अध्यात्म
- Authored by: विनीत
- Updated Jul 21, 2026, 09:42 AM IST
Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती और हरितालिका तीज को कई लोग एक ही पर्व मान लेते हैं, जबकि दोनों का महत्व, उद्देश्य और पूजा-विधि अलग है। जानिए दोनों पर्वों के बीच का पूरा धार्मिक अंतर और इनके पीछे छिपी मान्यताएं।
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पार्वती तीज और हरितालिका तीज में क्या है अंतर
Parvati Jayanti 2026: माता पार्वती से जुड़े कई पर्व सालभर में मनाए जाते हैं। इनमें पार्वती जयंती और हरितालिका तीज सबसे खास माने जाते हैं। चूंकि दोनों ही पर्व माता पार्वती से जुड़े हैं, इसलिए कई लोगों को लगता है कि ये एक ही त्योहार हैं या इनका महत्व भी एक जैसा है। लेकिन ऐसा नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोनों पर्व अलग-अलग वजह से मनाए जाते हैं और इनका संदेश भी अलग है। एक दिन माता पार्वती के जन्म का उत्सव मनाया जाता है, जबकि दूसरा उनके तप, धैर्य और भगवान शिव को पति के रूप में पाने के संकल्प की याद दिलाता है। अगर आप भी इन दोनों पर्वों को लेकर उलझन में रहते हैं, तो आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पार्वती जयंती और हरितालिका तीज में आखिर क्या अंतर है।
पार्वती जयंती का क्या महत्व है
पार्वती जयंती को माता पार्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर देवी पार्वती का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन भक्त माता के जन्म का उत्सव मनाते हैं और उनकी पूजा करके परिवार की सुख-शांति, सौभाग्य और खुशहाली की कामना करते हैं। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य माता के जन्म का स्मरण और उनकी कृपा प्राप्त करना होता है।
हरितालिका तीज क्यों मनाई जाती है
हरितालिका तीज का संबंध माता पार्वती की कठिन तपस्या से है। पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तप किया था। उनकी इसी अटूट श्रद्धा और समर्पण की याद में हरितालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं।
पूजा और व्रत का तरीका भी अलग है
पार्वती जयंती पर माता पार्वती की पूजा, श्रृंगार और भोग अर्पित किए जाते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और भक्त माता का आशीर्वाद लेते हैं। वहीं हरितालिका तीज का व्रत काफी कठिन माना जाता है। कई महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और पानी के व्रत रखती हैं तथा भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करती हैं। इसलिए दोनों पर्वों की पूजा-विधि और नियम एक जैसे नहीं हैं।
दोनों पर्व अलग-अलग संदेश देते हैं
पार्वती जयंती हमें माता पार्वती के जन्म, मातृत्व, शक्ति और करुणा की याद दिलाती है। वहीं हरितालिका तीज धैर्य, सच्चे प्रेम, विश्वास और अपने लक्ष्य के लिए दृढ़ रहने की सीख देती है। यानी दोनों पर्वों का केंद्र माता पार्वती हैं, लेकिन उनका धार्मिक संदेश अलग-अलग है।
इसीलिए दोनों को एक जैसा नहीं मानना चाहिए
कई लोग सिर्फ इसलिए भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि दोनों पर्व माता पार्वती से जुड़े हैं। लेकिन धर्मग्रंथों और परंपराओं में दोनों का महत्व अलग बताया गया है। पार्वती जयंती माता के जन्म का पर्व है, जबकि हरितालिका तीज उनके तप और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इसलिए इन दोनों पर्वों का सही अंतर जानना जरूरी है। इससे न केवल धार्मिक जानकारी बढ़ती है, बल्कि पूजा भी सही भावना और सही उद्देश्य के साथ की जा सकती है।
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विनीतauthor
विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।
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