एक WhatsApp ग्रुप... उसमें साइबर ठगी करने वाले कई लोग जुड़े हुए थे... काम बंटा हुआ था और देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे लोगों को फोन किए जा रहे थे. फिर एक दिन पुलिस ने गैंग के एक सदस्य को पकड़ लिया. इसके बाद WhatsApp ग्रुप में एक मैसेज आया- 'साथी पकड़ा गया है, मोबाइल तोड़ दो.' पुलिस का कहना है कि यह मैसेज एक संकेत था कि गैंग में शामिल लोग एक-दूसरे से लगातार संपर्क में थे और गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सबूत मिटाने की कोशिश कर रहे थे. बागपत पुलिस ने इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गैंग का खुलासा किया है.
पुलिस ने मेरठ और गाजियाबाद से आठ आरोपियों को पकड़ा है. गिरफ्तार आरोपियों में एक PhD छात्र भी शामिल है. पुलिस के मुताबिक, कुछ आरोपी ग्रेजुएट और इंटर पास हैं, जबकि कुछ पहले निजी बैंक और पेमेंट बैंक में काम कर चुके हैं. इन लोगों पर आरोप है कि ये नामी इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारी बनकर पॉलिसीधारकों को फोन करते थे और रिन्यूअल, बोनस, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या लैप्स पॉलिसी दोबारा शुरू कराने के नाम पर पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे.

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मामले की शुरुआत बागपत साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक शिकायत से हुई. शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि इंश्योरेंस पॉलिसी के रिन्यूअल और दूसरी प्रक्रिया के नाम पर उससे करीब 2.88 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए. बाद में पता चला कि रकम वास्तविक इंश्योरेंस कंपनी के खाते में नहीं गई थी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया. इसके बाद बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को खंगाला गया. यहीं से जांच धीरे-धीरे उन लोगों तक पहुंची, जो अलग-अलग शहरों में बैठकर पॉलिसीधारकों को फोन कर रहे थे.
पहले से पता होती थी पॉलिसी की जानकारी
पुलिस के मुताबिक, गैंग का तरीका थोड़ा अलग था. आरोपी सीधे किसी अनजान व्यक्ति को कॉल कर पैसे नहीं मांगते थे. पहले उनके पास पॉलिसीधारक से जुड़ी जानकारी होती थी. इसी डेटा के आधार पर फोन किया जाता था.
कॉल करने वाला खुद को किसी नामी इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी या कर्मचारी बताता था. बातचीत के दौरान वह पॉलिसी से जुड़ी ऐसी जानकारियां बताता था, जिससे सामने वाले को लगता था कि कॉल सच में इंश्योरेंस कंपनी से आया है. इसके बाद कहानी आगे बढ़ती थी. कभी कहा जाता कि पॉलिसी लैप्स हो गई है. कभी रिन्यूअल के लिए पैसे मांगे जाते. कहीं बोनस दिलाने के नाम पर रकम मांगी जाती तो कहीं टैक्स या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर भुगतान कराया जाता.
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पैसा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था. पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान NCRP पोर्टल पर इस गिरोह से जुड़ी 51 शिकायतें सामने आई हैं. इनमें करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी का आंकड़ा सामने आया है.
पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था. इसके तार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, लद्दाख और गोवा समेत कई राज्यों तक जुड़े मिले हैं. यानी फोन एक शहर से किया जा रहा था और निशाना देश के किसी दूसरे हिस्से में मौजूद पॉलिसीधारक हो सकता था.
PhD छात्र भी गैंग में शामिल
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों में निशांत कुमार नाम का एक PhD छात्र भी शामिल है. इसके अलावा कुछ आरोपी ग्रेजुएट और कुछ 12वीं पास हैं. पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी पहले प्राइवेट बैंक और पेमेंट बैंक में भी काम कर चुके हैं.
एसपी बागपत सूरज कुमार राय के मुताबिक, आरोपी कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते थे. पुलिस का कहना है कि लग्जरी जिंदगी जीने और जल्दी पैसा कमाने की चाह में इन लोगों ने साइबर फ्रॉड को कमाई का जरिया बना लिया.

पुलिस के मुताबिक, गैंग के सदस्य WhatsApp ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हुए थे. इसी ग्रुप पर नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच संपर्क और अपडेट शेयर किए जाते थे. जांच के दौरान पुलिस को तब इस नेटवर्क के तरीके का अंदाजा हुआ, जब एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद WhatsApp ग्रुप पर दूसरे सदस्यों को सतर्क करने वाला मैसेज भेजा गया. मैसेज में कथित तौर पर कहा गया कि साथी पकड़ा गया है और मोबाइल तोड़ दो.
पुलिस के लिए यह मैसेज अहम सुराग बना. अब जांच इस बात पर भी चल रही है कि ग्रुप में कितने लोग शामिल थे, किसकी क्या भूमिका थी और पॉलिसीधारकों का डेटा आखिर आरोपियों तक पहुंचता कैसे था.
लग्जरी गाड़ी, बाइक और मोबाइल बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक स्कॉर्पियो, एक बाइक, 16 मोबाइल, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज, क्रेडिट कार्ड और सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. खास तौर पर उन लोगों की तलाश की जा रही है, जो कथित तौर पर पॉलिसीधारकों का डेटा उपलब्ध कराते थे.
एसपी सूरज कुमार राय ने लोगों से अपील की है कि इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ा कोई भी काम अधिकृत कंपनी के एजेंट या आधिकारिक माध्यम से ही करें. अगर कोई फोन करके पॉलिसी बंद होने, बोनस मिलने, टैक्स जमा करने या रिन्यूअल के नाम पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो पहले कंपनी के आधिकारिक माध्यम से इसका पता करें.
बागपत पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम भी दिया गया है. फिलहाल आठ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं. पुलिस अब उस नेटवर्क की अगली कड़ी तलाश रही है, जहां से पॉलिसीधारकों का डेटा कथित तौर पर इन लोगों तक पहुंचता था. सवाल है कि अगर कॉल करने वाले इतने लोगों की पॉलिसी की जानकारी पहले से जानते थे, तो उन्हें यह डेटा आखिर मिलता कहां से था?
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