विशेष रिपोर्टर, लखनऊ/कानपुर: उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को एक और बड़ी और ऐतिहासिक सौगात मिली है। केंद्र सरकार ने औद्योगिक नगरी कानपुर से बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार महोबा (कबरई) तक बनने वाले नए 'कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे' (Kanpur-Kabarai Greenfield Highway) के निर्माण प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के स्वीकृत होने से न केवल कानपुर से बुंदेलखंड की दूरी घट जाएगी, बल्कि कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-34) पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से भी जनता को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जन-उपयोगी और रणनीतिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का पूरे प्रदेश की जनता की ओर से आभार जताया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड के सर्वांगीण विकास, व्यापार, उद्योग और पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने से मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत की ओर जाने वाले भारी व्यावसायिक वाहनों को एक निर्बाध और सुरक्षित मार्ग मिल सकेगा, जिससे उत्तर प्रदेश का लॉजिस्टिक्स तंत्र भी काफी मजबूत होगा।
कानपुर से बुंदेलखंड का सफर होगा आसान: क्या है कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट?
कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे पूरी तरह से एक नया एक्सेस-कंट्रोल्ड (Access-Controlled) फोरलेन एक्सप्रेसवे कॉरिडोर होगा। यह वर्तमान राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (पुराना NH-86) के समानांतर बनाया जाएगा, लेकिन आबादी वाले इलाकों और संकरे कस्बों को छोड़ते हुए बिल्कुल नए मार्ग से होकर गुजरेगा।
वर्तमान में कानपुर से नौबस्ता, रमईपुर, घाटमपुर, हमीरपुर और मौदहा होते हुए कबरई या महोबा जाने में भारी जाम और संकरी सड़कों के कारण 4 से 5 घंटे तक का समय लग जाता है। विशेष रूप से घाटमपुर और हमीरपुर में यमुना व बेतवा नदियों के पुलों पर ट्रकों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। नया ग्रीनफील्ड हाईवे बनने के बाद कानपुर से कबरई तक की दूरी महज़ 1.5 से 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी।
यह नया मार्ग कानपुर आउटर रिंग रोड से शुरू होकर घाटमपुर और हमीरपुर के बाहरी इलाकों से गुजरते हुए सीधे महोबा के कबरई में समाप्त होगा। कबरई में यह मार्ग बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और मध्य प्रदेश की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे से सीधे जुड़ जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर में ओवरब्रिज, अंडरपास, फ्लाईओवर और बड़ी नदियों पर नए फोरलेन पुलों का निर्माण किया जाएगा ताकि गाड़ियों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से कम न हो।
सीएम योगी ने जताया पीएम मोदी का आभार: कैसे बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश तेजी से 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। बुंदेलखंड क्षेत्र, जो कभी उपेक्षा और पिछड़ेपन का शिकार था, आज नए-नए एक्सप्रेसवे, डिफेन्स कॉरिडोर और जल जीवन मिशन के माध्यम से विकास का नया मॉडल बन चुका है।
इस ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण से बुंदेलखंड के महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट और झांसी जिलों का कानपुर और लखनऊ जैसे बड़े आर्थिक केंद्रों से सीधा और तेज संपर्क स्थापित हो जाएगा।
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औद्योगिक गलियारा और डिफेन्स नोड: कानपुर और झांसी में उत्तर प्रदेश डिफेन्स इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Defence Industrial Corridor) के बड़े नोड्स बन रहे हैं। कानपुर-कबरई हाईवे डिफेन्स कॉरिडोर के माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स संचालन को बेहद सुगम बना देगा।
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कबरई के पत्थर व खनन उद्योग को बढ़ावा: महोबा का कबरई क्षेत्र देश के सबसे बड़े ग्रैनाइट, गिट्टी और बोल्डर खनन हब के रूप में जाना जाता है। यहां से रोजाना हजारों ट्रक निर्माण सामग्री लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर जाते हैं। नए हाईवे से भारी वाहनों की आवाजाही सुरक्षित होगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
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कृषि और डेयरी उत्पादों का त्वरित परिवहन: बुंदेलखंड के किसान अपनी उपज, सब्जियां, दूध और फल बहुत कम समय में कानपुर और लखनऊ की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनकी आय में इजाफा होगा।
फोरलेन हाईवे के मुख्य आकर्षण, लागत और ट्रैफिक लोड से मुक्ति
कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हाइब्रिड एनुइटी मॉडल (HAM) या ईपीसी मोड पर तैयार किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत कई हजार करोड़ रुपये होगी, जिसमें भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition), पर्यावरण संबंधी मंजूरियां और निर्माण कार्य शामिल हैं।
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बायपास और रेलवे ओवरब्रिज (ROB): इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें किसी भी घनी आबादी वाले शहर के अंदर से सड़क नहीं गुजरेगी। घाटमपुर, हमीरपुर, भरुआ सुमेरपुर और मौदहा जैसे प्रमुख नगरों के लिए लंबे बायपास बनाए जाएंगे।
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यमुना और बेतवा पर नए बड़े पुल: हमीरपुर के पास यमुना और बेतवा नदियों पर मौजूदा संकरे पुल अक्सर ट्रैफिक जाम का कारण बनते हैं। परियोजना के तहत इन नदियों पर अत्याधुनिक तकनीक से चौड़े फोरलेन पुलों का निर्माण होगा।
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पर्यावरण और सुरक्षा के मानक: ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के दोनों ओर भारी संख्या में पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी कॉलिंग बूथ और स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगाए जाएंगे ताकि हाईवे पर यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
उत्तर प्रदेश का बढ़ता हाईवे नेटवर्क: लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के समग्र सड़क नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह हाईवे उत्तर में कानपुर रिंग रोड के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। वहीं दक्षिण में यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के माध्यम से सीधे चित्रकूट और मध्य प्रदेश के छतरपुर, खजुराहो व सागर तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
इससे पर्यटन क्षेत्र को भी जबरदस्त फायदा मिलेगा। दिल्ली, कानपुर या लखनऊ से चित्रकूट, खजुराहो और पन्ना नेशनल पार्क जाने वाले पर्यटकों को अब सिंगल लेन या जाम वाली सड़कों से नहीं जूझना पड़ेगा। पर्यटक बेहद कम समय में इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक पहुंच सकेंगे।
केंद्र सरकार की इस मंजूरी के बाद अब एनएचएआई जल्द ही भूमि अधिग्रहण के लिए गजट अधिसूचना जारी करेगा और टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक अनुमतियों के काम को जिला स्तर पर रिकॉर्ड समय में पूरा किया जाएगा ताकि निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो सके। इस हाईवे के बनने से अगले कुछ वर्षों में बुंदेलखंड और कानपुर के बीच का पूरा आर्थिक परिदृश्य बदलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।