नेपाल में आई बाढ़ के बीच फंसे महाराष्ट्र के 100 तीर्थयात्रियों को बिहार सरकार ने सुरक्षित रेस्क्यू किया है। पटना से विशेष ट्रेन द्वारा उन्हें घर भेजा गया।
नेपाल में आई बाढ़ के बीच फंसे महाराष्ट्र के 100 तीर्थयात्रियों को बिहार सरकार ने सुरक्षित रेस्क्यू किया।
- Published: 29 Aug 2026, 02:05 PM IST
- Last Updated: 29 Aug 2026, 02:05 PM IST
Nepal flash floods: नेपाल में अचानक आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के बाद काठमांडू में फंसे महाराष्ट्र के लगभग 100 तीर्थयात्रियों को बिहार सरकार ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नेपाल में बिगड़े हालातों के बीच इन यात्रियों की मदद के लिए बिहार सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन ने बेहद मुस्तैदी से कार्रवाई की। सभी तीर्थयात्रियों को नेपाल सीमा से सुरक्षित निकालते हुए पहले सीतामढ़ी और फिर पटना लाया गया।
यह त्वरित कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार के विशेष अनुरोध पर की गई। मुख्यमंत्री के सीधे निर्देशों के बाद आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन ने पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की। अब सभी तीर्थयात्री सुरक्षित रूप से ट्रेन के जरिए अपने गृह राज्य महाराष्ट्र के लिए रवाना हो चुके हैं।
सीतामढ़ी सीमा पर हुआ स्वागत, प्रशासन ने की भोजन व पानी की व्यवस्था
नेपाल में बाढ़ के कारण हालात भयावह होने के बाद महाराष्ट्र के ये करीब 100 तीर्थयात्री काठमांडू में फंस गए थे, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बिहार प्रशासन से सहायता मांगी थी। इसके बाद, 28 अगस्त को सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए नेपाल सीमा से सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया।
यात्रियों को सीतामढ़ी लाने के बाद स्थानीय प्रशासन ने उनके खानपान, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का पूरा प्रबंध किया, ताकि संकट से निकले इन लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
आधी रात को पटना पहुंचे यात्री, ओपी साह भवन में ठहराने के बाद मेडिकल जांच
सीतामढ़ी से इन सभी तीर्थयात्रियों को 29 अगस्त की रात करीब 2:30 बजे राजधानी पटना लाया गया। पटना जिला प्रशासन ने उनके ठहरने के लिए ओपी साह सामुदायिक भवन में पुख्ता इंतजाम किए थे।
पटना पहुंचने पर यात्रियों को रात में भोजन और विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई गई, साथ ही उनकी एहतियातन चिकित्सीय जांच (medical check-up) भी कराई गई। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि नेपाल से निकलने के बाद बिहार की सीमा के भीतर यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े।
रेलवे से समन्वय कर ट्रेन में जुड़वाई गईं दो अतिरिक्त बोगियां
इन तीर्थयात्रियों को सकुशल महाराष्ट्र तक पहुंचाना प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए राज्य सरकार ने भारतीय रेलवे के साथ तालमेल बिठाया। मुख्य सचिव स्तर से नई दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष से संपर्क किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 'पटना-पूर्णा एक्सप्रेस' में दो अतिरिक्त बोगियां (कोच) जुड़वाई गईं। इससे सभी तीर्थयात्रियों की एक साथ और सुरक्षित घर वापसी का रास्ता साफ हो गया।
तमाम प्रशासनिक औपचारिकताएं और व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद, 29 अगस्त की सुबह करीब 7:30 बजे इन यात्रियों को ट्रेन से महाराष्ट्र के लिए रवाना कर दिया गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन विभाग और रेलवे के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला।
तीर्थयात्रियों ने बिहार सरकार और प्रशासन की कार्यशैली की सराहना की
अपने गृह राज्य के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी का मार्ग तैयार होने के बाद, महाराष्ट्र से आए इन तीर्थयात्रियों ने बिहार सरकार का दिल से आभार जताया।
यात्रियों ने सीतामढ़ी और पटना जिला प्रशासन की तत्परता, संवेदनशीलता और उनके द्वारा की गई मेहमाननवाजी की भूरी-भूरी प्रशंसा की। आपदा की इस घड़ी में दिखाए गए मानवीय दृष्टिकोण ने यह साबित कर दिया कि किस तरह प्रशासनिक सहयोग से एक बड़े संकट को टाला जा सकता है।