
पितृपक्ष 2026Image Credit source: PTI/Pexels
Pitru Paksha 2026 Date: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है. इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करता है. साल 2026 में पितृपक्ष की श्राद्ध तिथियां 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक हैं. पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी. इसी बीच एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि पितृपक्ष के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों का भविष्य कैसा होता है. क्या ऐसे बच्चों को पितरों का विशेष आशीर्वाद मिलता है या फिर उन्हें जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है? आइए जानते हैं इस बारे में ज्योतिष क्या कहता है.
क्या पितृपक्ष में जन्म लेना अशुभ होता है?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष का काल नकारात्मकता का नहीं, बल्कि पितरों की उपस्थिति और उनकी कृपा का समय होता है. मान्यता है कि इस अवधि में जन्म लेने वाले बच्चों पर कुल के पितरों का सीधा वरदान रहता है.
ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है यह समय?
धार्मिक मान्यताओं में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता का समय माना जाता है. इस दौरान श्राद्ध और तर्पण के जरिए पितरों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा है. ज्योतिषीय मान्यताओं में जन्म का समय महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में पितृपक्ष के दौरान जन्म लेने वाले बच्चे की कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, लग्न और अन्य ग्रहों की स्थिति देखकर उसके व्यक्तित्व और जीवन से जुड़े संकेतों का आकलन किया जाता है. इसलिए अगर किसी बच्चे का जन्म पितृपक्ष में हुआ है, तो सिर्फ इस वजह से यह तय नहीं होता है कि उसके जीवन में परेशानियां ही आएंगी. इसी तरह केवल पितृपक्ष में जन्म लेने से यह भी तय नहीं होता कि बच्चा बहुत भाग्यशाली होगा.
पितृपक्ष में जन्मे बच्चों को लेकर क्या मान्यताएं हैं?
कुछ धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों का अपने परिवार और पूर्वजों से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत हो सकता है. ऐसे बच्चों में परिवार की परंपराओं, संस्कारों और रिश्तों के प्रति लगाव देखने की बात कही जाती है. कुछ मान्यताओं में ऐसे जन्म को पूर्वजों से जुड़े विशेष संयोग के रूप में भी देखा जाता है.
जन्म तिथि के साथ नक्षत्र और ग्रह भी महत्वपूर्ण
अगर किसी बच्चे का जन्म पितृपक्ष में हुआ है और माता-पिता उसके भविष्य को ज्योतिष की नजर से समझना चाहते हैं, तो जन्म की सही तारीख, समय और स्थान के आधार पर कुंडली बनवाई जा सकती है. इसमें लग्न, चंद्र राशि, जन्म नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और दशा आदि को देखा जाता है. इन्हीं आधारों पर बच्चे के स्वभाव, शिक्षा, करियर और जीवन के दूसरे पहलुओं से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों की चर्चा की जाती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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