Published: Saturday, September 19, 2026, 17:23 [IST]
Deepanshu Shokeen: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी DUSU चुनाव 2026 में उपाध्यक्ष पद का नतीजा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इस सीट पर किसी बड़े छात्र संगठन के उम्मीदवार ने नहीं, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। पूर्व NSUI सदस्य रहे शौकीन ने ABVP और NSUI समेत दूसरे उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए उपाध्यक्ष पद अपने नाम किया। 19वें राउंड की मतगणना में उन्हें 28,873 वोट मिले, जबकि ABVP के ईशु मौर्य को 15,346 और NSUI के वीर छत्र राठौर को 4,010 वोट मिले।
दीपांशु की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह दिल्ली के पीरागढ़ इलाके से आते हैं और एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद वह फिलहाल दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज में पढ़ाई कर रहे हैं।
कौन हैं दीपांशु शौकीन?
दीपांशु शौकीन दिल्ली के बाहरी इलाके में बसे पीरागढ़ गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। अभी वह डीयू के डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के छात्र हैं।
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उनके परिवार की पृष्ठभूमि भी आम छात्रों से जुड़ी नजर आती है। उनके पिता बस कंडक्टर हैं, जबकि उनकी मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उनकी पढ़ाई और छात्र राजनीति का सफर अब उन्हें DUSU के उपाध्यक्ष पद तक ले आया है।
पहले NSUI से मांगा था टिकट
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने से पहले दीपांशु शौकीन NSUI से जुड़े हुए थे। उन्होंने उपाध्यक्ष पद के लिए संगठन से टिकट मांगा था और नामांकन भी दाखिल किया था।
बाद में उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया। दीपांशु ने नामांकन वापस लेने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर प्रचार शुरू किया और चुनाव में अपनी जगह बनाई।
नंगे पैर किया चुनाव प्रचार
दीपांशु शौकीन के चुनाव प्रचार का एक खास पहलू उनका नंगे पैर चलना रहा। उन्होंने सत्य निकेतन छात्रावास हादसे के बाद यह संकल्प लिया था। उनका कहना था कि नंगे पैर चलने से होने वाला दर्द उन्हें उन छात्रों की परेशानियों की याद दिलाता रहेगा, जिनकी आवाज वह उठाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि जब तक हादसे से प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका यह संकल्प जारी रहेगा। उनके इस अभियान की चर्चा चुनाव के दौरान काफी हुई।
पिता चाहते थे UPSC की तैयारी करें
रिपोर्टों के मुताबिक, दीपांशु के पिता चाहते थे कि उनका बेटा UPSC की तैयारी करके IAS या IPS अधिकारी बने। लेकिन दीपांशु ने अलग रास्ता चुना।
उन्होंने परिवार के सामने साफ कहा कि वह राजनीति में जाना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने छात्र राजनीति को अपने करियर की दिशा बनाने का फैसला किया। DUSU चुनाव में उनकी जीत को इसी सफर के एक बड़े पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है।
19वें राउंड में कितने वोट मिले?
DUSU चुनाव की मतगणना के 19वें राउंड में उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 28,873 वोट मिले। ABVP के ईशु मौर्य को 15,346 वोट, जबकि NSUI के वीर छत्र राठौर को 4,010 वोट मिले। इस तरह उस चरण में दीपांशु शौकीन और ईशु मौर्य के बीच 13,527 वोटों का अंतर था। बाद में चुनाव का अंतिम नतीजा भी शौकीन के पक्ष में रहा और वह उपाध्यक्ष पद पर चुने गए।
यश डबास से दोस्ती भी चर्चा में
दीपांशु शौकीन के बारे में एक और बात चुनाव के दौरान चर्चा में रही। वह ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास के दोस्त बताए जाते हैं। दोनों अलग-अलग उम्मीदवारों के तौर पर चुनाव मैदान में थे। ऐसे में उनकी दोस्ती इस बात का उदाहरण भी बनी कि छात्र राजनीति में व्यक्तिगत रिश्ते हमेशा संगठन की चुनावी लाइन से अलग हो सकते हैं।
DUSU में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत
2026 के DUSU चुनाव में चार प्रमुख पदों के नतीजों में ABVP ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह ने जीत दर्ज की।
दीपांशु की जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने किसी बड़े छात्र संगठन के टिकट पर नहीं, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और उपाध्यक्ष पद हासिल किया।
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