पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा आज आंखों के ऑपरेशन के लिए PGI चंडीगढ़ पहुंचे। पटियाला सेंट्रल जेल में 30 साल से ज्यादा समय से बंद राजोआणा की दोनों आंखों में मोतियाबिंद की समस्या है। हाईकोर्ट ने उन्हें दोनों आ
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राजोआणा ने अपनी आंखों के इलाज के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पटियाला के डॉ. आरएस रंधावा आई अस्पताल में दोनों आंखों का ऑपरेशन कराने की अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि पटियाला सेंट्रल जेल के अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। राजोआणा ऑपरेशन और इलाज का पूरा खर्च खुद उठाने के लिए भी तैयार हैं।
पहले पटियाला के अस्पताल में ऑपरेशन की मांगी अनुमति
राजोआणा ने हाईकोर्ट से मांग की थी कि उन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा में पटियाला के डॉ. आरएस रंधावा आई अस्पताल ले जाया जाए। यह अस्पताल पटियाला सेंट्रल जेल से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है। वहां दोनों आंखों का ऑपरेशन कराने के बाद उन्हें वापस जेल भेजने की अनुमति मांगी गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उन्हें आंखों का ऑपरेशन कराने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि राजोआणा दोनों आंखों का ऑपरेशन PGI चंडीगढ़ में करवा सकते हैं।
27 जनवरी को भी जांच के लिए PGI लाया गया
याचिका के अनुसार, 27 जनवरी 2026 को राजोआणा को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच PGI चंडीगढ़ लाया गया था। वहां डॉक्टरों ने उनकी दोनों आंखों की जांच की थी। जांच में मोतियाबिंद की स्थिति पहले जैसी ही बताई गई थी।
डॉक्टरों ने यह भी कहा था कि अगर वह चश्मे की मदद से 6/6 दृष्टि पढ़ पा रहे हैं तो फिलहाल मोतियाबिंद का ऑपरेशन कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।
इसके बाद पटियाला सेंट्रल जेल के अस्पताल के डॉक्टरों ने डॉ. आरएस रंधावा आई अस्पताल से भी सलाह ली। याचिका में डॉक्टर की सलाह का हवाला देते हुए कहा गया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद राजोआणा को पावर वाला चश्मा लगाने की जरूरत नहीं पड़ सकती।
राजोआणा ने इसी आधार पर बाहर के अस्पताल में ऑपरेशन कराने की अनुमति मांगी थी, क्योंकि जेल अस्पताल में इस तरह के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
राजोआणा की याचिका में कहा गया था कि आंखों के ऑपरेशन और इलाज में आने वाला पूरा खर्च वह खुद उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने पुलिस सुरक्षा में अस्पताल ले जाने और ऑपरेशन के बाद वापस जेल पहुंचाने की अनुमति मांगी थी।

पीजीआई चंडीगढ़।
30 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद
याचिका के मुताबिक, 31 अगस्त 1995 की CBI FIR से जुड़े मामले में चंडीगढ़ की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 31 जुलाई 2007 को राजोआणा को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
राजोआणा के मुताबिक, वह इस मामले में 27 जनवरी 1996 से लगातार हिरासत में हैं और 30 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं।