
06 सितंबर 2026, रायपुर: PM किसान की किस्तों से जुटाए 10 हजार, खरीदी पहली गाय; आज 10 गायों से रोज बेचते हैं 100 लीटर दूध – प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि को बचाकर किसान ने इसे अपनी आय बढ़ाने का जरिया बना लिया। रायपुर के ग्राम पंचायत महापल्ली के 75 वर्षीय किसान परशुराम गुप्ता ने योजना के तहत मिलने वाली दो-दो हजार रुपए की किस्तों को बचाकर करीब 10 हजार रुपए जुटाए और इसी राशि से पहली गाय खरीदकर गौ-पालन शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी आय और संसाधनों को बढ़ाया और आज उनके पास 10 गाय हैं।
2020 में बचाई PM किसान की किस्तें
परशुराम गुप्ता ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली दो-दो हजार रुपए की किस्तों को खर्च करने के बजाय बचाना शुरू किया। इससे उन्होंने करीब 10 हजार रुपए की पूंजी जुटाई। इसी राशि से उन्होंने पहली गाय खरीदी और गौ-पालन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आय और संसाधनों को बढ़ाते हुए गायों की संख्या बढ़ाई।
आज परशुराम गुप्ता के पास 10 गाय हैं और वे नियमित रूप से दूध उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में वे प्रतिदिन करीब 100 लीटर दूध बेचते हैं। वे दूध को स्थानीय डेयरी में 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं। इससे उनके गौ-पालन व्यवसाय का मासिक कारोबार करीब 1 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। खर्च निकालने के बाद होने वाली आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
पशुपालन का शौक बना आय का जरिया
75 वर्ष की उम्र में भी परशुराम गुप्ता पूरी लगन के साथ गौ-सेवा और गौ-पालन से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि बचपन से ही उन्हें पशुपालन का शौक रहा है और गायों की सेवा उनके जीवन का हिस्सा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से मिली राशि ने उन्हें अपने अनुभव और रुचि को आय के बेहतर माध्यम में बदलने के लिए शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई।
छोटी बचत से बढ़ाया अपना कारोबार
परशुराम गुप्ता का कहना है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाली छोटी-छोटी आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि से शुरू हुआ उनका छोटा प्रयास आज सफल गौ-पालन व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है। उनका मानना है कि अनुभव, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो उम्र आत्मनिर्भर बनने की राह में बाधा नहीं बनती।
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