चीन की हरकतों से परेशान थाईलैंड को भाया भारत का ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी में जुटा बैंकॉक
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Written By:
अमन मौर्या
Updated On: Aug 02, 2026 | 05:59 PM IST
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सार
Indian BrahMos Missile: फिलीपींस के बाद अब थाईलैंड भी भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। समुद्री ताकत बढ़ाने और सीमा सुरक्षा के लिए थाईलैंड ने दिलचस्पी दिखाई है।

ब्रह्मोस मिसाइल (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
Thailand BrahMos Missile Deal: भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस दुनिया भर में अपनी धाक जमाती जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दक्षिण एशियाई और मिडिल ईस्ट के देश इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दक्षिण एशियाई देश फिलीपींस के बाद अब थाईलैंड भी इस खतरनाक मिसाइल को खरीदने की तैयारी में है। समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करने और अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए थाईलैंड अब ब्रह्मोस खरीदने में रुचि दिखा रहा है।
इस मिसाइल के थाइलैंड की नौसेना शामिल हो जाने के बाद समुद्र में उसकी ताकत में इजाफा होगा। मिसाइल में जबरदस्त रफ्तार के साथ सटीक निशाना लगाने की क्षमता है। इससे समुद्र में थाईलैंड की नौसेना और ताकतवर हो जाएगी और वह अपने व्यापारिक रास्तों के साथ-साथ समुद्री इलाकों को भी बेहतर तरीके से सुरक्षित कर पाएगा।
बेहद खास है थाईलैंड का यह कदम
थाईलैंड हमेशा से किसी एक देश पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहने की नीति पर रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिका-चीन में चल रहे तनाव को देखते हुए थाईलैंड, भारत की सहायता से अपनी रक्षात्मक स्थिति को और मजबूत करना चाहता है। चीन के साथ थाईलैंड के व्यापारिक और आर्थिक संबंध अच्छे रहे हैं।
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पहले वो चीन से हथियार भी खरीद चुका है, लेकिन दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दादागीरी और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए वो अत्याधुनिक तकनीक के लिए भारत जैसे अन्य विकल्पों को रक्षा साझेदार बना रहा है। चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में दावा करने के बाद दक्षिण एशियाई देश भारत जैसे मजबूत और विश्वस्त साझेदार बना रहे हैं।
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इंडोनेशिया दौरे में भी हुआ था समझौता
पीएम मोदी के पिछले महीने इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग समझौता हुआ था। इसके अलावा समुद्री क्षेत्र में तटीय निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव जैसे कई अहम क्षेत्रों में भी पूरी सहमति बनी। दोनों देशों ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत के लिए एक साथ मिलकर काम करने का बड़ा फैसला किया था।
