August 5, 2026

सीता राम चरित अति पावन…, किसने लिखा था ‘रामायण’ का ये गाना? हिंदी में समझिए इसका मतलब

सीता राम चरित अति पावन…, किसने लिखा था ‘रामायण’ का ये गाना? हिंदी में समझिए इसका मतलब

Aug 05, 2026 08:22 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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Ramayana Song: आपने रामानंद सागर की ‘रामायण’ देखी है तो आपने इसका गाना ‘सीता राम चरित अति पावन…’ भी सुना होगा। आइए आपको इस गाने का मतलब बताते हैं।

Ramanand Sagar Ramayana

रामानंद सागर की रामायण की तस्वीर

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'रामायण' का ट्रेलर आ गया है। जब से इसका ट्रेलर आया है तब से ही इस फिल्म के बारे में सोशल मीडिया पर चर्चाएं हो रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि फैंस इस नए ट्रेलर के बैकग्राउंड में 80 के दशक में आई रामानंद सागर की 'रामायण' का कालजयी भजन 'सीता राम चरित अति पावन' जोड़कर शेयर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि रामानंद सागर की 'रामायण' की जगह तो कोई ले ही नहीं सकता, लेकिन उसके संगीत और भजनों का मुकाबला कर पाना भी नामुमकिन है। आइए जानते हैं कि इस वायरल गाने के बोल किसने लिखे हैं, इसको आवाज किसने दी है और इसका असली मतलब क्या है।

किसने गाया है ये गाना?

'सीता राम चरित अति पावन' रामानंद सागर के 'रामायण' (1987) का शुरुआती गीत हुआ करता था। इसे प्रसिद्ध संगीतकार और गीतकार रवीन्द्र जैन ने लिखा और गाया था। बता दें, रवीन्द्र जैन बचपन से ही नेत्रहीन थे फिर भी उन्होंने अपने करियर में ऐसे-ऐसे गाने लिखे थे कि आप दंग रह जाएंगे। साल 2015 में उन्हें कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था।

रामायण के गाने के बोल

सीता राम चरित अति पावन

मधुर सरस और अति मन भावन

औ औ पुनि पुनि कितने हो सुने सुनाये

हिये की प्यास बुझत ना बुझाये

राम सिया राम सिया राम जय जय राम

रामायण सुर तरु की छाया(राम सिया राम सिया राम जय जय राम)

दुःख भय दूर निकट जो आया(राम सिया राम सिया राम जय जय राम)

नाना भाटी राम अवतारा(राम सिया राम सिया राम जय जय राम)

रामायण सात कोटि अपरा

क्या है इसका मतलब?

सीता राम चरित अति पावन: इसका मतलब ये है कि माता सीता और प्रभु श्री राम का चरित्र और उनकी लीलाएं सबसे अधिक पवित्र और पापों को मिटाने वाली हैं।

मधुर सरस और अति मन भावन: ये कथा बहुत ही मीठी, रस से भरपूर और मन को अत्यंत प्रिय लगने वाली है।

पुनि पुनि कितनेहू सुने सुनाये, हिय की प्यास बुझत ना बुझाये: इस कथा को चाहे जितनी बार भी सुनो या सुनाओ, फिर भी मन नहीं भरता। बार-बार सुनने की लालसा बनी रहती है।