धोनी की फैन महिला फौजी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीत रचा इतिहास, कौन हैं जैस्मिन जिन्होंने बरसाए भारी पंच?
Updated: Saturday, August 1, 2026, 18:37 [IST]
Who is Jasmine Lamboria: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाज जैस्मिन लांबोरिया ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक और उपलब्धि शामिल कर ली है। महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उन्होंने उत्तरी आयरलैंड की मौजूदा चैंपियन माइकेला वॉल्श को 5-0 के एकतरफा फैसले से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
चार साल पहले बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली जैस्मिनने इस बार अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए सीधे स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उनसे गोल्ड मेडल की उम्मीद की जा रही थी और वही देखने को मिला।
कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज से गोल्ड तक का सफर
जैस्मिन लांबोरिया का कॉमनवेल्थ गेम्स का सफर लगातार आगे बढ़ता गया है। 2022 में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, लेकिन इस बार ग्लासगो में उन्होंने किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ी। पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में दिखीं जैस्मिनने फाइनल में अनुभवी माइकेला वॉल्श को कोई मौका नहीं दिया और सर्वसम्मत 5-0 फैसले से मुकाबला जीत लिया। उनके इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने मुक्केबाजी में दूसरा गोल्ड हासिल किया।
पेरिस ओलंपिक की निराशा के बाद दमदार वापसी
पेरिस ओलंपिक जैस्मिनके लिए यादगार नहीं रहा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने खुद पर लगातार मेहनत की और शानदार वापसी की। पहले अस्ताना और फिर दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद लिवरपूल में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 57 किलोग्राम वर्ग का खिताब जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों में शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड उसी शानदार सफर की अगली कड़ी बन गया।
भारतीय सेना का भी हैं हिस्सा
जैस्मिन लांबोरिया सिर्फ रिंग में ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना में भी एक खास पहचान रखती हैं। वह भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस में शामिल होने वाली पहली महिला मुक्केबाज हैं। पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण लेने वाली जैस्मिन का कहना है कि सेना के अनुशासन और कोचिंग ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से काफी मजबूत बनाया है। यही तैयारी बड़े मुकाबलों में उनके आत्मविश्वास की सबसे बड़ी ताकत बनी।
एमएस धोनी से मिलती है प्रेरणा
रिंग के बाहर जैस्मिन लांबोरिया पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बड़ी प्रशंसक हैं। उनका मानना है कि दबाव के बीच धोनी का शांत स्वभाव उन्हें सबसे अलग बनाता है। जैस्मिन कई बार कह चुकी हैं कि वह भी मुश्किल परिस्थितियों में उसी तरह संयम बनाए रखना चाहती हैं, जैसा धोनी अपने पूरे करियर में करते रहे। उनका मानना है कि बड़े खिलाड़ी की पहचान सिर्फ खेल से नहीं, बल्कि कठिन समय में लिए गए फैसलों से होती है।
भारतीय बॉक्सिंग की नई पहचान
24 वर्षीय जैस्मिन लांबोरिया आज भारतीय महिला मुक्केबाजी की सबसे मजबूत दावेदारों में गिनी जाती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के ब्रॉन्ज से लेकर 2026 के गोल्ड तक का उनका सफर इस बात का सबूत है कि लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी खिलाड़ी की कहानी बदली जा सकती है। अब उनसे आने वाले विश्वस्तरीय टूर्नामेंटों में भी भारत को बड़ी उम्मीदें रहेंगी।