Published: Wednesday, September 16, 2026, 19:35 [IST]
NSE का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 17 सितंबर को खुल रहा है और 21 सितंबर को बंद होगा। कंपनी ने इसके लिए प्रति शेयर ₹1,700 से ₹1,785 का प्राइस बैंड तय किया है, जिसमें 8 शेयरों का एक लॉट होगा। यह पूरा इश्यू करीब ₹22,561 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसमें से 50% हिस्सा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, 15% नॉन-इंस्टीट्यूशनल और 35% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है। ध्यान दें कि UPI मैंडेट अप्रूव करने की आखिरी समयसीमा 21 सितंबर शाम 5 बजे तक ही है। इसके शेयर 24 सितंबर को BSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है।
एंकर निवेशकों के लिए यह इश्यू आज यानी 16 सितंबर को खुल चुका है, वहीं शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर को होना तय माना जा रहा है। सभी जरूरी कन्फर्मेशन के बाद 23 सितंबर को रिफंड और डीमैट अकाउंट में शेयर ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बोली लगाने की टाइमिंग हर ब्रोकर के हिसाब से अलग हो सकती है; कई ब्रोकर शाम 4:45 बजे के करीब एप्लीकेशन में किसी भी बदलाव की इजाजत देना बंद कर देते हैं। प्रोसेसिंग में देरी या मैंडेट मिस होने से बचने के लिए ज्यादातर एक्सपर्ट्स आखिरी दिन दोपहर 3 बजे से पहले ही अप्लाई करने की सलाह देते हैं। अपनी लिक्विडिटी के लिहाज से इन डेडलाइन्स का खास ख्याल रखें।

NSE IPO: वैल्यूएशन के मामले में BSE और MCX से कैसा है मुकाबला?
| कंपनी | P/E मल्टीपल | आधार | मार्केट कैप |
|---|---|---|---|
| NSE (IPO) | ~43x | FY26 EPS, ₹1,785 | ~₹4.42 लाख करोड़ |
| BSE | ~48.8x | TTM, 11 सितंबर 2026 | ~₹1.34 लाख करोड़ |
| MCX | ~54.2x | TTM, 11 सितंबर 2026 | ~₹0.79 लाख करोड़ |
₹1,785 के भाव पर NSE का कुल वैल्यूएशन करीब ₹4.42 लाख करोड़ बैठता है, जो वित्त वर्ष 2026 (FY26) की अनुमानित कमाई के लगभग 43 गुना (43x) के बराबर है। इसकी तुलना में BSE का शेयर 48.8x ट्रेलिंग अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जबकि MCX 50-55x (mid-50s) के दायरे में है। BSE में आई हालिया तेजी के मुकाबले NSE में दिख रही यह छूट इसके बड़े स्केल और मार्जिन पर बने हालिया दबाव को दर्शाती है। हालांकि, अगर NSE का डेरिवेटिव्स कारोबार दोबारा रफ्तार पकड़ता है, तो लंबी अवधि के धैर्यवान निवेशकों के लिए यह गैप भर सकता है।
अगर आप तय कीमत पर शेयर पाना चाहते हैं और रिटेल अलॉटमेंट की लॉटरी जैसी अनिश्चितता के लिए तैयार हैं, तो आईपीओ में जरूर अप्लाई करें। लेकिन अगर आपको पैसों की लिक्विडिटी में फ्लेक्सिबिलिटी, शेयरहोल्डिंग का साफ पैटर्न और OFS के बाद स्थिर ट्रेडिंग पसंद है, तो लिस्टिंग का इंतजार करना बेहतर होगा। तीसरे दिन के सब्सक्रिप्शन और एंकर इन्वेस्टर्स के संकेतों पर नजर बनाए रखें; एक लॉट के लिए बोली लगाने वालों को शेयर प्रो-राटा के आधार पर नहीं, बल्कि प्रोबेबिलिटी (संभावना) के हिसाब से मिलते हैं। यह सुनिश्चित कर लें कि 24 सितंबर के अलॉटमेंट और लिस्टिंग साइकिल तक आपका पैसा बैंक में ब्लॉक रह सके।
NSE IPO: कैश पार्किंग और सही टाइमिंग
| ऑप्शन (इन्स्ट्रूमेंट) | 1-साल की अनुमानित दर (सितंबर 2026) |
|---|---|
| SBI फिक्स्ड डिपॉजिट | ~7.10% |
| HDFC बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट | ~7.40% |
| IDFC FIRST बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट | ~7.90% |
| टॉप स्मॉल फाइनेंस बैंक | ~9.00% तक |
अगर आपके लिए रिफंड की टाइमिंग और लिक्विडिटी अहम है, तो अप्लाई करने के दौरान अपने सरप्लस पैसे को कम अवधि वाले विकल्पों में पार्क कर सकते हैं। बड़े बैंक जहां 7–7.5% के आसपास ब्याज दे रहे हैं, वहीं कुछ चुनिंदा स्मॉल फाइनेंस बैंक 9% तक का ऑफर दे रहे हैं—हालांकि इनमें रिस्क और कवरेज अलग-अलग होता है। सुरक्षित निवेश और डाइवर्सिफाइड एक्सपोजर पसंद करने वाले निवेशक उन म्यूचुअल फंड्स का रुख कर सकते हैं, जिनके पास BSE और MCX जैसे एक्सचेंज स्टॉक्स हैं। आप कोई भी रास्ता चुनें, शाम 5 बजे से पहले UPI मैंडेट अप्रूव करना और ब्रोकर के कट-ऑफ समय का ध्यान रखना न भूलें।
Story first published: Wednesday, September 16, 2026, 19:35 [IST]
Other articles published on Sep 16, 2026