September 27, 2026

मुस्लिम पर्सनल लॉ की आड़ में नाबालिग पत्नी से संबंध गलत... POCSO से नहीं मिलेगी छूट, दिल्ली HC ने क्या-क्या कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर छूट देने से इनकार कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानूनों के तहत आपराधिक दायित्व से छूट का दावा करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ का सहारा नहीं लिया जा सकता.

हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बालिग पुरुष को पर्सनल लॉ के तहत मान्यता प्राप्त मैरिज सर्टिफिकेट दिखाकर 18 साल से कम उम्र की लड़की से जुड़े मामले में जिम्मेदारी से बचने की इजाजत दी जाती है, तो इससे POCSO एक्ट का मकसद खत्म हो जाएगा. इसीलिए POCSO में किसी भी तरह की छूट नहीं मिलेगी और केस दर्ज किया जाएगा. जस्टिस संजीव नरूला ने 23 सितंबर के एक आदेश में ये बातें कहीं.

PTI के मुताबिक, कोर्ट ने ये टिप्पणियां तब कीं जब उसने अपनी नाबालिग पत्नी के यौन उत्पीड़न के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया. शादी के समय लड़की की उम्र 16 साल तीन महीने थी, जबकि आरोपी की उम्र 28 साल थी. इसके बाद वे साथ रहने लगे और लड़की गर्भवती हो गई. गर्भावस्था के दौरान सरकारी अस्पताल जाने पर उसकी उम्र का पता चला.

पति की जमानत अर्जी का समर्थन

अस्पताल प्रशासन द्वारा पुलिस को मामले की जानकारी देने के बाद व्यक्ति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. वहीं, पुलिस को दिए बयान में लड़की ने कहा कि शादी दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी और उस पर कोई दबाव या जबरदस्ती नहीं की गई थी. उसने पति की जमानत अर्जी का समर्थन किया था और गर्भावस्था के दौरान उसकी मौजूदगी की इच्छा जताई थी.

याचिका में जोड़े के तर्क को कोर्ट ने माना गलत

याचिका में जोड़े ने तर्क दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत, एक मुस्लिम लड़की बालिग होने पर शादी के लिए योग्य होती है. और चूंकि शादी वैध है, इसलिए उसके बाद बने यौन संबंधों से कोई आपराधिक दायित्व नहीं बनता है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुई शादी के बाद बने यौन संबंध अपने आप अपराध की श्रेणी से बाहर हो जाते हैं.

मोहम्मद जुनेद अख्तर

मोहम्मद जुनेद अख्तर

मोहम्मद जुनेद अख्तर करीब 12 साल से मीडिया में काम कर रहे हैं. करियर की शुरुआत साल 2013 में 'अमर उजाला' गाजियाबाद से की थी. यहां इन्होंने करीब एक साल तक रेलवे, कलेक्ट्रेट और आरडब्ल्यूए जैसी बीट पर काम किया. फरवरी 2014 में नवोदय टाइम्स अखबार से जुड़ गए और गाजियाबाद में ही रेलवे, स्पोर्ट्स और एजुकेशन की बीट कवर की. करीब एक साल बाद 2015 में गाजियाबाद से दिल्ली ट्रांसफर हो गया. दिल्ली में अल्पसंख्यकों के मुद्दों के साथ जंतर-मंतर पर कई बड़े धरने-प्रदर्शन कवर किए. अगस्त 2016 में दिल्ली से नोएडा ट्रांसफर हो गया. नोएडा में क्राइम बीट पर लगातार करीब तीन साल काम किया. इसके बाद 2020 में लॉकडाउन के दौरान क्राइम के अलावा गौतमबुद्ध नगर के तीनों प्राधिकरण और दूसरी बीट भी कवर करने का मौका मिला. 2024 में ‘उत्तर प्रदेश टाइम्स’ की डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया. इस दौरान 'उत्तर प्रदेश टाइम्स' की नोएडा डिजिटल साइट ट्राइसिटी टुडे में भी काम किया. जनवरी 2025 में न्यूज 24 डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया. यहां जुनेद अख्तर ने बतौर सब एडिटर काम किया और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर काम किया. सितम्बर 2025 से TV9 भारतवर्ष की वेबसाइट में सीनियर सब एडिटर के तौर पर जुड़े.

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