What is JPSC Scam: JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा पर पेपर लीक, OMR में कथित गड़बड़ी और भर्ती घोटाले के आरोपों ने झारखंड की सियासत गरमा दी है। जानिए JPSC का पूरा विवाद, छात्रों का आंदोलन, CID जांच, गिरफ्तारियां और CBI जांच की मांग की पूरी कहानी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन अभी देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब झारखंड में भी कुछ वैसा ही माहौल बनता दिख रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सवाल मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर नहीं, बल्कि राज्य की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती एजेंसी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की साख पर उठ रहे हैं।
रांची में हजारों अभ्यर्थी 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी, OMR शीट में छेड़छाड़ और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। मामला इतना बढ़ चुका है कि CID की विशेष जांच टीम (SIT) जांच कर रही है, 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते इस्तीफा दे चुके हैं और नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर दी गई हैं।

14वीं JPSC परीक्षा से कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
19 अप्रैल 2026 को 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हुई थी। आयोग ने 103 पदों के लिए भर्ती निकाली थी और 2 जुलाई को परिणाम घोषित करते हुए 2204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया।
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रिजल्ट सामने आते ही अभ्यर्थियों ने कई गंभीर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि आयोग ने श्रेणीवार कट-ऑफ जारी नहीं किया। मेरिट सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने का दावा किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ कथित OMR शीट वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि कम प्रश्न हल करने वाले उम्मीदवार भी सफल घोषित कर दिए गए। इन वायरल दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं आरोपों ने पूरे विवाद को जन्म दिया।
छात्रों का आंदोलन कैसे बना राज्यव्यापी अभियान?
JPSC कार्यालय के बाहर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे रांची में फैल गया। आंदोलन मोराबादी स्थित बापू वाटिका, अल्बर्ट चौक और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंच गया।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। दूसरी ओर, बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने CID की SIT गठित कर जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और एजेंसियों का मानना है कि गिरफ्तारियों की संख्या आगे बढ़ सकती है।

JPSC का विवादों से पुराना नाता, गठन के दो साल बाद ही लगा था पहला दाग
JPSC का गठन वर्ष 2000 में संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत हुआ था। इसका काम राज्य में ग्रुप-A और ग्रुप-B अधिकारियों की भर्ती करना है। लेकिन आयोग शुरुआत से ही विवादों में रहा है।
साल 2002 की पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में चयन प्रक्रिया पर पक्षपात के आरोप लगे। 2010 में आयोग के तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह के खिलाफ कथित अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज हुई। 2011 में जांच के बाद 35 अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करनी पड़ीं।
इसके बाद लगभग हर बड़ी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कभी उत्तर कुंजी, कभी आरक्षण, कभी इंटरव्यू, कभी मेरिट सूची तो कभी मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आते रहे। यही वजह है कि अब कई अभ्यर्थी JPSC को "व्यापम से बड़ा भर्ती घोटाला" तक कहने लगे हैं।
CID जांच में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?
CID ने पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से कई दौर की पूछताछ की है। उनका पासपोर्ट जब्त किया गया और उनके आवास पर भी छापेमारी की गई। हालांकि अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
जांच के बीच आयोग ने 22 जुलाई 2026 को संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 समेत कुल नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर दीं।
CID ने डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता कुमारी गुप्ता समेत टीडीपीएल एजेंसी से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया है। तीन आरोपियों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
छात्र आखिर क्या चाहते हैं?
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए। वे 14वीं JPSC परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने, सभी OMR शीट सार्वजनिक करने, संदिग्ध परीक्षाओं की फोरेंसिक जांच कराने और दोषी अधिकारियों व परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

CID ने सफल अभ्यर्थियों को क्या निर्देश दिए हैं?
29 जुलाई 2026 को CID ने नोटिस जारी कर 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों से जांच में सहयोग करने को कहा। सभी चयनित उम्मीदवारों को 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी PDF या फोटो के रूप में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। जिन अभ्यर्थियों के पास कार्बन कॉपी नहीं है, उन्हें अपने रोल नंबर के साथ इसका कारण भी बताना होगा।
झारखंड में JPSC को लेकर उठा यह विवाद अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। जिस तरह NEET को लेकर देशभर में पारदर्शिता की मांग उठी थी, उसी तरह अब JPSC की कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया भी बड़े सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में CID जांच की दिशा और सरकार के फैसले तय करेंगे कि यह मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित रहता है या राज्य की भर्ती व्यवस्था में व्यापक बदलाव की वजह बनता है।
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