बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वे दिसंबर 2026 में भारत से स्वदेश लौटने की बात की है. उन्होंने साफ कहा कि उन्हें मौत का डर नहीं है. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है, वो भी 2024 के छात्र आंदोलन के दमन में करीब 1,400 लोगों की मौत के आरोप में. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शेख हसीना दिसंबर में ही वापसी की बात क्यों कर रही हैं? इसका जवाब बांग्लादेश के इतिहास में छिपा है, जहां दिसंबर महीना शेख हसीना और खुद बांग्लादेश के लिए कई मायनों में खास रहा है.
1971- आजादी का महीना
16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया था. इसी दिन पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया था और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का अंत हुआ था. यह दिन आज भी “विजय दिवस” के रूप में मनाया जाता है और शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान इस आजादी के सबसे बड़े नायक माने जाते हैं.
1990- लंबे संघर्ष के बाद जीत
दिसंबर 1990 में ही लंबे जनआंदोलन के दबाव में सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद को इस्तीफा देना पड़ा था. इस आंदोलन में शेख हसीना की अवामी लीग की अहम भूमिका थी और इसे लोकतंत्र की वापसी के तौर पर देखा गया.
2008- सत्ता में वापसी
इसके बाद दिसंबर 2008 में हुए आम चुनाव में शेख हसीना की अवामी लीग को भारी बहुमत मिला और वे प्रधानमंत्री पद पर काबिज हुईं. यह उनकी सियासी वापसी का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. इन तीनों घटनाओं को जोड़कर देखा जाए, तो दिसंबर महीना शेख हसीना और उनकी पार्टी के लिए ऐतिहासिक रूप से “शुभ” या टर्निंग पॉइंट वाला महीना रहा है. आजादी, लोकतंत्र की बहाली और सत्ता वापसी, तीनों दिसंबर में हुए. यही वजह मानी जा रही है कि अब जब उन पर 150 से ज्यादा केस दर्ज हैं और मौत की सजा का साया सिर पर है, तब भी वे प्रतीकात्मक रूप से इसी महीने को अपनी वापसी के लिए चुन रही हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, इसलिए तारीख आगे बदल भी सकती है.
यह भी पढ़ें- मरने या जेल जाने से नहीं डरती शेख हसीना का ऐलान; नई दिल्ली से क्यों खफा हुआ ढाका

देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
Read More