बीते 30 दिनों में बिहार की राजनीति में 4 ऐसे काम हुए, जिससे अंदरखाने चर्चा है कि BJP-JDU के अंदरखाने कुछ पक रहा है। नीतीश कुमार की JDU कहीं एकला चलो की राह पर तो नहीं। वह सम्राट चौधरी को हटाने की रणनीति की तरफ तो नहीं बढ़ रही है।
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इन संकेतों को डिकोड करेंगे आज के बूझे की नाही में…।
JDU के 4 काम, जिससे अटकलें तेज
1. बांग्लादेश गंगा जल संधि पर JDU आक्रामक, 12 जिलों में नीतीश संवाद
केंद्र की मोदी सरकार में हिस्सेदार जनता दल यूनाइटेड (JDU) इन दिनों बांग्लादेश के साथ हुई गंगा जल संधि को लेकर आक्रामक है। पार्टी का साफ कहना है कि अगली जल संधि में बिहार की हितों का ध्यान रखा जाए।
इस संधि के विरोध में JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने 5 सितंबर से नीतीश संवाद कार्यक्रम शुरू किया है। संजय झा खुद 12 जिलों में घूम रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा लोगों को बता रहे हैं कि गंगा जल संधि बिहार के हित में नहीं है। हमारी पार्टी किसी भी हालत में बिहार के हितों से समझौता नहीं करेगी।
संजय झा का यह नीतीश संवाद कार्यक्रम 12 जिलों बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में होगा।
8 सितंबर को संजय झा ने बेगूसराय में नीतीश संवाद कार्यक्रम के दौरान कहा- ‘सत्ता रहे या ना रहे, बिहार के हित की बात हम नहीं छोड़ेंगे। नीतीश कुमार ने हमेशा बिहार और बिहारियों की हित की बातें कही है।’
- संजय झा के इस बयान के मायने गहरे हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘दरअसल, गंगा जल संधि के रूप में JDU को एक ऐसा मुद्दा मिल गया है, जिससे वह घर-घर तक पहुंच सकती है। उसे हार और जीत दोनों में फायदा दिख रहा है।’
- ‘वह यह जानती है कि मामला केंद्र सरकार का है। उसके हाथ में कुछ नहीं है, फिर भी सुनियोजित तरीके से धीरे-धीरे अपने पक्ष में माहौल बना रही है।’
- प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘नीतीश संवाद कार्यक्रम की रूपरेखा को देखें तो साफ है कि पार्टी इसे बिहार का मुद्दा बनाकर लोगों के अंदर अपने लिए सिंपैथी जगा रही है। साथ ही लोगों को मैसेज दे रही है कि बिहार की हितों की लड़ाई सिर्फ JDU ही लड़ सकती है। चूंकि केंद्र में सत्ता में होने कारण भाजपा उतने मुखर तरीके से इस मामले पर कुछ नहीं बोल सकती।’

JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा इन दिनों अलग-अलग जिलों में नीतीश संवाद कार्यक्रम कर रहे हैं। जिसमें वह बांग्लादेश गंगा जल संधि को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे।
बांग्लादेश जल संधि पर JDU की 4 डिमांड
- फरक्का जलसंधि के मुताबिक, लीन पीरियड (1 जनवरी से 31 मई तक) में 1500 क्यूमेक पानी छोड़ना पड़ता है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति बनती है। लीन पीरियड में 1500 क्यूमेक पानी छोड़ने की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए।
- इस पानी का इस्तेमाल बिहार में औद्योगिक विकास, पेयजल और सिंचाई जैसी जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।
- फरक्का बराज के कारण सिल्ट जमा होने से गंगा उथली हो गई है। इससे गंगा बेसिन के इलाकों में बाढ़-कटाव की स्थिति गंभीर हो गई है। फरक्का के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल साथ आएं।
- यदि भविष्य में नई संधि होती है तो उसमें बिहार की 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

2. बिहार विधान परिषद के सभापति की कुर्सी पर ठोका दावा
अंदरखाने चर्चा है कि JDU ने भाजपा से बिहार विधान परिषद की सभापति का पद अपने खाते में मांगा है। अभी वह पद BJP के पास है। BJP के MLC अवधेश नारायण सिंह सभापति हैं।
बताया जा रहा है कि JDU ने सभापति पद पर दावा ठोकते हुए तर्क दिया है कि विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति, दोनों संवैधानिक पद BJP के पास है। इसलिए इसमें से एक पद हमें चाहिए।
- अंदरखाने चर्चा है कि JDU की अचानक आई इस डिमांड के पीछे उसकी बदली हुई रणनीति हो सकती है। क्योंकि बीते दो साल से ज्यादा समय से दोनों पोस्ट पर BJP का ही कब्जा रहा है। इन दो सालों में JDU ने बराबर-बराबर की हिस्सेदारी की डिमांड नहीं की थी।
- बताया जा रहा है कि अबकी बार JDU ने पुरजोर तरीके से सभापति का पद मांगा है। यही कारण है कि हाल अगस्त के आखिरी सप्ताह में विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह दिल्ली गए और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
3. निशांत कुमार की ब्रांडिंग में जुटी JDU, बिहार का भविष्य बताया
22 अगस्त को JDU ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के मंत्री के तौर पर 100 दिन पूरा होने पर जश्न मनाया। पटना स्थित पार्टी कार्यालय में केक काटा गया और JDU नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निशांत के 100 दिन के कामकाज की रिपोर्ट दी।
पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो जारी कर लोगों को काम गिनाया गया। दरअसल, यह पहला मौका था जब किसी मंत्री के कामकाज का 100 दिन पूरा होने पर अलग से भव्य कार्यक्रम किया गया था।
जबकि, सम्राट सरकार में शामिल किसी भी मंत्री ने अपना रिपोर्ट कार्ड नहीं सौंपा। इस कार्यक्रम में नेताओं ने निशांत कुमार JDU का भविष्य बताया। माने इशारों-इशारों में अगला मुख्यमंत्री पेश करने की कोशिश की गई।
- 8 सितंबर को बेगूसराय में संजय झा ने कहा, ‘नीतीश कुमार जब गद्दी छोड़ रहे थे तो लोगों ने पार्टी के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई। पार्टी का क्या होगा। पूछा गया। आपको बता देते हैं- पार्टी तो खूंटा ठोकर बैठी है। JDU के बिना कोई पार्टी बिहार में राजनीति नहीं कर सकती है। नीतीश कुमार का नाम और काम इतना बड़ा है कि 100 साल तक लोग याद रखेंगे।’
- संजय झा ने आगे कहा, ‘पार्टी के आगे का भविष्य तय हो चुका है। निशांत कुमार अभी सरकार में मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। आगे संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। बिहार भर में घूमेंगे। आगे अभी बहुत कुछ होगा। इसलिए निश्चिंत रहिए।’
- संजय झा ने कहा, ‘नीतीश कुमार के चेहरे के नाम पर ही हम जीतकर आए हैं। अभी जो सरकार चल रही है, वो भी नीतीश कुमार के नाम पर ही मिली हुई मैंडेट की है।’

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के पीछे पूरी JDU खड़ी है। पार्टी निशांत को लेकर धीरे-धीरे ब्रॉंडिंग कर रही है।
4. पहले सम्राट को नीतीश का उत्तराधिकारी बताया, फिर पलटी JDU
सम्राट सरकार बनने के करीब 4 महीने बाद JDU के स्टैंड में बड़ा बदलाव आया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार के असली उत्तराधिकारी निशांत कुमार ही हैं।
- 22 अगस्त को मंत्री मदन सहनी ने कहा था,'नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को संभालने की क्षमता उनके पुत्र निशांत कुमार में है और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, विजय चौधरी समेत सभी सीनियर नेता इस रुख पर स्पष्ट हैं। JDU को किसी बाहरी दल के नेता की जरूरत नहीं है।'
- 24 अगस्त को बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, 'निशांत कुमार ही JDU का भविष्य हैं और पार्टी की विरासत संभालने के लिए अंदरूनी नेतृत्व ही सक्षम है।'
- 24 अगस्त को मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी ने कहा, 'अब नीतीश कुमार की विरासत को निशांत कुमार ही संभालेंगे।'
जबकि, इससे पहले 16 मई को केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा था, 'जब नीतीश कुमार ने कमान छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने खुद तय किया कि सम्राट चौधरी उनके उत्तराधिकारी होंगे। वह सिर्फ भाजपा की पसंद नहीं थे, बल्कि उन्हें खुद नीतीश कुमार ने आशीर्वाद दिया था।'
अंदरखाने खटपट है, तभी पहली बार सम्राट बोले…
‘हम नीतीश नहीं, अपनी पार्टी की मर्जी से CM हैं’
8 सितंबर को न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘नीतीश कुमार के संबंध NDA से हैं। BJP का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही तय करता है। नीतीश कुमार NDA के सम्मानित नेता हैं, लेकिन BJP का नेता कौन होगा, यह पार्टी का आंतरिक मामला है।'
सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार या सहयोगी दलों के कहने पर उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात को भी सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का विशेष आशीर्वाद उन पर पहले भी रहा है और अब भी है।