September 17, 2026

भारत बनेगा चिप मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब; PM मोदी ने SEMICON India 2026 में दिखाई विकास की झलक

भारत बनेगा चिप मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब; PM मोदी ने SEMICON India 2026 में दिखाई विकास की झलक

Semicon India Programme के तहत 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली

भारत में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप बनाने का काम तेजी से बढ़ रहा है. इसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया. यह तीन दिन का कार्यक्रम है, जिसमें भारत में चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने के काम पर चर्चा हो रही है. इसमें कंपनियां, सरकार और दूसरे देशों के लोग भी हिस्सा ले रहे हैं.

एक्सपोर्ट भी बढ़ा

सरकार का कहना है कि बीते 11 साल में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने का काम काफी बढ़ा है. साल 2014-15 में देश में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनता था. 2024-25 में यह बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया. यानी अब पहले के मुकाबले करीब छह गुना ज्यादा सामान बन रहा है. इलेक्ट्रॉनिक्स सामान को दूसरे देशों में बेचने यानी एक्सपोर्ट करने में भी बढ़ोतरी हुई है. पहले इसका एक्सपोर्ट 38 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है.

मोबाइल फोन बनाने का काम भी तेजी से बढ़ा है. साल 2014-15 में देश में 18 हजार करोड़ रुपये के मोबाइल फोन बनते थे. अब इनकी कीमत बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गई है. मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट भी 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान मोबाइल फोन का एक्सपोर्ट 127 गुना बढ़ा है. पहले भारत में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर मोबाइल फोन दूसरे देशों से आते थे. उस समय देश की कुल मांग में बाहर से आने वाले फोन की हिस्सेदारी करीब 75 फीसदी थी. अब यह घटकर सिर्फ 0.02 फीसदी रह गई है.

चिप बनाने के काम पर खास ध्यान

सरकार चाहती है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और चिप्स बनें. इससे देश को दूसरे देशों से कम सामान मंगाना पड़ेगा और भारत दुनिया के दूसरे देशों को भी सामान बेच सकेगा. इसी मकसद से जनवरी 2022 में Semicon India Programme शुरू किया गया था. इसके तहत चिप बनाने के हर काम को भारत में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है. इसमें चिप का डिजाइन तैयार करना, उसे बनाना, जांचना और पैक करना जैसे काम शामिल हैं.अब तक करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाले 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इनमें Micron और Kaynes के दो प्लांट्स में सामान बनना शुरू हो गया है. दो और प्लांट्स के इस साल शुरू होने की उम्मीद है.

चिप डिजाइन के लिए छात्रों को मदद

चिप बनाने के लिए सिर्फ बड़ी फैक्ट्रियां ही नहीं, बल्कि नए डिजाइन बनाने वाले लोगों की भी जरूरत होती है. इसलिए देश की यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले छात्रों को भी मदद दी जा रही है. आठ कंपनियों के चिप डिजाइन करने वाले खास टूल्स 315 यूनिवर्सिटीज को मुफ्त में दिए गए हैं. इनका इस्तेमाल 200 लाख घंटे से ज्यादा हो चुका है. इनकी मदद से 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन तैयार किए हैं. सरकार ने 24 ऐसे प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है, जिनमें अलग-अलग कामों के लिए चिप्स बनाए जा रहे हैं.

इनमें वीडियो कैमरों, ड्रोन पकड़ने वाले सिस्टम, बिजली के मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट से जुड़े उपकरणों के लिए चिप्स शामिल हैं.इनमें से 14 कंपनियों को 650 करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद निवेशकों से मिली है, ताकि वे अपने बनाए सामान को बाजार में ला सकें. अब तक सात चिप्स सफलतापूर्वक बनाए जा चुके हैं. इनमें 12 नैनोमीटर जैसी नई तकनीक से बनी चिप भी शामिल है.

छह राज्यों में बन रही हैं चिप बनाने वाली यूनिट्स

भारत में चिप बनाने के लिए कई जगह नए प्लांट तैयार हो रहे हैं. फिलहाल 10 सेमीकंडक्टर यूनिट्स बनाने का काम चल रहा है. इलेक्ट्रॉनिक्स के छोटे-बड़े हिस्से बनाने की योजना के तहत सरकार को 249 आवेदन भी मिले हैं. इनमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कैपेसिटर और दूसरे जरूरी सामान बनाने के प्रस्ताव शामिल हैं. ये प्रोजेक्ट्स गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में बन रहे हैं. गुजरात में Micron Technology करीब 22,516 करोड़ रुपये खर्च करके DRAM और NAND जैसे सामान की जांच और पैकिंग करने वाली यूनिट बना रही है. यहां हर हफ्ते करीब 1.4 करोड़ यूनिट तैयार करने की क्षमता होगी.

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात में ताइवान की PSMC कंपनी के साथ मिलकर 91,526 करोड़ रुपये का चिप बनाने वाला प्लांट लगा रही है. इसका टारगेट हर महीने 50,000 वेफर तैयार करना है. वेफर वह पतली परत होती है, जिस पर कई चिप्स बनाए जाते हैं. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स असम में भी 27,120 करोड़ रुपये की पैकिंग यूनिट बना रही है. इसकी क्षमता रोजाना 4.8 करोड़ यूनिट की होगी. गुजरात में CG Power 7,584 करोड़ रुपये और केन्स टेक्नोलॉजी 3,307 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं.

480 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर यूनिट

उत्तर प्रदेश में वामा सुंदरी इन्वेस्टमेंट्स और फॉक्सकॉन इंडिया मिलकर 3,706 करोड़ रुपये की यूनिट बना रही हैं. यहां डिस्प्ले में इस्तेमाल होने वाली चिप्स तैयार की जाएंगी. ओडिशा में 3D Glass Solutions करीब 1,943 करोड़ रुपये और SiCSem करीब 2,066 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. पंजाब में कॉन्टिनेंटल डिवाइस इंडिया 117 करोड़ रुपये खर्च करके अपनी यूनिट बढ़ा रही है. वहीं, आंध्र प्रदेश में Advanced System in Package Technologies करीब 480 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर यूनिट बना रही है.

रोजगार और दूसरे देशों से मदद

सरकार के अनुमान के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने के काम से करीब 25 लाख लोगों को सीधे या दूसरे तरीकों से रोजगार मिल रहा है. इनमें से करीब 12 लाख नौकरियां मोबाइल फोन बनाने से जुड़ी हैं. इसमें फैक्ट्री में काम करने के अलावा सामान पहुंचाने और सप्लाई से जुड़े काम भी शामिल हैं. चिप बनाने के लिए जरूरी सामान की सप्लाई को मजबूत करने के लिए भारत ने अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, सिंगापुर और नीदरलैंड के साथ भी समझौते किए हैं.

इस तरह भारत में चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने के लिए कई नए काम चल रहे हैं. आने वाले समय में इन प्रोजेक्ट्स के पूरे होने, उत्पादन बढ़ने और नई तकनीक आने से भारत के चिप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है.

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आयुषी चतुर्वेदी

आयुषी चतुर्वेदी

आयुषी चतुर्वेदी tv9hindi.com में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हैं. यहां बिजनेस ऑटोमोबाइल के अलावा टेक्नोलॉजी की खबरें कवर करती हैं. इससे पहले ET Now Swadesh Digital में Copy Editor थीं. इन्होंने अपना करियर जागरण न्यू मीडिया के साथ शुरू किया. Ayushi ने International School of Media & Entertainment Studies (ISOMES) से बैचलर ऑफ मॉस कम्युनिकेशन की डिग्री ली है. पिछले 3 साल से ये बिजनेस ऑटो टेक्नोलॉजी की खबरें कवर करती आ रही हैं. इन्हें सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाना काफी पंसद है. इन्होंने Auto, Tech में कई ऑनलाइन ऑफलाइन इवेंट भी कवर किए हैं. इन्हें ड्राइविंग और रिव्यू करना पसंद है. Ayushi को किताबें पढ़ने में रुचि हैं.

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