Aug 15, 2026 03:13 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
कोर्ट ने एनटीए को नीट यूजी 2026 परीक्षा के एक अभ्यर्थी की ऑरिजनल ओएमआर शीट और स्कोर कार्ड दोनों सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है। अभ्यर्थी ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उसके मार्क्स 520 से घटाकर 85 कर दिए गए।

कोर्ट में नीट छात्रा (AI निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर)
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एनटीए को मार्क्स में गड़बड़ी के मामले में नीट यूजी 2026 परीक्षा के एक अभ्यर्थी की ऑरिजनल ओएमआर शीट और स्कोर कार्ड दोनों सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठे अभ्यर्थी ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उसके मार्क्स 520 से घटाकर 85 कर दिए गए। गुरदासपुर की 19 वर्षीय दीक्षा देवी ने वकील बिक्रमजीत सिंह बाजवा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए एनटीए और केंद्र सरकार को ऑरिजनल डॉक्यूमेंट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को तय की गई थी।
अंक 520 से गिरकर 85 कैसे हो गए
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक याचिका के मुताबिक देवी ने 21 जून को री नीट एग्जाम दिया था। NTA ने 13 जुलाई को उसकी ओएमआर शीट वेबसाइट पर अपलोड की। दीक्षा ने इसे डाउनलोड कर अपने उत्तरों का मिलान किया और दावा किया कि उसके 520 अंक बन रहे थे। हालांकि जब 16 जुलाई को नीट यूजी का रिजल्ट आया तो उसके अंक 720 में से सिर्फ 85 आए। इसके बाद 17 जुलाई को उसे NTA की ओर से एक दूसरी OMR शीट मिली। याचिका में दावा किया गया कि दूसरी शीट में पहले वाली OMR शीट के मुकाबले उत्तर पूरी तरह अलग थे, जबकि बाकी डिटेल्स समान थी। इसके कारण उसका नाम मेरिट यूजी क्वालिफाइड कैंडिडेट की लिस्ट से बाहर हो गया। वो फेल हो गई।
जवाब पहले डाउनलोड की गई OMR शीट से पूरी तरह से अलग
याचिका के मुताबिक दूसरी ओएमआर शीट में मार्क किए गए जवाब पहले डाउनलोड की गई OMR शीट से पूरी तरह से अलग थे, जबकि सब कुछ पहली OMR शीट जैसा ही था और सिर्फ मार्क किए गए जवाब बदल दिए गए थे। छात्रा ने दावा किया कि शिकायत करने के बाद NTA की तरफ से 19 जुलाई को आए एक ईमेल में उसके रिजल्ट में 720 में से 520 मार्क्स बताए गए थे, जबकि मार्कशीट पर भी वही क्रेडेंशियल थे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि NTA ने गैर-कानूनी तरीके से और मनमाने ढंग से और झूठी OMR शीट के आधार पर उसे पहले के रिजल्ट के बावजूद अयोग्य घोषित कर दिया था और 520 मार्क्स के आधार पर उसकी उम्मीदवारी पर विचार करने और उसे प्रोविजनल तौर पर काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति देने के निर्देश मांगे थे।
बैक डोर चैनल का आरोप
याचिका में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक्शन लेने और इस बात की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन की भी मांग की गई है कि एक ही कैंडिडेट की दो OMR शीट जिन पर अलग-अलग जवाब लिखे थे, कैसे मिल गईं, और आरोप लगाया गया है कि इसमें एक बैक डोर चैनल है, जिसके स्टूडेंट्स पर गंभीर असर हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान NTA के एडवोकेट अरुण गोसाईं ने बताया कि 27 जुलाई, 2026 के एक ईमेल की कॉपी पिटीशनर के वकील को दी गई थी। मामले की सुनवाई के बाद बेंच ने निर्देश दिया कि छात्रा की ओरिजिनल OMR शीट और स्कोर कार्ड एक सीलबंद लिफाफे में इस कोर्ट के सामने पेश किए जाएं।
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Pankaj Vijay
पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
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