भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे के साथ उनके चचेरे भाई और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) विधायक धनंजय मुंडे के राजनीति से संन्यास लेने से जुड़े बयानों ने सियासी हलकों में चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका राजनीति छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।
एक अगस्त को बीड जिले के परली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंकजा मुंडे ने स्थानीय सड़कों की खराब स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी आया, जब उन्होंने राजनीति छोड़ने के बारे में सोचा।
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पंकजा मुंडे ने संन्यास को लेकर क्या कहा?
पंकजा मुंडे ने कहा, "मैं पिछले 24 घंटे से इसी सड़क से गुजर रही हूं। यहां सब कुछ वैसा ही है। मैंने अपने निजी सहायक (पीए) से पूछा कि आखिर यह सब कब बदलेगा? मैंने कहा कि अब मैं थक गई हूं और राजनीति से संन्यास लेना चाहती हूं।" हालांकि, पंकजा मुंडे ने तुरंत अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि आम लोगों के उत्साह ने उन्हें फिर से काम करने की प्रेरणा दी।
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उन्होंने कहा, "जब मैंने गरीब लोगों की आंखों में चमक देखी तो मुझे एहसास हुआ कि मेरा काम अभी खत्म नहीं हुआ है।" भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे ने सियासी संकेतों से भरी टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर मुझे लगे कि राजनीति मेरे विचारों के अनुरूप नहीं है, तो जैसे समृद्धि महामार्ग पर निकास (एग्जिट) होता है, वैसे ही मेरी राजनीति में भी एक निकास होगा। राजनीति वही प्रभावी ढंग से कर सकता है, जो उस निकास के लिए भी तैयार हो।"
सियासी संन्यास पर क्या बोले धनंजय मुंडे?
पंकजा मुंडे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह 2024 के लोकसभा चुनाव में बीड सीट से हारने के बाद भाजपा की ओर से विधान परिषद के लिए मनोनीत की जा चुकी हैं। इसी दिन माजलगांव में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में एनसीपी विधायक धनंजय मुंडे ने भी राजनीति छोड़ने की संभावना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, "जातीय राजनीति बहुत गंदी हो गई है। कई बार हम जैसे लोगों के मन में भी सवाल आता है कि क्या राजनीति में बने रहना चाहिए।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह सामाजिक सुधारकों के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। धनंजय मुंडे ने कहा, "हम महान समाज सुधारकों से प्रेरणा लेते हैं और समानता तथा सामाजिक न्याय के लिए काम करते रहेंगे।"
धनंजय मुंडे को देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वह मार्च 2025 में राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मस्साजोग के सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच मंत्री पद छोड़ा था। इस मामले में उनके करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड का नाम कथित मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया था।