बस्तर में वन अपराधों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। POR एप से अपराध दर्ज करने से लेकर जांच और चालान तक की प्रक्रिया ऑनलाइन मॉनिटर होगी।
छत्तीसगढ़ शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
- Published: 02 Sep 2026, 04:34 PM IST
- Last Updated: 02 Sep 2026, 04:34 PM IST
अशोक नायडू- जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों में होने वाले अवैध कटाई, शिकार, वन्यजीव अपराध और अन्य वन अपराधों पर अब कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया डिजिटल निगरानी के दायरे में होगी। वन अपराध दर्ज होने से लेकर उसकी जांच, विवेचना और न्यायालय में चालान पेश करने तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए वन विभाग ने ऑनलाइन POR एप्लीकेशन की शुरुआत की है। इसी कड़ी में जगदलपुर स्थित वन विद्यालय में वृत्तस्तरीय कार्यशाला आयोजित कर बस्तर संभाग के वन अमले को एप के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई।
वन अपराध दर्ज होने से लेकर जांच तक होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग
कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिक वन अपराध (POR) दर्ज करने से लेकर उसकी जांच और आगे की कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने की जानकारी दी गई। अब वन रक्षक द्वारा दर्ज किए गए प्राथमिक वन अपराध की जानकारी संबंधित अधिकारियों के स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।इसके माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी किसी भी मामले की प्रगति की ऑनलाइन निगरानी कर सकेंगे। जांच अधिकारी और विवेचक द्वारा की जा रही कार्रवाई की स्थिति भी सिस्टम के जरिए देखी जा सकेगी। इससे वन अपराध के मामलों में कार्रवाई की गति बढ़ाने के साथ-साथ रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में भी मदद मिलेगी।
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चार वनमंडल और दो संरक्षित क्षेत्रों के अधिकारी-कर्मचारी हुए शामिल
जगदलपुर के वन विद्यालय में आयोजित कार्यशाला में बस्तर संभाग के विभिन्न वनमंडलों और संरक्षित क्षेत्रों के अधिकारी-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इसमें बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा वनमंडल के साथ कांगेर घाटी नेशनल पार्क और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान POR एप में अपराध दर्ज करने, मामले से संबंधित जानकारी अपडेट करने, जांच की प्रगति दर्ज करने और वरिष्ठ स्तर पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग की प्रक्रिया समझाई गई।
शिकार और वन्यजीव अपराधों में भी होगी निगरानी
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बस्तर के जंगलों में शिकार और वन्यजीव अपराधों के मामलों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में अपराध दर्ज करने के बाद जांच और विवेचना की जाती है तथा साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में चालान पेश किया जाता है। सीसीएफ स्टाइलों मंडावी ने बताया कि, जंगलों में शिकार और वन्यजीव अपराधों के मामलों में विभाग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जांच करता है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार न्यायालय में चालान पेश करने की कार्रवाई की जाती है। POR एप के माध्यम से अब इन मामलों की कार्रवाई और प्रगति की ऑनलाइन निगरानी को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
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कार्रवाई में आएगी पारदर्शिता
वन अपराधों की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से मामलों का रिकॉर्ड एक ही सिस्टम में उपलब्ध रहेगा। इससे अधिकारियों को लंबित मामलों की जानकारी रखने और समय-समय पर उनकी समीक्षा करने में सुविधा होगी। साथ ही अपराध दर्ज होने के बाद जांच और आगे की कार्रवाई में होने वाली प्रगति को भी आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
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