
UPSC सीएसई रिजल्ट में बिहार का दबदबा
देश में लाखों युवाओं का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं में शामिल होना होता है. इसके लिए तकरीबन हर साल 8 से 10 लाख अभ्यर्थी UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के लिए आवेदन करते हैं. लेकिन अंतिम चयन 900 से 100 उम्मीदवारों के बीच होता है.इसे दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है.
कई हजार युवा हर साल दिल्ली के मुखर्जी नगर, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, लखनऊ समेत देश के तमाम शहरों में अपने इस सपने को पूरा करने के लिए जीतोड़ मेहनत करते हैं. लेकिन इनमें से कुछ ही का सपना पूरा हो पाता है. साल 2025 की CSE परीक्षा का रिजल्ट भी इस साल मार्च महीने में जारी किया गया था. इस दौरान 958 अभ्यर्थियों को इसमें सफल घोषित किया गया था.
CSE 2025 में कितने उम्मीदवार हुए सफल?
- CSE 2025 के लिए 9,37,876 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था.
- इसमें 5,76,793 उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए.
- मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए कुल 14,161 उम्मीदवार योग्य पाए गए थे.
- परीक्षा के इंटरव्यू के लिए कुल 2,736 उम्मीदवार योग्य पाए गए थे.
- आयोग ने विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति के लिए कुल 958 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया था
- इनमें 659 पुरुष और 299 महिलाएं थीं

साल 2021 से 2024 में कितने हिंदी मीडियम या क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा देने वाले छात्र हुए सफल?
UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में भाषा का मुद्दा पिछले कई दशकों से विवाद का विषय रहा है. खासकर हिंदी और अन्य क्षेत्री भाषाओं के अभ्यर्थी समय-समय पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि परीक्षा की मौजूदा व्यवस्था अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ देती है. हाल के वर्षों में यह विवाद फिर तेज हुआ है, क्योंकि कई उम्मीदवारों और शिक्षावदों ने भाषा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए हैं.
- 2021 में 538 लोगों ने हिंदी में मुख्य परीक्षा दी. इसमें से 26 चयनित हुए
- 2022 में 587 लोगों ने हिंदी में मुख्य परीक्षा दी. इसमें से 71 चयनित हुए
- 2023 में 599 लोगों ने हिंदी में मुख्य परीक्षा दी. इसमें से 57 चयनित हुए
- 2024 में 1133 लोगों ने हिंदी में मुख्य परीक्षा दी. इसमें से 50 चयनित हुए
इस डेटा का आधार पर यह कह सकते हैं CSE की परीक्षा में में इंग्लिश मीडियम के जरिए परीक्षा देने वालों की सफलता हिंदी मीडियम और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के जरिए देने वाले अभ्यर्थियों से कई गुना ज्यादा है.
5 सालों में CSE परीक्षा में कितने अभ्यर्थी हुए सफल?
अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर सबसे ज्यादा IAS-IPS किस राज्य से बनते हैं? क्या UPSC इसका कोई राज्यवार डेटा जारी करता है? इसमें कुछ राज्यों का दबदबा क्यों दिखाई देता है? तो आपको बता दें UPSC अपने अंतिम परिणाम में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, रैंक और श्रेणी जारी करता है, लेकिन उनका गृह राज्य नहीं बताता है. यही वजह है अक्सर एक ही नाम के दो-तीन लोग UPSC क्लियर करने का दावा कर देते हैं. इस साल भी कई ऐसे केसों ने कंफ्यूजन की स्थिति पैदा की थी.
- 2025: 958
- 2024: 1009
- 2023: 1016
- 2022: 933
- 2021: 685
किस राज्य से सबसे ज्यादा छात्र CSE परीक्षा में सफल होते हैं?
सरकार के पास ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है जिससे ये पता चले किस राज्य से कितने उम्मीदवार चयनित हुए. ये डेटा ये उम्मीदवारों के पते और सार्वजनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अनुमान लगाकर तैयार किए जाते हैं.
- उत्तर प्रदेश: 120 से 130
- बिहार: 70 से 80
- राजस्थान: 70 से 80
- महाराष्ट्र: 60 से 70
- दिल्ली: 30 से 40
- मध्य प्रदेश: 40 से 50
- तमिलनाडु: 35 से 50
- हरियाणा: 30 से 40
- तेलंगाना: 25 से 30
- पंजाब: 20 से 45
उत्तर प्रदेश सबसे आगे क्यों रहता है?
उत्तर प्रदेश लंबे समय से UPSC में सबसे अधिक सफल उम्मीदवार देने वाले राज्यों में शामिल रहा है. इसके पीछे कई वजहें हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की मजबूत तैयारी का माहौल, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी जैसे बड़े शिक्षा केंद्र, प्रशासनिक सेवाओं में जाने की पारिवारिक और सामाजिक परंपरा जैसी वजह इसके कुछ कारण हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश की आबादी ज्यादा है. ऐसे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा देते हैं. इसका साफ अर्थ है जितने अधिक उम्मीदवार परीक्षा देंगे, चयनित होने वालों की संख्या भी उतनी अधिक रहने की संभावना होती है.
बिहार लगातार टॉप राज्यों में क्यों रहता है?
बिहार की सफलता के पीछे केवल जनसंख्या नहीं बल्कि पढ़ाई की संस्कृति भी अहम मानी जाती है. यहां सरकारी नौकरी को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है. बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली के मुखर्जी नगर और प्रयागराज जैसे कोचिंग हब में जाकर तैयारी करते हैं. सरकार की तरफ से संसद में दिए गए एक सवाल के जवाब में बिहार में 2021 से 2024 में साल में 271 अभ्यर्थी CSE परीक्षा में सफल पाए गए.
- 2021: 54
- 2022: 63
- 2023: 82
- 2024: 72
राजस्थान का प्रदर्शन क्यों बेहतर हुआ?
राजस्थान में पिछले एक दशक में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का माहौल तेजी से विकसित हुआ है.जयपुर, कोटा और जोधपुर जैसे शहरों में UPSC की कोचिंग का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ है. यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान से अच्छी-खासी संख्या में अभ्यर्थी UPSC में सफल हुए हैं. इस बार के यूपीएससी के टॉपर अनुज अग्निहोत्री का भी राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से ताल्लुक है.
अन्य राज्यों में भी ठीक-ठाक रिजल्ट
उत्तर प्रदेश, बिहार , राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, कर्नाटक ओडिशा समेत हर छोटे-बड़े राज्यों से हर साल उनकी आबादी के लिहाज से ठीक-ठाक संख्या CSE की परीक्षा में सफल होती है.
क्या CSE की परीक्षा में उत्तर भारत के राज्यों को सबसे ज्यादा सफलता?
पिछले कुछ सालों में जो टॉपर्स लिस्ट आई है. उसमें भी उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश के अभ्यर्थियों के नाम रहे हैं. ऐसे में माना जा सकता है कि CSE में सफल होने वालों की संख्या उत्तर भारत से अधिक है. हालांकि, ये एक अनुमान है. इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक डेटा कभी सामने नहीं आया है. वैसे भी UPSC में सफलता किसी राज्य की नहीं, बल्कि रणनीति, अनुशासन और निरंतर मेहनत की जीत होती है.किसी भी राज्य का अभ्यर्थी सही तैयारी और मेहनत के साथ इस परीक्षा में सफलता हासिल कर सकता है.

सचिन धर दुबे
सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.
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