September 20, 2026

Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी पर विष्णु जी क्यों लेते हैं करवट? पढ़ें परिवर्तिनी एकादशी की ये कथा

Parivartini Ekadashi Vrat Katha: साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी का पावन पर्व 22 सितंबर, मंगलवार को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी तक चार महीनों के लिए क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में रहते हैं. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को इस चार महीने की निद्रा का मध्य बिंदु माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा के दौरान अपनी विश्राम अवस्था बदलते हैं और बाईं से दाईं करवट लेते हैं. इसी स्थान परिवर्तन या करवट बदलने की क्रिया के कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है. आइए जानते हैं इस पावन दिन के महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में.

चार महीने की योगनिद्रा और करवट बदलने का कारण

क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हुए भगवान विष्णु चातुर्मास के समय पूरी तरह से योगनिद्रा में लीन रहते हैं. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को उनकी इस चार महीने की निद्रा का ठीक आधा समय पूरा हो जाता है. इस मध्य बिंदु पर आते ही भगवान विष्णु विश्राम की स्थिति में थोड़ा बदलाव करते हैं. वे शेषनाग की शय्या पर सोते हुए बाईं तरफ से दाईं तरफ करवट बदलते हैं. इस प्रकार से स्थान में थोड़ा सा परिवर्तन करने के कारण ही इस पावन तिथि का नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा है. भक्त इस दिन भगवान के इस रूप का ध्यान करते हैं और उनकी विशेष कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं.

वामन अवतार और असुरराज बलि के घमंड का अंत

इसी पावन दिन पर भगवान विष्णु ने अपनी लीला रचाते हुए वामन रूप धारण किया था. वामन अवतार लेकर उन्होंने असुरराज बलि की कठिन परीक्षा ली थी और उनके घमंड को पूरी तरह से तोड़ दिया था. भगवान वामन ने राजा बलि से दान में तीन पग भूमि मांगी थी और केवल तीन ही पगों में पूरे तीनों लोकों को नाप लिया था. राजा बलि के इस घमंड को समाप्त करके उन्होंने देवताओं को उनका अधिकार पुनः दिलाया था. इसलिए इस खास दिन पर भगवान विष्णु के वामन रूप की विशेष पूजा-अर्चना करने की परंपरा है. जो भी लोग इस दिन वामन देव का ध्यान करते हैं, उनके जीवन से घमंड और सभी प्रकार की परेशानियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं.

परिवर्तिनी एकादशी के दिन वामन रूप के पूजन का फल

इस पवित्र तिथि पर भगवान विष्णु के साथ-साथ उनके वामन अवतार की पूरी विधि-विधान से पूजा की जाती है. श्रद्धालु इस दिन सुबह उठकर स्नान करते हैं और भगवान के सामने जल, फूल और फल अर्पित करके प्रार्थना करते हैं. वामन देव का पूजन करने से व्यक्ति के भीतर की सभी गलत भावनाएं दूर होती हैं और मन को बहुत शांति मिलती है. जो लोग इस दिन सच्चे मन से उपवास रखते हैं और कथा सुनते हैं, उन्हें हर कार्य में सफलता हासिल होती है. इस प्रकार परिवर्तिनी एकादशी का यह पावन पर्व भगवान विष्णु की कृपा पाने और अपने जीवन को सही दिशा देने का एक बहुत ही सुंदर अवसर माना जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.com पर संपर्क करें.

चंद्रेश शर्मा

चंद्रेश शर्मा

चंद्रेश शर्मा एक अनुभवी वैदिक ज्योतिषी हैं, जिनका ज्योतिष से जुड़ाव 35 से अधिक सालों का है. किशोरावस्था में शुरू हुई उनकी ज्योतिष यात्रा समय के साथ गहरे अध्ययन, निरंतर अभ्यास और आध्यात्मिक समझ में विकसित हुई. पिछले 15 सालों से वे पेशेवर रूप से लोगों को वैदिक ज्योतिष के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं. ज्योतिष के साथ-साथ उन्होंने लगभग 38 वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी कार्य किया. इस दौरान उन्हें टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, थिसेनक्रुप और भूषण स्टील जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला. व्यावसायिक जीवन के अनुभव और वैदिक ज्योतिष का गहन अध्ययन उनके दृष्टिकोण को संतुलित और व्यावहारिक बनाता है. उन्होंने भारतीय विद्या भवन से ज्योतिष आचार्य और ज्योतिष अलंकार की उपाधियां प्राप्त की हैं. उनका मानना है कि वैदिक ज्योतिष केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को खुद को समझने, सही समय पर उचित निर्णय लेने और जीवन की परिस्थितियों का बेहतर सामना करने की दिशा भी देता है. वे करियर, विवाह, व्यवसाय, वित्त, ग्रह गोचर, कुंडली विश्लेषण, पंचांग और वैदिक ज्योतिष से जुड़े विषयों पर अपने वर्षों के अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. उनका उद्देश्य लोगों तक प्रामाणिक वैदिक ज्योतिष को सरल, व्यावहारिक और विश्वसनीय रूप में पहुंचाना है, ताकि वे जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय अधिक स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ ले सकें.

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