PM Modi Foreign Visit Cost: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2026 में किए गए आधिकारिक विदेश दौरों का पूरा हिसाब-किताब संसद के सामने आ गया है. संसदीय दस्तावेजों के जरिए सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी से जुलाई 2026 के बीच प्रधानमंत्री ने कुल 13 देशों की यात्राएं की हैं. इन विदेशी दौरों पर कुल मिलाकर करीब 74.5 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया गया है. वहीं, सरकार ने बताया कि इन दौरों की आर्थिक कूटनीति की बदौलत देश में अरबों डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है.
किस देश की यात्रा पर कितना हुआ खर्च?
संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, महीने-दर-महीने और देशवार खर्च का ब्यौरा इस प्रकार है. साल 2026 की शुरुआत में फरवरी में पीएम मोदी के मलेशिया दौरे पर लगभग 5.57 करोड़ रुपये खर्च हुए. वहीं इजरायल दौरे पर करीब 11.92 करोड़ रुपये का खर्च आया. मई में पीएम मोदी ने पांच देशों का बड़ा यूरोप और खाड़ी दौरा किया.
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इसमें यूएई पर 1.97 करोड़ रुपये, नीदरलैंड पर 3.60 करोड़ रुपये, स्वीडन पर 6.33 करोड़ रुपये, नॉर्वे पर 17.46 करोड़ रुपये और इटली दौरे पर 4.23 करोड़ रुपये खर्च हुए. इस दौरान नॉर्वे यात्रा का बिल अब तक का सबसे महंगा रहा.
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जून में स्लोवाक रिपब्लिक दौरे पर करीब 4.77 करोड़ रुपये और सेशेल्स यात्रा पर लगभग 8.22 करोड़ रुपये खर्च हुए. इस दौरान की गई फ्रांस यात्रा के बिल अभी प्रोसेस में हैं, इसलिए उन्हें इस सूची में शामिल नहीं किया गया है.
जुलाई में ओशिनिया और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के दौरे में इंडोनेशिया पर 3.87 करोड़ रुपये, ऑस्ट्रेलिया पर ~1.18 करोड़ रुपये और न्यूजीलैंड दौरे पर 5.43 करोड़ रुपये का खर्च आया.
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संसदीय रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दिए गए आंकड़ों में से कई दौरों का खर्च अभी प्रोविजिनल है. विदेशों में होटल, यात्रा और सुरक्षा एजेंसियों के सभी अंतिम बिलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल आंकड़ों में मामूली बदलाव हो सकता है.
अरबों डॉलर का FDI आया भारत
संसद में जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को कुल 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ है. सरकार का कहना है कि यह भारी-भरकम विदेशी निवेश प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं, उनके द्वारा की गई आर्थिक कूटनीति और वैश्विक मंचों पर भारत की साख मजबूत करने के निरंतर प्रयासों का ही सीधा परिणाम है.
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निवेश आकर्षित करने में मिली बड़ी सफलता
सरकार के मुताबिक, इन विदेश यात्राओं का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को गहरा करने के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना और वैश्विक निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित करना रहा है. इन्हीं कूटनीतिक प्रयासों का असर है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत में विदेशी पूंजी का प्रवाह लगातार मजबूत बना हुआ है.
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