खाड़ी देशों में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर अब भारत में कैंसर मरीजों के इलाज पर भी दिखाई देने लगा है। जीवनरक्षक कीमोथेरेपी दवाओं की कीमतें दोगुनी से भी अधिक बढ़ गई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ ग
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कीमोथेरेपी में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली प्लैटिनम आधारित दवाएं सिसप्लैटिन (Cisplatin), कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) और ऑक्सालीप्लैटिन (Oxaliplatin) हैं। इन दवाओं के निर्माण के लिए आवश्यक प्लैटिनम मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और दक्षिण अफ्रीका से आयात किया जाता है।
पिछले कुछ महीनों से कैंसर दवाओं के कच्चे माल का आयात प्रभावित हुआ है। इसी वजह से जीवनरक्षक कीमोथेरेपी दवाएं महंगी हो गई हैं।

युद्ध और सप्लाई चेन संकट से बढ़ी लागत
विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा के कारण कच्चे माल का आयात प्रभावित हुई है। इस वजह से जीवनरक्षक कीमोथेरेपी दवाएं महंगी हो गई हैं।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से समुद्री और हवाई माल ढुलाई (शिपिंग) की लागत भी काफी बढ़ गई है। इसका सीधा असर दवाओं के उत्पादन खर्च पर पड़ा है।
आमतौर पर सरकार जीवनरक्षक दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) को नियंत्रित रखती है, लेकिन निर्माण लागत में ज्यादा वृद्धि के चलते इस बार कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है।
दवाओं की आपूर्ति बाधित, लेकिन व्यवस्था कर रखी है- डॉ. मनीषा सिंह
महावीर कैंसर संस्थान के चिकित्सा निदेशक डॉ. मनीषा सिंह ने बताया, ‘संस्थान में प्रतिदिन लगभग 250 से 300 मरीज कीमोथेरेपी के लिए आते हैं। खाड़ी देशों में युद्ध के कारण कैंसर मरीज को दिए जाने वाली प्लैटिनम आधारित 3 कीमोथेरेपी दवाओं की आपूर्ति को लेकर थोड़ी समस्या आई है। लेकिन संस्थान ने पहले से पर्याप्त व्यवस्था कर रखी है, जिससे मरीजों को दवाओं की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।’

परिवहन और कच्चे माल की लागत बढ़ने से महंगी हुई दवाएं- डॉ. कुणाल रंजन
महावीर कैंसर संस्थान के हेड एंड नेक विभाग के प्रभारी डॉ. कुणाल रंजन ने बताया, ‘ईरान-अमेरिका और मध्य-पूर्व संघर्ष के बाद भारत में कीमोथेरेपी दवाओं की कीमतों में वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और कच्चे माल की महंगाई है। युद्ध के कारण हवाई और समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ, कंटेनरों, जहाजों की कमी हुई और माल ढुलाई की लागत दोगुनी हो हुई।’
उन्होंने आगे बताया, ‘सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) जैसी जीवन-रक्षक कीमोथेरेपी दवाओं के निर्माण में प्लैटिनम-आधारित कच्चे माल का उपयोग होता है।’

फार्मा कंपनियों का उत्पादन खर्च काफी बढ़ा
डॉ. कुणाल रंजन के मुताबिक, परिवहन और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण फार्मा कंपनियों का उत्पादन खर्च काफी बढ़ गया है। अस्पतालों में दवाओं की कमी की रिपोर्टों के बीच, फार्मा कंपनियों की मांग पर भारत सरकार को इन आवश्यक कैंसर दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी देनी पड़ी, ताकि मरीजों के लिए इनकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

आगे और महंगा हो सकता है कैंसर का इलाज
डॉ. कुणाल रंजन ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर सब्सिडी या राहत पैकेज देने पर विचार करना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और आवश्यक दवाएं उनकी पहुंच में बनी रहें।