August 4, 2026

तरीके और भी हैं…!!—गृहलक्ष्मी की कहानियां

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तरीके और भी हैं…!!—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: देखो जी अब ज्यादा हो रहा है समझे….आप अगर नहीं बोल सकते या फिर आपको शर्म आती है तो मुझे बता दीजिए मैं कह दूंगी दीदी और जीजाजी से…

04 Aug 2026 21:00 IST

 तरीके और भी हैं…!!—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: देखो जी अब ज्यादा हो रहा है समझे….आप अगर नहीं बोल सकते या फिर आपको शर्म आती है तो मुझे बता दीजिए मैं कह दूंगी दीदी और जीजाजी से…
नहीं नहीं तुम कुछ मत कहना आज मैं कोशिश करता हूं कि कह दूं
मतलब हद है… कोशिश करता हूं क्या होता है.. देखिए सीधे—सीधे बोलिये आपसे होगा या नहीं…आप कह पाएंगे या नहीं…और मैं कोई ग़लत बात कहने या लड़ाई करने थोड़े ही कह रही हूं आपसे…आजतक कुछ ग़लत करवाया है कभी आपसे..?
अरे बाबा, मैंने कहा ये सब कभी तुमसे..बुरा तो मुझे भी बहुत लगता है पर कुछ कह नहीं पाता… लेकिन मुझे आज भर का मौका दो पक्का कह दूंगा…
पंकज ने पत्नी शैला को आश्वासन तो दे दिया था कि वो अपनी बहन और जीजा को कह देगा पर शैला को शक था कि शायद ही पंकज की जुबान खुल पाए अपनी बड़ी बहन और बहनोई के आगे …!
दरअसल पंकज के जीजा और बहन अपनी बेटी के साथ उसके विवाह के लिए.. पिछले दस दिनों से उनके पास आए हुए थे,इसी शहर में दो तीन जगह बात चल रही थी जिसमें से एक जगह पक्का होना निश्चित था…शैला एक अच्छी सहृदय औरत थी,अच्छी भाभी भी थी और उसे रिश्ते निभाना आता था… वहीं पंकज की माली हालत बहुत अच्छी नहीं होते हुए भी वो घर बहुत अच्छी तरह चला रही थी और मेहमाननवाजी भी बहुत खूबसूरती से कर लेती थी….मुंह पर मुस्कान बनाए रखकर वो सब काम भी निपटाती और मेहमानों से बातचीत भी करती थी…और हर स्वाभिमानी स्त्री की तरह उसे अपनी परिस्थितियों से समझौता कर खुश रहना आता था…अब ननद ननदोई आए थे उनकी बेटी थी और बात बेटी की शादी की थी तो शैला मन से सबकुछ कर रही थी।
पर वो लोग जबसे आए थे तबसे शैला देख रही थी कि शाम को जब दीदी जीजाजी टहलने जाते तो उधर से कभी फल तो कभी सब्जी तो कभी कोई दाल कभी कोई और राशन का सामान लिए आते…!!
एकाध दिन तो शैला को भी समझ नहीं आया कि वो लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं..पहले दिन तो रख लिया यह कहकर कि….
इनकी क्या जरूरत थी…पंकज जी तो ऑफिस से लौटते वक्त सारा सामान लेते ही आते हैं ना…फिर आपलोग क्यों ले आए…अब ऐसा मत करिएगा।
पर अगले दिन और उसके बाद भी सिलसिला बदस्तूर जारी रहा तो शैला का मन खराब हो उठा…ये कौन सा तरीका है अपमानित करने और उनकी माली हालत का मजाक बनाने का….ठीक है वो रोज पनीर और खोया मलीदा नहीं परोस सकती पर जो भी बनाती है पूरे मनोयोग से बनाती है और स्वादिष्ट बनाती है….ननद और ननदोई किचन के सामानों में मदद करें इतनी भी गई गुजरी हालत नहीं है उनके भाई की…उसे दिल से बुरा लग रहा था..और बात भी सच है कि मदद करने के सौ तरीके हैं घर के सामान लाकर ही मदद की जाए ये घरवालों को बुरा लग सकता है इसका ख्याल रखा जाना चाहिए।
अगर पैसे खर्च करने का इतना ही शौक था तो होटल में भी तो रह सकते थे… यहां ये सब करने की क्या जरूरत थी-मन ही मन सोचती शैला…और बीते कल तो मजाक मजाक में कहा भी शैला ने..
दीदी…ये जो इधर उधर करके आप खर्च करती है ना वो जमा करके रखिए एक ही बार में चंद्रहार दे देना मुझे खरीद कर…
दीदी जीजाजी हंस पड़े और उन्होंने मज़ाक को मज़ाक में ही उड़ा दिया।
और बार बार मना करने के बाद आज भी पंकज के आने से पहले जब दीदी और जीजाजी घुम कर आए तो सेब केले वगैरह लेते आए…तो शैला का गुस्सा सातवें आसमान पर था…!
इधर पंकज ने बात करने के लिए हां तो भर दिया था पर बड़ी बहन थी जीजा थे…क्या कहता कैसे कहता…
पैसे ना खर्चने की बात कहता या सामान ना लाने की बात कहता तो दीदी हंसकर टाल देती और कहती…
छोटे…तू इतना कब से सोचने लगा…अरे कुछ दिख जाता है मिल जाता है तो उठा लाते हैं… इसमें कौन सी बड़ी बात है गई…!
पंकज चुपचाप से दीदी और जीजाजी के पास बैठ गया तो जीजाजी बताने लगे..
साले साहब…बड़े मौके पर आए आप अभी अभी शुक्ला जी का फोन आया था…वो प्रिया से मिलना चाहते हैं और कहिए तो औपचारिक रूप से रिश्ता पक्का ही कर लेना चाहते हैं…हमने होटल की बात की तो कह रहे हैं नहीं घर पर ही आ जाएंगे…तो मैं क्या कह रहा था चलिए दोनों मिलकर उनके स्वागत का प्रबंध कर आते हैं…प्रतिमा जरा मेरा एटीएम कार्ड देना..!
दीदी रूको… जीजाजी एटीएम कार्ड की क्या जरूरत है… मैं हूं ना…आप चलिए सब हो जाएगा…--पंकज ने कहा, 'नहीं नहीं पंकज जी…आप और शैला जी जितना कर रहे हैं वहीं बहुत है…ये सब मैं नहीं करने दे सकता आपको!!
क्यों जीजाजी….जितना कर रहे हैं उतना ही बहुत है का क्या मतलब है…आप और दीदी भी तो सहयोग कर रहे हैं ना कभी फल,कभी सब्जी तो कभी कोई राशन का सामान तो कभी कुछ और ला लाकर…तो उसी तरह मैं सारे इंतजाम करूंगा आप जैसे अभी मदद कर रहे हैं वैसे उसमें भी मदद कर देना…मानता हूं आपके जैसी हैसियत नहीं सारे इंतजाम करने की मेरी पर कोशिश बढ़िया करने की ही करूंगा….!
बहन प्रतिमा भाई की भावनाओं को समझ गई थी और शर्मिंदा भी थी पर जीजा जी को शायद अभी समझना बांकी था…वो बोल उठे..
देखिए पंकज जी…बात हैसियत और औकात की नहीं है..हमें पता है आपको और शैला को बहुत अच्छा मैनेजमेंट आता है…आप सब कर लेंगे…पर बुरा मत मानना बात शौक की भी है…इकलौती बेटी है मेरी प्रिया तो मैं उसका सबकुछ खुद करना चहता हूं…आप समझ रहे हैं ना…बुरा मत मानना मैं नहीं चाहता कोई इस बीच में आए..और अच्छा भी नहीं लगता बेटी मेरी और खर्च आप करें..जिसका काम वही करें तो अच्छा है ना..!
यही तो मैं भी समझाना चाहता हूं आपलोगो को जीजाजी---मन ही मन बोला उठा पंकज
वो सब समझ रहा है…और आगे भी समझेगा…ये सब वो हमलोगो को समझाने के लिए बोल रहा है जी…पंकज और शैला अपने हिसाब से हमारा खाना पीना रहना सब बेस्ट करने की कोशिश में लगे हैं और करने की कोशिश क्या… बल्कि कर ही रहे हैं…पर उसमें हम घुसने की कोशिश कर रहे हैं…एक टाइम कोई एक सामान लाकर देकर हम इनके किए को कम कर रहे हैं… मेहमाननवाजी के इनका शौक के बीच तो हम आ ही रहे हैं साथ ही इन्हें कमतरी का एहसास भी दिला रहे हैं…और सच में मुझे बुरा लग रहा है अब मम्मी पापा नहीं है तो हम ऐसा कर रहे हैं मम्मी पापा रहते तो क्या कभी हमें वो ऐसा करने देते…कितना बुरा लग रहा होगा शैला को… मुझे अभी एहसास हो रहा है ---प्रतिमा ने आगे आकर कहा।
कोई नहीं दीदी…गलती इंसानों से ही होती है…ये आपका अपना घर है मायका है…आपको एहसान नहीं चुकाना है हक से रहना है…शैला कई दिनों से मुझे कह रही थी कि मैं आपलोगों से इस संदर्भ में बात करूं पर मुझे बोलते ही नहीं बनता था… मैं जानता हूं ऐसा करके आप हमारी मदद ही करना चाहती हैं पर ऐसे अच्छा नहीं लगता और निश्चिंत रहिए जब हमें मदद की जरूरत होगी बेहिचक मांग लेंगे…पर किचन में ये छोटा मोटा सहयोग शैला और मुझे हीनभावना से भर देता है दी…आप ये ना करें बस..!
चाय के बहाने किचन में आकर धीरज ने संक्षेप में सारी बातें शैला को बताई तो उसका भी उतरा चेहरा पहले जैसा खिल उठा..!
भई बीबी से गुफ्तगू खत्म हो गई हो तो चले--जीजाजी ने आवाज दी
हां जीजाजी चलिए ना..--पंकज ने रसोई से बाहर आते हुए कहा।
अब तो एटीएम रख सकता हूं ना साले साहब और सलहज साहिबा--जीजाजी ने आदेश लेने की मुद्रा बनाकर कहा
हां जीजाजी मैं भी तो अपने गले की सफाई शुरू कर दूं..उसपर चंद्रहार जो सजने वाला है---शैला की इस बात पर सब हंस पड़े और माहौल फिर से खुशनुमा हो उठा।

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