उपजाति के प्रत्याशी को चुनते हैं, उससे चुनावी रणनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

हाथरस का अर्ध-शहरी चरित्र भी बदलता है चुनावी गणित

हाथरस विधानसभा केवल शहर की सीट नहीं है। वर्तमान सीमाओं में हाथरस नगर क्षेत्र के साथ सासनी उपखंड का पूरा हिस्सा, हाथरस कानूनगो सर्कल के गांव और मेंडू नगर पंचायत शामिल हैं। सीट का लगभग 63.64 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 36.36 प्रतिशत शहरी मतदाता आधार वाला माना गया है।

इससे चुनावी मुद्दे भी दो हिस्सों में बंटते हैं।

शहरी मतदाता के लिए—

व्यापार,
सफाई,
जल निकासी,
ट्रैफिक,
सड़क,
रोजगार और
नगर सुविधाएं अहम हो सकती हैं।

ग्रामीण मतदाता के लिए—

कृषि,
सिंचाई,
बिजली,
आवारा पशु,
फसल मूल्य,
ग्रामीण सड़क और
सरकारी योजनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

यही शहरी-ग्रामीण मिश्रण जातिगत वोट को भी पूरी तरह एक दिशा में जाने से रोक सकता है।

हींग उद्योग और रोजगार का सवाल

हाथरस की आर्थिक पहचान हींग प्रसंस्करण उद्योग से जुड़ी है। इसके साथ छोटे उद्योग, तेल मिल, कपड़ा कारोबार और कृषि आधारित व्यापार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।

इसलिए 2027 में स्थानीय उद्योग और रोजगार बड़ा गैर-जातीय मुद्दा बन सकते हैं।

युवा मतदाताओं के लिए स्थानीय रोजगार,

छोटे कारोबारियों के लिए बिजली और बाजार,

कारीगरों के लिए उद्योग की स्थिति,

और किसानों के लिए मंडी तथा कृषि आय

जैसे मुद्दे जातीय पहचान के भीतर भी राजनीतिक स्विंग पैदा कर सकते हैं।

SIR की अंतिम सूची तक बड़ी संख्या में नए मतदाता भी जोड़े गए, जिससे युवा वोट की भूमिका और बढ़ती है।

2027 में महिला वोट क्यों होगा अहम?

हाथरस विधानसभा की 2026 सूची में 1,68,775 महिला मतदाता हैं। यह सीट के कुल वोटरों का लगभग 45.6 प्रतिशत है।

वर्तमान विधायक भी महिला हैं।

महिला मतदाता जातीय पहचान के साथ राशन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, महंगाई, आवास, बिजली, घरेलू आय और सरकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर अलग मतदान व्यवहार दिखा सकती हैं।

2022 की बड़ी BJP जीत में महिला वोट की भूमिका को बूथवार आंकड़ों के बिना सटीक रूप से अलग नहीं किया जा सकता, लेकिन 2027 में किसी भी दल के लिए करीब 1.69 लाख महिला वोटरों को नजरअंदाज करना संभव नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण

हाथरस के अलावा प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों की सामाजिक संरचना, प्रमुख जातियों, वोटर बेस और चुनावी इतिहास को समझने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विधानसभा-वार श्रृंखला देखी जा सकती है।

हाथरस जिले के भीतर भी तीनों विधानसभा सीटों का सामाजिक चरित्र अलग है। हाथरस SC सीट पर SC उपजातियों के साथ ठाकुर-वैश्य-ब्राह्मण समीकरण महत्वपूर्ण है, जबकि सादाबाद में जाट प्रभाव कहीं ज्यादा बड़ा है और सिकंदराराऊ की सामाजिक संरचना अलग राजनीतिक मॉडल बनाती है।

2027 के विधानसभा चुनाव में हाथरस पर क्यों रहेगी नजर?

हाथरस के 2027 चुनाव की कहानी सात बड़े आंकड़ों में समझी जा सकती है।

2012: BSP ने 8,673 वोट से सीट जीती।

2017: BJP ने 70,661 वोट की बड़ी जीत दर्ज की।

2022: BJP की बढ़त बढ़कर 1,00,856 वोट हो गई।

2022 BJP वोट शेयर: 58.79 प्रतिशत।

2024: BJP ने पूरे हाथरस लोकसभा क्षेत्र में 2,47,318 वोट से जीत दर्ज की और हाथरस विधानसभा खंड में भी बढ़त बनाए रखी।

2026 SIR: हाथरस विधानसभा में 43,040 मतदाता कम हुए।

2026 अंतिम वोटर: अब सीट पर 3,69,865 मतदाता हैं।

इन सात आंकड़ों के बीच 2027 के कई बड़े सवाल खड़े हैं।

क्या BJP 2022 का 58 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर बनाए रख पाएगी?

क्या अंजुला सिंह माहौर को दोबारा टिकट मिलता है या BJP नया SC चेहरा लाती है?

क्या BSP अपना पुराना जाटव और दलित आधार फिर संगठित कर पाएगी?

क्या SP 2022 के तीसरे स्थान से निकलकर 2024 की लोकसभा जैसी मुख्य विपक्षी स्थिति विधानसभा में भी बना पाएगी?

RLD के NDA में होने से जाट और किसान वोट पर कितना असर पड़ेगा?

SC उपजातियों—जाटव, कोरी, धोबी, वाल्मीकि और दूसरे समूहों—का राजनीतिक वितरण किस तरह बदलेगा?

और सबसे महत्वपूर्ण—2026 की नई सूची में 43 हजार वोटर कम होने के बाद कौन से बूथ और सामाजिक इलाके सबसे ज्यादा बदले हैं?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आधिकारिक मतदान तारीखें 8 अगस्त 2026 तक घोषित नहीं हुई हैं

प्रदेश की सीटवार तैयारियों, संभावित प्रत्याशियों, गठबंधन और चुनावी रणनीतियों से जुड़ी विस्तृत कवरेज के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विशेष श्रृंखला देखी जा सकती है।

Hathras Assembly Caste Equations की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह SC आरक्षित सीट होने के बावजूद केवल दलित वोट से तय नहीं होती। ठाकुर, वैश्य और ब्राह्मण तीन बड़े गैर-SC समूह हैं, जबकि जाटव, धोबी, कोरी-कोली और वाल्मीकि जैसे अलग SC समुदाय प्रत्याशी की सामाजिक ताकत तय करते हैं। कुशवाहा, जाट, बघेल, मुस्लिम और दूसरे छोटे-मध्यम समुदाय अंतिम चुनावी संतुलन बनाते हैं।

3,69,865 मतदाताओं वाली हाथरस विधानसभा में 2027 की असली परीक्षा BJP के 2017 से बने SC-सवर्ण-OBC सामाजिक गठजोड़ और विपक्ष की दलित वोट को पुनर्गठित करने की क्षमता के बीच होगी। 2012 में केवल 8,673 वोट से BSP की जीत से लेकर 2022 में BJP की 1,00,856 वोट की बढ़त तक का सफर बताता है कि हाथरस में जातियां लगभग वही रहते हुए भी उनका राजनीतिक गठबंधन बदलने पर परिणाम पूरी तरह बदल सकता है। 2026 की नई मतदाता सूची के बाद अब बूथवार सामाजिक गणित इस सीट की अगली बड़ी कहानी लिखेगा।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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