Short Story in Hindi: बीएड किए हुए 10 वर्ष हो गए थे पर शिक्षक बनना शायद! सुधा की किस्मत में नहीं था। सारी भर्तियां ठप पड़ी थी। पर पढ़ाई अभी जारी थी , इस उम्मीद में कि कभी न कभी तो नौकरी लग ही जाएगी…….
सुबह के समाचार पत्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा के विषय में विज्ञापन देख सुधा खुशी से नाचने लगी पापा देखिए लगता है… इस बार मेरी किस्मत रुख बदलेगी 72000 लोगों का इस बार शिक्षक भर्ती में चयन होना था इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं शायद मेरा नंबर लग जाए।
जल्दी से शिक्षक पात्रता परीक्षा का फार्म भर के सुधा जोरों शोरों से तैयारी में जुट गई दिन-रात एक करके सारे विष्णु का फिर से गहन अध्ययन किया वैकल्पिक प्रश्न एक दिन में दो- दो सौ हल करती है ।
उसकी लगन को देखकर पिताजी ने भी विश्वास कर लिया इस बार सुधा का चयन हो जाएगा, 35 की होने चली है, नौकरी की जिद में शादी भी नहीं की…
घर पर परीक्षा का कॉल लेटर आ गया आगामी रविवार को परीक्षा होने की सारे एतिहाद इंस्ट्रक्शन प्रवेश पत्र में दिए थे। पिताजी ने सुधा को फिर भी हिदायत देते हुए कहा देखो कहीं चूक मत करना .. अरे पिताजी आप परेशान मत होइए मैं कोई चूक होने ही नहीं दूंगी।
परीक्षा वाले दिन अभ्यर्थी पत्र सामने आया और प्रश्न पत्र भी प्रश्न पत्र देखकर सुधा की आंखें चमक गई 70 परसेंट तक तो आ ही जाएंगे। मेरी नौकरी तो पक्की है। अभ्यर्थी पत्र को नजरअंदाज करते अपने प्रश्नों को जल्दी-जल्दी हल करने लगी। तभी कक्ष में, निरीक्षक दल का प्रवेश हुआ और उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से भरा हुआ अभ्यर्थी पत्र मांगा सुधा ने जब पलट कर देखा तो उसने अपना अभ्यर्थी पत्र तो भरा ही नहीं था जल्दी-जल्दी उसमें दी हुई सारी जानकारियां भरने लगी नाम, शिक्षा, जन्मतिथि ,भाषा चयन, विषय इत्यादि की जानकारी उसमें भरनी जरूरी थी। निरीक्षक अब सुधा के पास पहुंच चुके थे जल्दी-जल्दी सुधा ने अपना पत्र भर के निरीक्षक को दे दिया। परीक्षा खत्म हुई सभी अभ्यर्थी अपने अपने घर चले आए 2 दिन के बाद परीक्षा की उत्तर कुंजी इंटरनेट पर आ गई। सुधा ने जब अपने उत्तरों का मिलान किया उसमें वह उत्तीर्ण हो गई थी। एक पखवाड़े के बाद उसका परिणाम भी आ गया। उसमें एक सुधा का नाम नहीं था, सुधा बहुत परेशान हुई सारे उत्तर तो सही है, बार-बार परिणामों को चेक करती तो उसमें अपूर्व परिणाम लिखकर आता दौड़ भाग करके जब कागजी कार्रवाई से पता चला कि उसमें भाषा चयन करने में चूक हुई। इसलिए उसका परिणाम अवैध घोषित कर दिया गया।
सुधा को अपनी इस भूल पर बहुत पछतावा हुआ क्योंकि यह वर्ष उसके लिए आखरी था अब उसके नौकरी पाने की उम्र भी खत्म हो गई। जीवन मे हम अपनी आखरी उम्मीद तक लड़ते हैं पर एक छोटी सी चूक सारे मेहनत पर पानी फेर सकती है। सुधा को सबक मिल गया.. उपरोक्त रचना स्वरचित मौलिक एवं अप्रकाशित है जिसे मैं नूतन कहानियां पत्रिका में प्रकाशन की अनुमति प्रदान करती हूं…
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