July 24, 2026

NEET: एक MBBS सीट के 8 दावेदार, किस राज्य में कितनी सीटें, समझें MCC सेंट्रल व स्टेट काउंसलिंग क्राइटेरिया

NEET UG MBB Seats : इस वर्ष नीट यूजी परीक्षा करीब 11.21 लाख विद्यार्थियों ने पास की है। इनके लिए देश में एमबीबीएस की महज 136939 सीटें हैं। यानी एक सीट के करीब 8 दावेदार हैं।

NEET UG MBB Seats 2026 : नीट यूजी रिजल्ट घोषित होने के बाद अब देश के लाखों विद्यार्थियों को मेडिकल दाखिले के लिए ऑल इंडिया कोटा एमसीसी काउंसलिंग और स्टेट काउंसलिंग के शुरू होने का इंतजार है। इस वर्ष नीट यूजी परीक्षा करीब 11.21 लाख विद्यार्थियों ने पास की है। इनके लिए देश में एमबीबीएस की महज 136939 सीटें हैं। यानी एक सीट के करीब 8 दावेदार हैं। नए मेडिकल कॉलेजों के खुलने और मौजूदा कॉलेजों में सीट बढ़ने से वर्ष 2026-27 के शिक्षण सत्र के लिए देश में एमबीबीएस की 9911 नई सीटें बढ़ी हैं। 25 नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं। बढ़ाई गई सीटों में 2111 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 7800 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में जोड़ी गई हैं। कुल मिलाकर अब देश में 823 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई होगी, जिनमें 441 सरकारी और 382 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। आयोग ने मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया कि वे केवल उतनी ही सीट पर दाखिला लें जितने की मंजूरी प्राप्त है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 2,111 सीटें बढ़ी हैं और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में कुल 7,800 सीटें बढ़ी हैं। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए पूरे भारत में कुल मिलाकर 9,911 MBBS सीटों की वृद्धि हुई है। इनमें 25 नए स्थापित मेडिकल कॉलेजों की 2,400 सीटें भी शामिल हैं (सरकारी में 400 सीटें और प्राइवेट में 2,000 सीटें)।

किस राज्य में MBBS की कितनी प्राइवेट और सरकारी सीटें, राज्यवार ब्योरा ( Statewise MBBS Seats )

शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी एमबीबीएस (MBBS) की राज्यवार सरकारी और प्राइवेट सीटों का पूरा ब्योरा

| क्रमांक | राज्य | सरकारी सीटें | प्राइवेट सीटें | कुल सीटें |

| 1 | अंडमान और निकोबार | 114 | 0 | 114 |

| 2 | आंध्र प्रदेश | 3,515 | 3,950 | 7,465 |

| 3 | अरुणाचल प्रदेश | 100 | 0 | 100 |

| 4 | असम | 1,875 | 0 | 1,875 |

| 5 | बिहार | 1,710 | 2,450 | 4,160 |

| 6 | चंडीगढ़ | 200 | 0 | 200 |

| 7 | छत्तीसगढ़ | 1,725 | 1,200 | 2,925 |

| 8 | दादरा और नगर हवेली | 177 | 0 | 177 |

| 9 | दिल्ली | 1,165 | 250 | 1,415 |

| 10 | गोवा | 250 | 0 | 250 |

| 11 | गुजरात | 4,250 | 3,500 | 7,750 |

| 12 | हरियाणा | 1,060 | 1,900 | 2,960 |

| 13 | हिमाचल प्रदेश | 721 | 150 | 871 |

| 14 | जम्मू और कश्मीर | 1,525 | 150 | 1,675 |

| 15 | झारखंड | 800 | 700 | 1,500 |

| 16 | कर्नाटक | 4,400 | 10,995 | 15,395 |

| 17 | केरल | 1,855 | 3,849 | 5,704 |

| 18 | मध्य प्रदेश | 3,020 | 3,000 | 6,020 |

| 19 | महाराष्ट्र | 6,000 | 7,099 | 13,099 |

| 20 | मणिपुर | 400 | 150 | 550 |

| 21 | मेघालय | 100 | 150 | 250 |

| 22 | मिजोरम | 100 | 0 | 100 |

| 23 | नागालैंड | 100 | 0 | 100 |

| 24 | ओडिशा | 1,850 | 1,100 | 2,950 |

| 25 | पुडुचेरी | 180 | 1,600 | 1,780 |

| 26 | पंजाब | 900 | 950 | 1,850 |

| 27 | राजस्थान | 4,480 | 3,600 | 8,080 |

| 28 | सिक्किम | 100 | 100 | 200 |

| 29 | तमिलनाडु | 5,349 | 8,650 | 13,999 |

| 30 | तेलंगाना | 4,400 | 5,850 | 10,250 |

| 31 | त्रिपुरा | 200 | 300 | 500 |

| 32 | उत्तर प्रदेश | 5,700 | 8,300 | 14,000 |

| 33 | उत्तराखंड | 625 | 850 | 1,475 |

| 34 | पश्चिम बंगाल | 4,350 | 2,850 | 7,200 |

जल्द ही एनटीए (NTA) द्वारा छात्रों का रिजल्ट एमसीसी और विभिन्न स्टेट काउंसलिंग अथॉरिटीज के साथ शेयर किया जाएगा। इसके बाद, एमसीसी और स्टेट काउंसलिंग अपने सॉफ्टवेयर और वेबसाइट्स को छात्रों के स्कोरकार्ड और रैंक के साथ अपडेट करते हैं ताकि कॉलेज अलॉटमेंट सही से हो सके।

कैसे होगा एमबीबीएस में दाखिला, समझें पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया

देश के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस दाखिले के समय दो समानांतर प्रणालियां राष्ट्रीय और राज्य कोटा काम करती हैं। परीक्षा के उलट, काउंसलिंग की कोई एक प्रक्रिया नहीं होती है। एडमिशन अलग-अलग नेशनल और स्टेट-लेवल सिस्टम के जरिए होते हैं, और अलग-अलग अथॉरिटीज सीटों की अलग-अलग कैटेगरीज को संभालती हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ (DGHS) के अधीन काम करने वाली मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC), सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 प्रतिशत 'ऑल इंडिया कोटा' सीटों के लिए काउंसलिंग कराती है। यह सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (AIIMS), जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER), डीम्ड यूनिवर्सिटीज़, एम्प्लॉईज़ स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ESIC) के संस्थानों और आर्म्ड फोर्सेज़ मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे में 100 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया भी संभालती है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बाकी बची 85 प्रतिशत 'स्टेट कोटा' सीटों को संबंधित राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटीज भरती हैं। ये अथॉरिटीज अपने-अपने राज्यों के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भी एडमिशन की प्रक्रिया कराती हैं। नतीजतन, जो उम्मीदवार 'ऑल इंडिया कोटा' और 'स्टेट कोटा' दोनों तरह की सीटों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें आमतौर पर MCC पोर्टल के साथ-साथ अपने संबंधित राज्य के काउंसलिंग पोर्टल पर भी अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है।

कौन ले सकेगा नीट काउंसलिंग में हिस्सा

उम्मीदवारों को अपनी कैटगरी के लिए निर्धारित न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल प्राप्त करके नीट यूजी पास करना अनिवार्य है। आमतौर पर जनरल और ईडब्ल्यूएस के उम्मीदवारों के लिए 50वां परसेंटाइल और एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए 40वां परसेंटाइल होता है।

किस तरह काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होगी

1. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित करती है। यह केंद्रीय विश्वविद्यालयों, एम्स, जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, डीम्ड विश्वविद्यालयों आदि की 100 प्रतिशत सीटों पर दाखिले संभालती है।

2. सरकारी मेडिकल कॉलेजों की शेष 85 प्रतिशत राज्य कोटा सीटें राज्य काउंसलिंग अधिकारियों द्वारा भरी जाती हैं। ये अधिकारी अपने संबंधित राज्यों के तहत आने वाले निजी (प्राइवेट) मेडिकल कॉलेजों के लिए भी दाखिले आयोजित करते हैं। यानी जो उम्मीदवार ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा दोनों सीटों के लिए प्रयास कर रहे हैं।

कितने चरण होते हैं

पहला चरण : सभी पात्र पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए खुला है। पंजीकरण और काउंसलिंग शुल्क के भुगतान के बाद, उम्मीदवार अपने पसंदीदा कॉलेजों और पाठ्यक्रमों को भरते हैं और लॉक करते हैं। सीट आवंटन नीट रैंक, आरक्षण श्रेणी और सबमिट किए गए विकल्पों के क्रम पर आधारित होता है।

दूसरा चरण : इसमें जो उम्मीदवार राउंड 1 में शामिल नहीं हुए थे या जिन्होंने फ्री एग्जिट विकल्प का उपयोग किया था, वे राउंड 2 के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।

तीसरा चरण : मॉप-अप राउंड है, जो मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों के लिए होता है जिन्हें पहले दो दौर के बाद भी सीट नहीं मिली है।

चौथा चरण : यह चरण खाली रह गई सीटों को भरने के लिए होता है। डीम्ड यूनिवर्सिटी की सीटें चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए कोई नया पंजीकरण नहीं होता है। सीट आवंटन पंजीकृत उम्मीदवारों के मौजूदा पूल से ही किया जाता है।

प्रवेश के लिए ये जरूरी

नीट-यूजी एडमिट कार्ड, रैंक लेटर, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी का अंतिम आवंटन पत्र, कक्षा 10वीं और 12वीं की मार्कशीट और सर्टिफिकेट, फोटो पहचान पत्र, श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), चार से पांच पासपोर्ट आकार के फोटोग्राफ

विकल्प भरना अहम हिस्सा

काउंसलिंग में विकल्प भरना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। सीट मैट्रिक्स जारी होने के बाद उम्मीदवार जितने चाहें उतने कॉलेजों और पाठ्यक्रमों की सूची बना सकते हैं, जिन्हें वे चुनने के इच्छुक हैं। प्राथमिकताओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।