अब भारत के नजदीक सेना उतारने की तैयारी में ट्रंप! चीन के करीब ऐसी हिमाकत क्यों? क्या प्लान
Aug 04, 2026 10:49 pm ISTवार्ता, नई दिल्ली/ढाका
माना जाता है कि अमेरिका ने बांग्लादेश को एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान और एएच-64ई अपाचे आक्रमण हेलीकॉप्टर, साथ ही लॉकहीड निर्मित टीपीवाई-4 भूमि-आधारित वायु रक्षा रडार और NASAMS वायु रक्षा मिसाइल देने का प्रस्ताव दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
पिछले पांच महीनों से ईरान जंग में उलझे दुनिया के सबसे ताकतवर देश कहे जाने वाले अमेरिका की नजर अब बांग्लादेश पर आ टिकी है। अमेरिका अब भारत से सटे बंगाल की खाड़ी में सेना उतारने जा रहा है। इसका मकसद बांग्लादेश के साथ नौसैनिक अभ्यास करना है और धीरे-धीरे बांग्लादेश की हथियारों के लिए चीन पर निर्भरता कम करना है। अमेरिका ने मंगलवार (04 अगस्त) को कहा कि वह अपना अगला नौसैनिक अभ्यास आगामी नवंबर में बांग्लादेश में आयोजित करेगा।
ढाका के सूत्रों ने बताया कि महत्वपूर्ण नौसैनिक अभ्यास ऑपरेशन अफ्लोट रेडीनेस एंड ट्रेनिंग (CARAT) को बांग्लादेश और म्यांमार के तट से दूर बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। इसमें अमेरिकी नौसेना और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की नौसेनाओं के साथ-साथ बांग्लादेश और श्रीलंका भी शामिल है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट के बाद अमेरिका के पैसिफिक फ़्लीट के प्रमुख एडमिरल स्टीफ़न टी. कोहलर का यह घोषित कदम, अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांड और बांग्लादेशी सेना के संयुक्त जंगल युद्धाभ्यास 'टाइगर लाइटनिंग 2026' के तुरंत बाद आया है। यह द्विपक्षीय प्रशिक्षण 19 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक बांग्लादेश के सिलहट स्थित जलालाबाद छावनी में आयोजित किया गया था।
ढाका में बनी योजना की समीक्षा
बांग्लादेशी सेना की पैरा कमांडो ब्रिगेड और अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांड और ओरेगन आर्मी नेशनल गार्ड के सैनिक उस पखवाड़े भर चले अभ्यास में शामिल थे। इसका आयोजन असम सीमा के बहुत निकट किया गया था। एडमिरल कोहलर और प्रधानमंत्री रहमान के बीच मंगलवार को हुई बैठक में बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हस्ताक्षर किए जाने के लिए प्रस्तावित जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिट्री इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस समझौते पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच गोपनीय सैन्य खुफिया जानकारी को सुरक्षित रूप से साझा करने और उसकी रक्षा करने के लिए एक कानूनी संरचना स्थापित होने की उम्मीद है। इस उस पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है जिसके बाद वाशिंगटन अपने उन्नत रक्षा उपकरण, जिनमें जेट विमान भी शामिल हैं, बेच सकेगा।
ढाका को हथियार देगा अमेरिका
माना जाता है कि अमेरिका ने बांग्लादेश को एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान और एएच-64ई अपाचे आक्रमण हेलीकॉप्टर, साथ ही लॉकहीड निर्मित टीपीवाई-4 भूमि-आधारित वायु रक्षा रडार और एनएएसएएमएस वायु रक्षा मिसाइल देने का प्रस्ताव दिया है। बांग्लादेश एमक्यू-9 रीपर जैसे यूएवी पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल बांग्लादेश अपने सैन्य उपकरणों का 70-80 प्रतिशत चीन पर निर्भर रहा है। इसके अलावा अमेरिका एक और सैन्य समझौते, एसीएसए पर भी बातचीत कर रहा है। यह रसद समर्थन (साजो-सामान से जुड़ी मदद) का समझौता है। इससे अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को रखरखाव और ईंधन भरने के लिए बांग्लादेश के बंदरगाहों और हवाई क्षेत्रों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इससे बंगाल की खाड़ी में आपदा के समय बेहतर संयुक्त कार्रवाई एवं समुद्री निगरानी में आसानी होगी।
द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक करने पर जोर
ढाका में अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश ने फिर से कहा है कि वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है और द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक और अधिक समकालीन क्षेत्रों तक बढ़ाने में रुचि रखता है। पिछले सप्ताह बांग्लादेश को 'पैक्स सिलिका' आर्थिक सुरक्षा ढांचे में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और ज़रूरी खनिजों से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति चेन को चीन से दूर ले जाकर नए सिरे से तैयार करने के लिए बनाया गया है।
पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का प्रस्ताव
दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर ने हाल ही में ढाका की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री रहमान के साथ हुई एक बैठक में प्रस्ताव रखा कि बांग्लादेश अमेरिकी-नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में शामिल हो। गोर ने एक दिन पहले ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से भी मुलाकात की थी। भारत पहले से ही पैक्स सिलिका का पूर्ण सदस्य है।
यह एक ऐसा समझौता है जिसका उद्देश्य चीन से बचते हुए एक रणनीतिक आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना है। ढाका के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह संभव है कि ढाका को ऐसा प्रस्ताव दिए जाने से पहले इस मुद्दे पर भारतीयों के साथ चर्चा की गई हो ताकि उसे बीजिंग के प्रभाव से दूर किया जा सके, जिसे लेकर दिल्ली और वाशिंगटन दोनों चिंतित हैं। उल्लेखनीय है कि पैक्स सिलिका कोई साधारण पारंपरिक मुक्त-व्यापार समझौता नहीं है बल्कि यह एक आर्थिक-सुरक्षा ढांचा है, जिसके अंतर्गत सहभागी देश अमेरिका, भारत, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया महत्वपूर्ण खनिजों और एआई की दुनिया में व्यापार एवं निवेश के लिए एक नई आपूर्ति श्रृंखला का सचेत रूप से निर्माण कर रहे हैं, जिसमें चीन की कोई भूमिका नहीं होगी।
