राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के K-9 यूनिट के विस्फोटक डिटेक्शन डॉग डोनी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 पर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड हासिल कर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है. यह सम्मान उसे असाधारण तकनीकी योग्यता, विश्वसनीयता और परिचालन प्रदर्शन के लिए दिया गया है.
डोनी की उपलब्धियां सिर्फ एक डॉग की सफलता नहीं बल्कि एनएसजी के K-9 यूनिट की कठोर ट्रेनिंग, समर्पण और राष्ट्रीय सुरक्षा में चार पैरों वाले योद्धाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को बताती हैं. डोनी ने नवंबर 2025 में दो महत्वपूर्ण आरएसपी ऑपरेशनों में अपनी काबिलियत साबित की. 10 और 11 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले पर वीबीआईईडी ब्लास्ट साइट की सैनिटाइजेशन के दौरान उसे तैनात किया गया.
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वहां उसने विस्फोटकों की मौजूदगी की निर्णायक पुष्टि की. इसके अगले दिन 12 नवंबर 2025 को फरीदाबाद के खंडावली में एक ऐसे वाहन की जांच की, जिस पर लाल किले विस्फोट से जुड़े विस्फोटक ले जाने का संदेह था. वहां भी डोनी ने विस्फोटकों की मौजूदगी की पुष्टि कर दी. ये दोनों घटनाएं उसकी असाधारण सूंघने की क्षमता, अनुशासन और दबाव की स्थिति में शांत रहने की आदत को दर्शाती हैं.

K-9 यूनिट की ट्रेनिंग और डोनी का प्रदर्शन
एनएसजी का K-9 यूनिट देश की सबसे पेशेवर और अनुशासित कुत्तों की टीमों में से एक माना जाता है. यहां कुत्तों को विस्फोटक पदार्थों की पहचान, संदिग्ध वस्तुओं की जांच और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की सैनिटाइजेशन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. डोनी ने इस ट्रेनिंग को व्यवहार में उतारकर दिखाया कि कैसे एक कुत्ता मानव सुरक्षा बलों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है.
लाल किले जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक स्थल पर तथा फरीदाबाद में संदिग्ध वाहन की जांच के दौरान उसका प्रदर्शन न सिर्फ सटीक रहा बल्कि पूरी तरह विश्वसनीय भी साबित हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि विस्फोटक डिटेक्शन डॉग्स आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बन चुके हैं. मशीनें और स्कैनर जहां कई बार सीमित रहते हैं, वहीं कुत्तों की सूंघने की शक्ति और त्वरित प्रतिक्रिया कई बार निर्णायक साबित होती है.
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डोनी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही ट्रेनिंग, नियमित अभ्यास और हैंडलर के साथ मजबूत तालमेल से कुत्ते कितने प्रभावी हो सकते हैं. चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड मिलना उसकी इन योग्यताओं की आधिकारिक मान्यता है.

राष्ट्रीय सुरक्षा में K-9 योद्धाओं का महत्व
डोनी जैसी उपलब्धियां एनएसजी और अन्य सुरक्षा बलों में K-9 यूनिट्स के महत्व को और बढ़ाती हैं. आतंकवाद विरोधी अभियानों, वीवीआईपी सुरक्षा, विस्फोटक पदार्थों की तलाश और आपदा प्रबंधन में ये कुत्ते लगातार अहम भूमिका निभा रहे हैं. लाल किले विस्फोट स्थल जैसी घटनाओं में उनकी तैनाती न सिर्फ सबूत जुटाने में मदद करती है बल्कि आगे की जांच को सही दिशा भी देती है.
डोनी ने दोनों मौकों पर विस्फोटकों की पुष्टि करके जांच एजेंसियों के काम को आसान बनाया. यह सम्मान सिर्फ डोनी का नहीं बल्कि उसके हैंडलर, ट्रेनर और पूरे K-9 यूनिट की मेहनत का नतीजा है. कठोर प्रशिक्षण, लंबे अभ्यास सत्र और वास्तविक ऑपरेशनों में लगातार प्रदर्शन ने डोनी को इस मुकाम तक पहुंचाया.
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एनएसजी ने अपने आधिकारिक पोस्ट में उसे 'ट्रू टेस्टामेंट टू एक्सेप्शनल ट्रेनिंग, करेज एंड ऑपरेशनल रेडीनेस' बताते हुए गर्व जताया है. डोनी की कहानी आम लोगों और सुरक्षा बलों दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. यह याद दिलाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ मानव बलों तक सीमित नहीं है.
जानवरों की क्षमताओं को सही तरीके से विकसित करके उन्हें भी सुरक्षा तंत्र का शक्तिशाली हिस्सा बनाया जा सकता है. चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड पाकर डोनी ने साबित कर दिया है कि लगन, ट्रेनिंग और साहस से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है. लाल किले और फरीदाबाद में उसका प्रदर्शन राष्ट्रीय सुरक्षा में K-9 यूनिट की अपरिहार्य भूमिका दिखाता है.
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