पटना में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव रिहा हो गए हैं। रिहाई के बाद उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
पटना में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव रिहा हो गए हैं।
- Published: 19 Aug 2026, 04:26 PM IST
- Last Updated: 19 Aug 2026, 04:26 PM IST
Patna protest: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद सचिवालय थाने से रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा और अपनी आगे की रणनीति स्पष्ट की।
तेजस्वी यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक मुख्यमंत्री इस पूरे मामले की जिम्मेदारी नहीं लेते और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक छात्रों को पूरा न्याय नहीं मिलता और बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।
#WATCH पटना: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को सचिवालय थाने से रिहा किया गया।
उन्होंने कहा, "जब तक मुख्यमंत्री जिम्मेदारी तय नहीं करेंगे पूरी घटना का वक्तव्य नहीं देंगे और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया ये लोगों के सामने नहीं… pic.twitter.com/AjmbD3RUJs
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 19, 2026
छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा
आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनकी पार्टी छात्रों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
सीवान की घटना और बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश
आरजेडी यह विरोध मार्च राज्य के विभिन्न जिलों, विशेषकर सीवान में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर निकाल रही थी। सीवान में छात्र प्रदर्शनों के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर एके-47 राइफल के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। इस घटना के कुछ दिनों बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया था और 18 अगस्त को एसपी पूरन कुमार झा का तबादला कर दिया गया था।
इससे पहले तेजस्वी यादव ने अपने लोकभवन मार्च के दौरान "दुरुपयोग और अत्यधिक बल प्रयोग" की आशंका जताई थी। इसके बावजूद उन्होंने डाकबंगला चौराहे पर लगाई गई बैरिकेडिंग को पार कर लिया, हालांकि पटना उच्च न्यायालय परिसर के पास इनकम टैक्स गोलंबर पर भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया।
तिरंगा लहराकर विरोध, एसडीएम की अपील और नेताओं के बयान
प्रदर्शन के दौरान वाटर कैन्नों (पानी की बौछारें) का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद तेजस्वी यादव और उनके समर्थक डिगे बिना तिरंगा झंडा लहराते हुए खड़े रहे। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के पास एके-47 राइफल के डमी मॉडल भी देखे गए। इस बीच, पटना सदर के एसडीओ कृतिका ने प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा तिरंगे को उल्टा पकड़े जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को लोकभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना था और पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति भी दी जानी थी।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा, "हमें जेन-जी की भावनाओं को समझने की जरूरत है। बिहार में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ सरकार ने एके-47 राइफलों का इस्तेमाल किया और दिल्ली में उन पर पैलेट गन तथा नुकीले डंडों से वार किया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे एक ईमानदार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे। हम इन तमाम पहलुओं को बिहार के राज्यपाल के संज्ञान में लाने के लिए यह मार्च निकाल रहे हैं।"
भाजपा ने प्रदर्शन को बताया फ्लॉप
दूसरी ओर, इस मार्च पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दावा किया कि यह प्रदर्शन केवल "तेजस्वी यादव के करियर को बचाने" के लिए निकाला गया एक राजनीतिक स्टंट है। सरावगी ने आरोप लगाया कि वे एक छात्र, क्रिकेटर और राजनेता के रूप में विफल रहे हैं, और अब ऐसे मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं जिसे बिहार सरकार पहले ही सुलझा चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा से एक सख्त कानून पारित किया है जिसके तहत पेपर लीक मामलों में 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना और 8 साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है।