August 3, 2026

नवभारत संपादकीय: माफी या संदेश? पीएम के बयान पर विपक्ष ने उठाए सवाल| Navbharat Live

नवभारत संपादकीय: माफी या संदेश? पीएम के बयान पर विपक्ष ने उठाए सवाल

  • Written By:

    अंकिता पटेल

Updated On: Aug 03, 2026 | 09:39 AM IST

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सार

PM Modi Remarks: पीएम मोदी के युवाओं को माफ करने वाले बयान पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि माफी की बात के बावजूद युवाओं पर पुलिस कार्रवाई और सोशल मीडिया जांच जारी है।

Navbharat Editorial: Apology or Message? Opposition Raises Questions Over PM's Statement

प्रधानमंत्री मोदी वीडियो संदेश (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

PM Modi Youth Controversy: पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो संदेश सार्वजनिक चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने गुस्से में आकर अपशब्द बोलने वाले युवाओं को माफ करने की घोषणा की। इस पर विपक्ष ने कहा कि देशवासी केंद्र सरकार से उत्तरदायित्व निभाने में विफलता के लिए माफी मांगने को कह रहे थे लेकिन सर्वोच्च नेतृत्व ने अपना तथाकथित ‘बड़प्पन’ दिखाते हुए उलटे देश को ही माफ कर दिया। पीएम ने कहा कि कभी-कभी जीभ दांत के नीचे आ जाती है, जिससे खून निकलता है लेकिन इसकी वजह से हम दांत तोड़ नहीं देते।

क्योंकि यह बच्चे भी अपने ही हैं। इस कथन से लगा कि एक क्षमाशील पालक की भांति प्रधानमंत्री ने उदारता दिखाई है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं को सजा देने, अदालत का चक्कर काटने के लिए मजबूर करने से परिस्थिति बदल नहीं सकती।

‘माफी’ के दावे पर सवाल, युवाओं पर कार्रवाई क्यों जारी?

वास्तविकता यह है कि क्षमा करने के नाम पर युवाओं को दबाया जा रहा है। यदि प्रधानमंत्री ने सचमुच उन्हें माफ कर दिया, तो पुलिस थानों में जीरो एफआईआर क्यों दर्ज की जा रही है? साइबर सेल से नोटिस भेजकर युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच क्यों की जा रही है? जिन युवाओं को भटका हुआ बताकर मार्ग दिखाने की भाषा बोली जा रही है, उन्हें बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी जैसे सत्ता समर्थक संगठनों की लाठी के हवाले क्यों किया जा रहा है? यह संगठन शहर व गांवों के आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं को निशाना बना रहे हैं।

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जब किसी युवा की चौराहे पर पिटाई की जाती है और पुलिस मूक दर्शक बनकर देखती है तो किसी परिवार की उम्मीदों का दीया बुझने की नौबत आ जाती है। क्या यही क्षमा है? क्या ताली एक हाथ से बजती है? सत्ता पक्ष के नेता ने भी तो मर्यादा व शालीनता का ध्यान न रखते हुए भिन्न अवसरों पर महिला के बारे में बार डांसर, जर्सी गाय, कांग्रेस की विधवा जैसी टिप्पणी की थी।

युवाओं पर कार्रवाई और ‘माफी’ पर विपक्ष ने उठाए सवाल

जब शशि थरूर ने सुनंदा पुष्कर को 20 करोड़ रुपये की आईपीएल टीम खरीद कर भेंट की थी तो पीएम ने कहा था 20 करोड़ की गर्लफ्रेंड, वाह क्या बात है! अब वह भाषा की मर्यादा और महिला सम्मान की याद दिला रहे हैं। जो खुद कीचड़ में पैर डालता है, उस पर छींटें उड़ते ही हैं।

जब प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठियां पड़ीं, पैलेट गन चली, आंसू गैस के गोले फेंके गए, लड़कियों के कपड़े फाड़े गए और दुर्व्यवहार किया गया तो उसके लिए क्यों नहीं माफी मांगी जाती ? मानवाधिकार के गंभीर उल्लंघन को संतप्त युवाओं द्वारा दी गई गाली के नीचे दबाया जा रहा है।

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अत्याचार के लिए पुलिस व प्रशासन कठघरे में है। इस सवाल का जवाब नहीं दिया जा रहा कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया था? यदि बड़ों के सम्मान की बात है तो जब सत्तापक्ष के मंत्री प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू के खिलाफ मर्यादाहीन व असत्य बातें कहते हैं तो उनकी शालीनता कहां चली जाती है?

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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