August 7, 2026

Open Interest क्या है? जानें Futures और Options Trading में कैसे आता है काम

अगर आप Share Market में ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) या OI शब्द जरूर सुना होगा. अगर आप निवेश में नए हैं, तो यह समझना जरूरी है कि ओपन इंटरेस्ट क्या है.

Published byJyoti Singh

अगर आप Share Market में ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) या OI शब्द जरूर सुना होगा. अगर आप निवेश में नए हैं, तो यह समझना जरूरी है कि ओपन इंटरेस्ट क्या है.

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Open Interest

Open Interest Photograph: (magnific)

अगर आप Share Market में ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) या OI शब्द जरूर सुना होगा. अगर आप निवेश में नए हैं, तो यह समझना जरूरी है कि ओपन इंटरेस्ट क्या है. फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करते समय केवल यह देखना काफी नहीं है कि शेयर की कीमत बढ़ रही है या घट रही है यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि कितने ट्रेडर्स ने पोजिशन ले रखी है और किसी खास कॉन्ट्रैक्ट में कितनी एक्टिविटी हो रही है. कीमत और वॉल्यूम के साथ-साथ ओपन इंटरेस्ट का एनालिसिस करने से आपको बाजार के ट्रेंड्स को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है.

Open Interest क्या है?

ओपन इंटरेस्ट (OI) उन सभी बकाया फ्यूचर्स या ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या को दिखाता है जिन्हें अभी तक बंद, एक्सपायर या सेटल नहीं किया गया है. आसान शब्दों में कहें तो ट्रेडर्स इसका इस्तेमाल मार्केट में एक्टिव कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या और किसी खास स्टॉक या इंडेक्स में ट्रेडर्स की भागीदारी का पता लगाने के लिए करते हैं. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं: अगर ट्रेडर A और ट्रेडर B एक नया फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट बनाते हैं, तो ओपन इंटरेस्ट एक कॉन्ट्रैक्ट बढ़ जाता है. इसके उलट अगर इस पोजीशन को बाद में बिना किसी नए कॉन्ट्रैक्ट के बंद कर दिया जाता है, तो ओपन इंटरेस्ट कम हो जाता है. इस तरह नए कॉन्ट्रैक्ट बनने पर OI बढ़ता है और मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट बंद होने पर घटता है. हालांकि ओपन इंटरेस्ट एक उपयोगी डेरिवेटिव्स इंडिकेटर है लेकिन आपको अपने ट्रेडिंग के फैसले सिर्फ इसी के आधार पर नहीं लेने चाहिए, बल्कि आपको इसे प्राइस एक्शन, वॉल्यूम, सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल, RSI, MACD और दूसरे टेक्निकल इंडिकेटर्स के साथ मिलाकर एनालाइज करना चाहिए. साथ ही, स्टॉप-लॉस स्ट्रेटेजी और रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है.

Open Interest और Volume में क्या अंतर है?

कई नए ट्रेडर्स ओपन इंटरेस्ट और ट्रेडिंग वॉल्यूम के बीच कन्फ्यूज हो जाते हैं, जबकि ये दोनों काफी अलग-अलग चीजें हैं. वॉल्यूम से पता चलता है कि एक खास समय में कितने कॉन्ट्रैक्ट खरीदे और बेचे गए, जबकि ओपन इंटरेस्ट से यह पता चलता है कि कितने कॉन्ट्रैक्ट अभी भी ओपन हैं. इसके अलावा एक ही कॉन्ट्रैक्ट को एक दिन में कई बार खरीदा और बेचा जा सकता है जिससे वॉल्यूम तो बढ़ जाता है लेकिन जरूरी नहीं कि ओपन इंटरेस्ट भी उसी अनुपात में बढ़े. 

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Open Interest बढ़ने का क्या मतलब है?

अगर ओपन इंटरेस्ट (OI) लगातार बढ़ रहा है तो आम तौर पर इसका मतलब है कि मार्केट में नई पोजीशन बन रही हैं और उस कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडर्स की भागीदारी बढ़ रही है. हालांकि OI में बढ़ोतरी से यह तय नहीं होता कि शेयर मार्केट ऊपर जा रहा है या नीचे आपको कीमत में होने वाले बदलाव पर भी ध्यान देना चाहिए.

Price और Open Interest को एक साथ कैसे समझें?

अगर कीमत और ओपन इंटरेस्ट (OI) दोनों में बढ़ोतरी होती है, तो इसे अक्सर Long Build-Up माना जाता है. इसका मतलब है कि नए खरीदार कीमत बढ़ने की उम्मीद में अपनी पोजीशन बना रहे हैं. इसके उलट अगर कीमत गिरती है और OI बढ़ता है, तो इसे Short Positions माना जाता है, जिससे पता चलता है कि नई शॉर्ट पोजीशन बन रही हैं. अगर कीमत बढ़ती है और OI गिरता है, तो इसे Short Covering से जोड़ा जा सकता है. इसका मतलब है कि कुछ शॉर्ट सेलर्स अपनी पोजीशन बंद कर रहे हो सकते हैं. आखिर में अगर कीमत और OI दोनों गिरते हैं, तो इसे अक्सर  Long Unwinding कहा जाता है. इससे संकेत मिल सकता है कि लॉन्ग पोजीशन रखने वाले ट्रेडर्स अपनी पोजीशन बंद कर रहे हैं.

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Open Interest के फायदे

ओपन इंटरेस्ट ट्रेडर्स को कई बड़े फायदे देता है. पहला, यह फ्यूचर और ऑप्शंस में मार्केट की भागीदारी को समझने में मदद करता है. इससे नई पोजिशन बनने और मौजूदा पोजिशन के बंद होने के बारे में जानकारी मिलती है. साथ ही यह प्राइस ट्रेंड की मजबूती का अंदाजा लगाने में भी मदद करता है. ट्रेडर्स ऑप्शंस में अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस पर हो रही एक्टिविटी पर नजर रख सकते हैं और इस डेटा को प्राइस और वॉल्यूम के साथ मिलाकर मार्केट के सेंटीमेंट का विश्लेषण कर सकते हैं.

डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.