July 16, 2026

आजाद हुआ बलूचिस्तान! Pakistan के फिर हुए टुकड़े? 85 प्रतिशत हिस्सा फौज से हुआ आजाद, किसने किया दावा?

Time Published: Thursday, July 16, 2026, 18:45 [IST]

Balochistan Independence: बलूचिस्तान के सबसे बड़े नेताओं में से एक मीर यार बलोच ने एक मीर यार बलोच ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स के जरिए घोषणा कर दी है कि बलूचिस्तान का 85 प्रतिशत हिस्सा अब पाकिस्तानी शासन और पाकिस्तानी फौज के चंगुल से मुक्त हो चुका है। यहां अब रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान की सरकार है।

इसके साथ ही बलूचिस्तान ने अपना नया राष्ट्रगान 'मा चुकैं बलूचानी', राष्ट्रीय झंडा और अपनी मुद्रा 'बलूची फलुस' को अपनाने की घोषणा की है। इस दावे के सामने आते ही पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पैरों तले जमीन खिसक गई है।

Balochistan Independence

बलूचिस्तानी संसाधनों पर बलूचों का कब्जा

जारी किए गए दस्तावेज के मुताबिक, नए बलूच प्रशासन ने क्षेत्र के सोने, तांबे, कोयले की खदानों और गैस क्षेत्रों जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनो पर पूरी तरह से अपना कंट्रोल होने का दावा किया है। बलूचिस्तान की स्व-घोषित सरकार का कहना है कि उनके पास फाइटर जेट, टैंक या भारी तोपखना नहीं है, लेकिन उनकी सुरक्षा बलों के पास अपनी जमीन का पूरा कंट्रोल मौजूद है। उनके दावे के मुताबिक, बलूचिस्तान की सेना, नौसेना, वायु सेना और नागरिक प्रशासन में 5,00,000 कर्मी शामिल हैं, जो साल 2026 के अत तक पाकिस्तानी सेना को पूरी तरह खदेड़ने के लिए तैयार हैं।

भारत और भारतीयों से मांगी मदद

इस पोस्ट में भारतीय नागरिकों और मीडिया से यह भी अपील की गई है कि वे बलूच लोगों को 'पाकिस्तान के अपने लोग' कहना बंद करें, क्योंकि बलूच लोग पाकिस्तानी नहीं हैं। भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है, लेकिन यहां देश की केवल 6 प्रतिशत आबादी ही निवास करती है। इसकी सीमाएं ईरान और अफगानिस्तान से लगती हैं और इसके पास अरब सागर की एक बहुत ही महत्वपूर्ण् तटरेखा है।

आजादी के बाद से ही अशांत है बलूचिस्तान

साल 1948 में कलात रियासत के विलय के बाद से ही यह क्षेत्र लगातार अशांत रहा है और यहां के लोग आर्थिक भेदभाव, राजनीतिक अलगाव और सैन्य दमन का आरोप लगाते आए हैं। बलूच लोगों का मानना है कि उन्हें उनके प्राकृतिक संसाधनों का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है, जबकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) जैसी बहु-अरब डॉलर की परियोजनाओं के जरिए उनके संसाधनों का शोषण किया जा रहा है। इस कारण क्षेत्र में लबे समय से हिंसक विद्रोह चल रहा है, जिसने अब एक नया मोड़ ले लिया है।

भारत किस बात पर कर रहा मंथन

स्व-घोषित बलूचिस्तान प्रशासन ने भारत से अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की अपील की है, लेकिन नई दिल्ली के लिए इस पर कदम उठाना काफी संवेदनशील मामला है। विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान को मान्यता देने से पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर भारत को घेरने का मौका मिल जाएगा। इसके अलावा, चीन के साथ भारत के रिश्ते, जो साल 2020 की गलवान झड़प के बाद से बेहद नाजुक दौर में हैं, और अधिक खराब हो सकते हैं क्योंकि चीन का इस क्षेत्र में भारी निवेश है।

ईरान का भी रखना होगा ध्यान

भारत को ईरान जैसे क्षेत्रीय भागीदारों के साथ भी अपने सबंधों का ध्यान रखना होगा, जो बलूच अलगाववादियों को मिलने वाले बाहरी समर्थन् का विरोध करता है। लिहाजा, बलूचिस्तान के समर्थन से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने का खतरा है, जिसे देखते हुए भारत इस मुद्दे पर बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।

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