
बकरे की अंतिम यात्रा देखकर भावुक हुए लोग.
Barwani News: किसी इंसान की अंतिम यात्रा में फूलों से सजी बैलगाड़ी, ढोल-नगाड़ों की गूंज और सैकड़ों लोगों की भीड़ आम बात हो सकती है, लेकिन जब यही सम्मान एक पालतू बकरे को मिले तो यह दृश्य हर किसी को हैरान कर देता है. मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एक ऐसे ही अनोखे रिश्ते की मिसाल देखने को मिली, जहां ‘मालण बाबा’ नाम से मशहूर एक बकरे की मौत के बाद पूरे गांव ने उसे हिंदू रीति-रिवाजों से श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई दी.
बकरे के जाने से गांव में शोक का माहौल
दरअसल, जिले के बांडी हरणगांव में रहने वाले ग्रामीणों के लिए मालण बाबा सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं था, बल्कि आस्था और अपनत्व का प्रतीक था. उसकी मौत की खबर फैलते ही गांव में शोक का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने मिलकर बैलगाड़ी को फूल-मालाओं से सजाया और उसी पर बकरे के पार्थिव शरीर को रखा. इसके बाद ढोल-नगाड़ों, रंग गुलाल उड़ाते हुए पूरे गांव में उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धा के साथ यात्रा में शामिल हुए. कई लोगों की आंखें नम थीं तो कुछ लोग भावुक होकर नाचते गाते उसे अंतिम विदाई देते नजर आए.
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ग्रामीणों का कहना है कि इस बकरे को वर्षों पहले स्थानीय लोकदेवता मालण बाबा के नाम पर छोड़ा गया था. तभी से उसका नाम भी मालण बाबा पड़ गया. वह पूरे गांव में बिना किसी रोक-टोक के घूमता था और हर घर का चहेता बन चुका था. छोटा बच्चा हो या बड़ा हर कोई उसके साथ खेलता था. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उसने कभी किसी बच्चे या बुजुर्ग को नुकसान नहीं पहुंचाया. यही वजह थी कि लोग उसे एक सामान्य पशु नहीं बल्कि परिवार के सदस्य जैसा सम्मान देते थे.
रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया अंतिम संस्कार
अंतिम यात्रा गांव की गलियों से होकर बाहर स्थित एक नाले के पास पहुंची. वहां ग्रामीणों ने धार्मिक परंपराओं और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया. अंतिम संस्कार के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और श्रद्धापूर्वक उसे विदाई दी. कई ग्रामीण इस दौरान भावुक हो गए और इसे अपने परिवार के सदस्य को खोने जैसा दुख बताया. इस अनोखी अंतिम यात्रा की चर्चा अब पूरे बड़वानी जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है.
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सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तस्वीरें और वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. लोग इसे इंसानों और पशुओं के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव का दुर्लभ उदाहरण बता रहे हैं. बड़वानी की यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि प्रेम, अपनापन और सम्मान केवल इंसानों तक सीमित नहीं होते. जब किसी पशु से भावनात्मक रिश्ता जुड़ जाता है तो वह भी परिवार का हिस्सा बन जाता है. मालण बाबा की अंतिम यात्रा इसी रिश्ते की ऐसी मिसाल बन गई, जिसने हर देखने वाले को भावुक कर दिया.

शिव चौबे
शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.
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