Updated: Sunday, July 26, 2026, 20:04 [IST]
देश की परीक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की सिफारिश करने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया है।
यह टीम सिर्फ परीक्षा में तकनीक बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि NTA की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगी और उसे ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने का रोडमैप भी तैयार करेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देशभर में पेपर लीक को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा सुधार सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गए हैं।
PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वे आज जेल में हैं।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी कोशिश सिर्फ दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं है। हमारा लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाना है, जिस पर हर छात्र भरोसा कर सके।"
उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का ऐलान कर चुकी है और अब संसद में परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई के लिए नया कानून भी लाया जा रहा है।
नंदन नीलेकणी को क्यों मिली जिम्मेदारी?
परीक्षा सुधारों के लिए बनी इस हाई पावर टास्क फोर्स की कमान इन्फोसिस के सह-संस्थापक और तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है।
सरकार का मानना है कि आने वाले समय में तकनीक की मदद से परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसी वजह से तकनीकी समझ रखने वाले विशेषज्ञों को इस प्रक्रिया का नेतृत्व दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह टास्क फोर्स जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद उसी के आधार पर परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएंगे।
कौन-कौन हैं टास्क फोर्स में?
यह टास्क फोर्स अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साथ लेकर बनाई गई है। इसमें शामिल हैं।
- नंदन नीलेकणी - तकनीकी विशेषज्ञ और इन्फोसिस के सह-संस्थापक
- एस. सोमनाथ - इसरो के पूर्व चेयरमैन
- तपन डेका - इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक
- वी. कामाकोटी - IIT मद्रास के निदेशक
- अनीता करवाल - पूर्व शिक्षा सचिव
- अमृत लाल मीणा - लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक मामलों के विशेषज्ञ
सरकार का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर तकनीकी और संस्थागत दोनों स्तर पर सुधारों की सिफारिश करेंगे।
NTA में क्या बदल सकता है?
यह हाई पावर टास्क फोर्स खास तौर पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। इसका फोकस सिर्फ तकनीक बढ़ाने पर नहीं होगा, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को ज्यादा मजबूत बनाने पर रहेगा।
टास्क फोर्स डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा संचालन, निगरानी तंत्र, जवाबदेही और संरचनात्मक बदलाव जैसे मुद्दों पर सुझाव देगी ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम हो सके।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अगले दिन बड़ा फैसला
इस टास्क फोर्स का गठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अगले ही दिन किया गया। पिछले करीब सात हफ्तों से CJP के नेतृत्व में छात्र और युवा देशभर में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हो गया। बाद में कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसका समर्थन किया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन के समर्थन में लंबी भूख हड़ताल की थी, जिसे केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद समाप्त किया गया।
संसद में आएगा नया कानून
सरकार अब परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी पर सख्त कानून लाने की तैयारी में भी है। केंद्र सरकार सोमवार, 27 जुलाई को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश करेगी।
इस संशोधन के जरिए दोषियों के लिए और कड़ी सजा, तय समय में जांच पूरी करने की व्यवस्था, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और जल्दी सुनवाई जैसे प्रावधान जोड़े जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा।