July 31, 2026

नांदगांव में राख के सैलाब से फसलें तबाह: हाई कोर्ट ने खबर को माना जनहित याचिका, जिलाधिकारी से मांगा हलफनामा| Navbharat Live

नांदगांव में राख के सैलाब से फसलें तबाह: हाई कोर्ट ने खबर को माना जनहित याचिका, जिलाधिकारी से मांगा हलफनामा

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    अंकिता पटेल

Updated On: Jul 31, 2026 | 03:10 PM IST

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सार

Fly Ash Breach: नागपुर के नांदगांव में फ्लाई ऐश बांध टूटने से किसानों की फसलें प्रभावित होने के मामले में हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया।

Crops destroyed by a deluge of ash in Nandgaon: High Court treats news report as a Public Interest Litigation (PIL) and seeks an affidavit from the District Magistrate.

खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट,(सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

Khaparkheda Ash Dam Collapse: नागपुर जिले में एक दिन पहले हुई भारी बारिश के चलते खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) की नांदगांव स्थित ऐश बांध में अवैज्ञानिक डंपिंग के कारण बांध टूट गया जिससे नांदगांव गांव के कृषि खेतों को भारी नुकसान पहुंचा। खेतों में राख बहने से किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं।

इस संदर्भ में छपी खबर पर स्वयं संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। साथ ही खबर को याचिका के रूप में प्रेषित करने तथा अदालत की मदद के लिए न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने अधि।

अर्णव पनसारे को अदालत मित्र के रूप में नियुक्त किया। हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे कार्रवाइयों का विवरण देते हुए अपना हलफनामा अदालत में प्रस्तुत करें।

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पेंच नदी पर प्रदूषण का बड़ा संकट

नांदगांव का यह ऐश बांध पेंच नदी के बेहद करीब स्थित है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश होने पर यह राख बहकर पेंच नदी में समा सकती है जिससे नदी का जल बुरी तरह प्रदूषित हो जाएगा।

प्रभावित किसानों के साथ खड़ी संस्था सीएफएसडी ने मांग की है कि पेंच नदी को भीषण प्रदूषण से बचाने और किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन को महाजेनको के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

MPCB नियमों की खुली अनदेखी

खबर के अनुसार महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने महाजेनको को उत्पन्न होने वाली 100 प्रतिशत राख का उपयोग करने और खापरखेड़ा क्षेत्र में डंपिंग बंद करने के निर्देश दिए थे, एमपीसीबी के नियमों के अनुसार किसी भी ऐश बांध का उपयोग करने से पहले उसमें उचित लाइनिंग और लैगून बनाना अनिवार्य है।

कुछ लोगों के अनुसार महाजेनको 100% राख का उपयोग करने में विफल रहा और वारेगांव बांध फुल होने के कारण उसने बिना किसी लाइनिंग या लैगून के नांदगांव में खुले तौर पर राख फेंकना शुरू कर दिया।

1988 में अधिग्रहित भूमि का फिर गलत इस्तेमाल

समाचार पत्रों में छपी खबरों के अनुसार महाराष्ट्र स्टेट बिजली निर्माण कंपनी (महाजेनको) ने 1988 मैं नांदगांव में स्थानीय निवासियों से 723 एकड़ जमीन फ्लाई ऐश डंपिंग के लिए अधिग्रहित की थी। हालांकि लंबे समय तक इसका उपयोग नहीं किया गया और किसानों ने इस भूमि पर खेती शुरू कर दी थी।

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वर्ष 2021 में जब वारेगांव ऐश बांध ओवरलोड हो गया तो महाजेनको ने पहली बार नांदगांव का इस्तेमाल किया। उस समय भी फसलों का नुकसान हुआ था। तब किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के बाद तत्कालीन राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने डंपिंग पर रोक लगा दी थी लेकिन अब 5 साल बाद महाजेनको ने बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन किए फिर से यहां राख डालना शुरू कर दिया है जिससे यह हादसा हुआ।

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