July 11, 2026

सरकारी समिति ने 'सतलुज' फिल्म पर प्रतिबंध को सही ठहराया

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ की सामग्री की समीक्षा के लिए गठित एक समिति ने ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश की है, क्योंकि यह फिल्म कथित तौर पर भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने वर्ष 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार किए जाने के मामलों की पड़ताल की थी। बाद में, वर्ष 1995 में राज्य पुलिस द्वारा कथित तौर पर उनका अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिए जाने के बाद, तीन जुलाई को प्रदर्शन के महज दो दिन बाद ही इस फिल्म को भारत में ओटीटी मंच ‘ज़ी5’ से हटा दिया गया था।

इसके बाद, मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया ताकि फिल्म की विस्तृत जांच कर आगे की कार्रवाई के लिए सुझाव दिए जा सकें।

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इस बीच, पंजाब में इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप ले लिया और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने इस फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग की। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने पूरे राज्य में इस फिल्म को दिखाने की योजना का ऐलान किया है।

सूत्रों के मुताबिक, समिति ने यह साफ किया है कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69-ए के तहत फिल्म पर लगाया गया प्रतिबंध पूरी तरह जायज है। धारा 69-ए सरकार को देश की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ दोस्ताना संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर इंटरनेट आधारित सामग्री को रोकने का अधिकार देती है।

इस समिति में सूचना एवं प्रसारण, गृह, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, महिला एवं बाल विकास, विदेश, रक्षा, और विधि एवं न्याय जैसे विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

समिति ने अपनी समीक्षा में पाया कि फिल्म की कहानी निष्पक्ष नहीं है। इसमें आतंकवाद के दौर में सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित ज्यादतियों को तो प्रमुखता से दर्शाया गया है, लेकिन दूसरी तरफ आतंकवादियों की हिंसक गतिविधियों पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया है।

सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के प्रावधान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ऐसी इंटरनेट सामग्री पर नजर रखने और कार्रवाई करने की शक्ति देते हैं, जो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती हैं।

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश