September 27, 2026

न डॉक्टर बन पाया, न खिलाड़ी: पहली NEET में 350 नंबर, री-एग्जाम में 178 आए; तैयारी में खेल की प्रैक्टिस भी छोड़ी - Madhya Pradesh News

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जब 23 साल का वरुण सोलंकी यह बात कहता है, तो उसकी आवाज में बेबसी और सिस्टम के लिए तल्खी साफ झलकती है। देवास का रहने वाला वरुण इंटरनेशनल सॉफ्टबॉल खिलाड़ी है। 2022 में उसने जापान में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

आज वह ऐसे मोड़ पर है, जहां उसका खेल करियर भी छूट गया और डॉक्टर बनने का सपना भी अधूरा रह गया। पढ़िए, रिपोर्ट…

पापा कंपाउंडर थे, इसलिए मां चाहती थीं बेटा डॉक्टर बने

वरुण ने 10 साल की उम्र में सॉफ्टबॉल खेलना शुरू किया था। उसने बताया, "मेरे पापा कंपाउंडर रहे हैं और मां सरकारी टीचर थीं। मां चाहती थीं कि मैं डॉक्टर बनूं। दसवीं क्लास में पहुंचने पर उन्होंने कहा कि आगे खेलने की अनुमति तभी मिलेगी, जब बोर्ड में अच्छे नंबर आएंगे। मैंने 86% अंक हासिल किए।"

इसके बाद मां ने उसका एडमिशन इंदौर के एक कोचिंग संस्थान में करा दिया। वरुण भी डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने की तैयारी में जुट गया।

मां की मौत के बाद खेल छोड़कर NEET की तैयारी शुरू की

कोरोना महामारी के दौरान वरुण की मां का निधन हो गया। कई दिन के इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। मां की इच्छा पूरी करने के लिए वरुण ने सॉफ्टबॉल छोड़कर NEET की तैयारी शुरू कर दी।

उसके पास आज भी वह तस्वीर है, जिसमें वह भारत की जर्सी में अपने साथियों के साथ खड़ा है।

वरुण की मां का कोरोना में निधन हो गया। वे चाहती थीं कि बेटा डॉक्टर बने।

वरुण की मां का कोरोना में निधन हो गया। वे चाहती थीं कि बेटा डॉक्टर बने।

4 साल की NEET तैयारी के बाद री-एग्जाम से बदला पूरा नतीजा

वरुण चार साल से NEET की तैयारी कर रहा था और चार बार परीक्षा दे चुका था। इस साल उसे 350 अंक मिलने और 'मेधावी छात्र योजना' के जरिए इंदौर के मेडिकल कॉलेज में MBBS दाखिले की उम्मीद थी।

पेपर लीक की खबरों के बाद NEET दोबारा कराने का फैसला हुआ। री-एग्जाम में उसके अंक 350 से घटकर 178 रह गए, यानी 172 अंक कम हो गए। इसके साथ मेडिकल कॉलेज में दाखिले की उसकी उम्मीद भी टूट गई।

वरुण कहता है, "चार साल से NEET की तैयारी कर रहा हूं। खेल भी छोड़ दिया। अब न डॉक्टर बन पा रहा हूं और न अपने खेल में वापस लौट पा रहा हूं।"

बड़े भाई का अनुभव देख छोटे भाई ने बदला करियर का रास्ता

वरुण का अनुभव उसके छोटे भाई प्रणव के करियर फैसले पर भी असर डाल रहा है। 11वीं में पढ़ रहा प्रणव मेडिकल के बजाय कॉमर्स स्ट्रीम में चला गया। उसने कहा- भैया ने इतने साल इस परीक्षा की तैयारी की। मैंने देखा कि इतनी मेहनत के बाद भी उनके साथ क्या हुआ। इस रास्ते में अनिश्चितता बहुत ज्यादा है।

'छात्रों की गूंज' में सामने आई वरुण की कहानी

वरुण की कहानी इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान सामने आई। दैनिक भास्कर की टीम ने उसके इंटरनेशनल सॉफ्टबॉल खिलाड़ी होने, 2022 में जापान में भारत का प्रतिनिधित्व करने, NEET परीक्षा और मां के निधन से जुड़े दावों का अलग-अलग स्तर पर सत्यापन किया।

सरकारी और खेल रिकॉर्ड के मुताबिक, वरुण ने 2022 में जापान में भारत के लिए सॉफ्टबॉल खेला और टीम ने कांस्य पदक जीता। आज वह मां को खो चुका है, खेल छोड़ चुका है और डॉक्टर बनने का सपना भी पूरा नहीं कर पाया है।

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