October 5, 2026

Pitru Paksha 2026: कुंडली में पितृ दोष है तो करें ये उपाय, दूर होंगी सारी परेशानियां!

Pitru Paksha 2026: कुंडली में पितृ दोष है तो करें ये उपाय, दूर होंगी सारी परेशानियां!

पितृ दोष निवारण के उपायImage Credit source: PTI

Pitru Dosha Remedies: ज्योतिष में पितृ दोष को एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है. मान्यता है कि कुंडली में सूर्य, राहु या केतु की कुछ विशेष स्थितियों के कारण पितृ दोष बन सकता है. इसे विवाह में देरी, संतान से जुड़ी चिंता, नौकरी-कारोबार में रुकावट और परिवार में मानसिक तनाव जैसी स्थितियों से जोड़ा जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष से जुड़े उपायों में पितरों का तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, दान-पुण्य, जरूरतमंदों को भोजन कराना और पितरों का स्मरण करना शामिल है. पितृपक्ष को इन कर्मों के लिए विशेष समय माना जाता है. आइए जानते हैं कुंडली में पितृ दोष होने पर कौन से धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं.

क्या होता है पितृ दोष?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब जन्म कुंडली में सूर्य के साथ राहु या केतु का संबंध कुछ विशेष भावों या स्थितियों में बनता है, तो उसे पितृ दोष कहा जाता है. इसे पितरों से जुड़े कर्मों या पितृ ऋण से जोड़कर देखा जाता है.

पितृ दोष होने पर क्या परेशानियां आती हैं?

ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृ दोष को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में रुकावट से जोड़ा जाता है. कुछ लोगों के लिए विवाह में देरी, संतान से जुड़ी चिंता, नौकरी या कारोबार में बार-बार अड़चन और आर्थिक अस्थिरता जैसी स्थितियों को इससे जोड़कर देखा जाता है. कई बार परिवार में मानसिक तनाव या काम बनते-बनते रुक जाने को भी पितृ दोष से जोड़ा जाता है.

पितृ दोष शांत करने के लिए करें ये उपाय

पितरों का तर्पण करें

पितरों के लिए तर्पण करना सबसे प्रमुख धार्मिक उपायों में माना जाता है. पितृपक्ष के दौरान तिल और जल से तर्पण करने की परंपरा है. तर्पण करते समय अपने पितरों का स्मरण करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.

मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करें

धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस तिथि को पितर का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर पितृपक्ष में श्राद्ध करना विशेष महत्व रखता है. श्राद्ध के साथ तर्पण और पिंडदान की भी परंपरा है. अगर किसी कारण से मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या को ऐसे पितरों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है. इसे सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के श्राद्ध के लिए भी महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करें

सर्वपितृ अमावस्या पितृपक्ष की अंतिम तिथि होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार जिन पितरों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या किसी कारण से उनकी तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, उनके लिए इस दिन श्राद्ध किया जा सकता है. साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी. ऐसे में पितृ दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले लोग परिवार की परंपरा के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और दान कर सकते हैं.

गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन दें

पितृपक्ष की परंपराओं में गाय, कौवे, कुत्ते और अन्य जीवों को भोजन कराने की भी मान्यता मिलती है. इसे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से जोड़ा जाता है.

पीपल के पेड़ की पूजा करें

धार्मिक मान्यताओं में पीपल के पेड़ का विशेष महत्व बताया गया है. पितृ दोष से जुड़े उपायों में पीपल की पूजा और उसके नीचे दीपक जलाने की मान्यता है.

ये भी पढ़ें: सर्वपितृ अमावस्या के दिन कौन-कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? जानें जरूरी नियम

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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