September 21, 2026

PISA 2025 Results: गणित में एशियाई देशों का दबदबा, अमेरिका का स्कोर 463; जानें दुनिया की शिक्षा का हाल

PISA 2025 Results: गणित में एशियाई देशों का दबदबा, अमेरिका का स्कोर 463; जानें दुनिया की शिक्षा का हाल

PISA 2025 Results: दुनिया के 15 वर्षीय छात्रों की शैक्षणिक क्षमता का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकलन करने वाली PISA 2025 रिपोर्ट जारी हो गई है। OECD की इस रिपोर्ट में गणित, विज्ञान और रीडिंग के साथ छात्रों की डिजिटल दुनिया में समस्या हल करने की क्षमता का भी आकलन किया गया है। इस बार 91 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के 7.6 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया।


रिपोर्ट में गणित के मामले में B-S-J-Z (चीन) यानी बीजिंग, शंघाई, जियांग्सू और झेजियांग के छात्रों ने 612 अंक के साथ सबसे अधिक औसत स्कोर हासिल किया। इसके बाद सिंगापुर 563 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं अमेरिका का गणित स्कोर 463 अंक रहा, जो OECD के औसत के बराबर है।
Mathematics में एशियाई शिक्षा प्रणालियों का दबदबा
PISA 2025 के गणित परिणामों में एशिया की कई शिक्षा प्रणालियां शीर्ष पर रही हैं। B-S-J-Z (चीन) के बाद सिंगापुर, मकाऊ, चीनी ताइपे, जापान और कोरिया जैसे सिस्टम ऊंचे स्कोर वाले समूह में शामिल हैं। OECD के मुताबिक B-S-J-Z (चीन) का गणित औसत 612 अंक रहा, जबकि OECD देशों का औसत 463 अंक है।
गणित में प्रमुख शिक्षा प्रणालियों के स्कोर
शिक्षा प्रणाली    गणित स्कोर
B-S-J-Z (चीन)    612
सिंगापुर    563
मकाऊ (चीन)    549
चीनी ताइपे    546
जापान    525
कोरिया    522
हांगकांग (चीन)    522
एस्टोनिया    508
स्विट्जरलैंड    499
यूनाइटेड किंगडम    488
कनाडा    485
न्यूजीलैंड    480
अमेरिका    463
OECD ने स्पष्ट किया है कि PISA में B-S-J-Z (चीन) से आशय बीजिंग, शंघाई, जियांग्सू और झेजियांग की भागीदारी से है। इसलिए 612 अंक को पूरे चीन की राष्ट्रीय आबादी के छात्रों का औसत मानना सही नहीं होगा।
अमेरिका का Mathematics Score कितना रहा?
अमेरिका के 15 वर्षीय छात्रों का गणित में औसत स्कोर 463 अंक रहा। OECD के मुताबिक अमेरिका में 65 फीसदी छात्र गणित में कम से कम Level 2 दक्षता तक पहुंचे, जो OECD औसत के बराबर है। वहीं करीब 8 फीसदी अमेरिकी छात्र गणित में शीर्ष Level 5 या 6 परफॉर्मर रहे।
तुलना करें तो B-S-J-Z (चीन) में Level 5 या 6 तक पहुंचने वाले छात्रों की हिस्सेदारी 54 फीसदी थी, जबकि सिंगापुर में यह 37 फीसदी रही।
दुनिया में Education Performance क्यों चिंता का विषय है?
PISA 2025 के आंकड़ों में OECD देशों के लिए शिक्षा प्रदर्शन में लंबे समय से जारी गिरावट का संकेत मिला है। गणित में OECD औसत स्कोर 2015 के 485 अंक से घटकर 2025 में 463 अंक रह गया। रीडिंग में भी 489 से गिरकर 461 अंक हो गया। OECD ने गणित में 22 अंकों की गिरावट को एक साल से कुछ अधिक सीखने के नुकसान के बराबर बताया है।
विज्ञान में 2025 का OECD औसत 482 अंक रहा। इस बार विज्ञान PISA का मुख्य विषय था, जबकि गणित और रीडिंग को माइनर डोमेन के तौर पर शामिल किया गया था।
Smartphone और Digital Devices का पढ़ाई पर असर
PISA 2025 में छात्रों के डिजिटल डिवाइस इस्तेमाल को भी विस्तार से देखा गया। OECD के मुताबिक स्कूल में डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कम प्रदर्शन से जुड़ा पाया गया है। औसतन 28 फीसदी छात्रों ने बताया कि उनके सहपाठी ज्यादातर या हर विज्ञान की कक्षा में डिजिटल डिवाइस के कारण ध्यान भटकाते हैं।


स्कूल के बाहर भी डिजिटल मनोरंजन का समय महत्वपूर्ण है। OECD के पिछले PISA विश्लेषण में पाया गया कि रोजाना चार घंटे से ज्यादा डिजिटल मनोरंजन गणित प्रदर्शन और स्कूल से जुड़ाव में गिरावट से जुड़ा था। हालांकि यह संबंध कारण-परिणाम साबित नहीं करता और मध्यम स्तर का डिजिटल इस्तेमाल अलग परिणाम दिखा सकता है।
PISA 2025 में क्या-क्या देखा गया?
इस बार PISA में केवल पारंपरिक विषयों की परीक्षा नहीं हुई। छात्रों की Science, Mathematics, Reading और Computational Problem Solving क्षमता का आकलन किया गया। इसके अलावा डिजिटल दुनिया में सीखने, AI के इस्तेमाल और छात्रों के सीखने से जुड़े व्यवहारों पर भी डेटा जुटाया गया।
OECD के अनुसार 2025 की परीक्षा में 91 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के 7.6 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। ये छात्र दुनिया भर के करीब 3.3 करोड़ 15 वर्षीय स्कूली छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
क्या बताती है PISA 2025 Report?
PISA 2025 के आंकड़े दिखाते हैं कि कई एशियाई शिक्षा प्रणालियां गणित और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि OECD देशों में औसत शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट दर्ज हुई है। साथ ही, डिजिटल डिवाइस और सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी छात्रों के सीखने के माहौल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर सामने आया है।
हालांकि PISA किसी देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था की अकेली रैंकिंग नहीं है। यह 15 वर्षीय छात्रों की एक प्रतिनिधि सैंपल के प्रदर्शन को मापता है और अलग-अलग देशों के बीच शैक्षणिक परिणामों की तुलना करने का एक अंतरराष्ट्रीय पैमाना उपलब्ध कराता है।
 

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