जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला के तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। 17 साल से अलग रह रहे दोनों पक्षों ने आपसी सहमति और अनुच्छेद 142 के तहत सभी कानूनी लड़ाइयों को वापस ले लिया है।
दोनों ने वर्ष 1994 में शादी की थी। इस शादी से उनके दो बेटे जाहिर और जमीर हैं।
- Published: 31 Jul 2026, 03:22 PM IST
- Last Updated: 31 Jul 2026, 03:54 PM IST
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल नाथ का लगभग 30 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता आधिकारिक और कानूनी रूप से समाप्त होने जा रहा है। पिछले 17 वर्षों से एक-दूसरे से अलग रह रहे दोनों पक्षों द्वारा आपसी सहमति से तलाक लेने और एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी लंबित मुकदमों को वापस लेने की जानकारी दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का निपटारा कर दिया है।
शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सूचित किया कि दंपति ने अपने सभी आपसी मतभेदों को पूरी तरह से सुलझा लिया है।
"दोनों ने आज़ादी को अपना लिया": अनुच्छेद 142 के तहत विदाई
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से अपने वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए 22 जुलाई को संयुक्त याचिका दाखिल की थी।
कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा, "दोनों ने आज़ादी को अपना लिया है और आपसी मतभेदों को सुलझा लिया है।" इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने स्पष्ट किया कि अदालत अब दोनों पक्षों के बीच तय हुई समझौते की शर्तों के अनुसार ही उचित आदेश जारी कर इस पूरे मामले का औपचारिक निस्तारण करेगी।
1994 में हुई थी शादी, 2009 से रहने लगे थे अलग
उमर अब्दुल्ला और पायल नाथ की पहली मुलाकात दिल्ली के मशहूर ओबेरॉय होटल में काम करने के दौरान हुई थी। प्रेम प्रसंग के बाद दोनों ने वर्ष 1994 में शादी कर ली थी। इस शादी से उनके दो बेटे- जाहिर और जमीर हैं।
हालांकि, कुछ सालों बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और वे साल 2009 से ही अलग-अलग रहने लगे थे। इसके बाद साल 2011 में उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से 17 साल पुराने इस शादीशुदा रिश्ते से अलग होने का ऐलान कर दिया था।
फैमिली कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक: जानिए कानूनी लड़ाई का इतिहास
- फैमिली कोर्ट (2016): उमर अब्दुल्ला ने सबसे पहले दिल्ली की फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, 2016 में फैमिली कोर्ट ने आरोपों को अस्पष्ट बताते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
- दिल्ली हाईकोर्ट (2023): इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और उमर अब्दुल्ला को आदेश दिया कि वे पायल को 1.5 लाख रुपये मासिक भरण-पोषण (Maintenance) और बेटे की पढ़ाई के लिए 60,000 रुपये प्रति माह दें।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (2026): हाईकोर्ट के इस आदेश को उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने के बाद दोनों पक्षों ने लंबी कानूनी लड़ाई खत्म करने और आपसी सहमति से एक-दूसरे से सम्मानजनक विदाई लेने का रास्ता चुना।