12:51 PM, 11-Oct-2026
दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर होंगे विशेष अनुष्ठान
नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी और नौवें दिन महानवमी का विशेष महत्व होता है। इन दिनों कई घरों में कन्या पूजन किया जाता है। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही श्रद्धा के अनुसार उपहार और दक्षिणा दी जाती है। महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन हवन और कन्या पूजन के साथ अपने नवरात्रि व्रत का समापन करते हैं। हालांकि, अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और व्रत पारण की परंपरा परिवार की मान्यता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
12:35 PM, 11-Oct-2026
नवरात्रि पर क्या करें और क्या नहीं
नवरात्रि पर देवी दुर्गा की पूजा-उपासना करने का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस दिन किसी से वाद-विवाद करने करने से बचें, झूठ न बोलें, गुस्सा करने से बचें, भूलकर किसी महिला या फिर गरीब का अपमान ना करें. स्त्रियों का सम्मान करें। देवी दुर्गा की पूजा-आराधना करते समय ब्रह्राचर्य के नियमों का पालन करें।
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12:22 PM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के पाठ का महत्व
शारदीय नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पाठ से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति की अनुभूति होती है। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना करते समय दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और देवी मंत्रों का पाठ किया जा सकता है। इस प्रकार, शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करके भक्त मां दुर्गा से सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
11:56 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम
- पाठ शुरू करने से पहले मां दुर्गा का स्मरण करें और श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
- दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को लाल कपड़े से ढकी स्वच्छ चौकी पर रखें।
- पाठ करते समय लाल कपड़े या कुश के आसन पर बैठें।
- मंत्रों और श्लोकों का उच्चारण स्पष्टता और एकाग्रता के साथ करें।
- यदि पाठ के बीच में रुकना पड़े, तो संभव हो तो अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लें।
- प्रतिदिन पाठ पूरा होने पर मां दुर्गा से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें और पाठ उन्हें समर्पित करें।
- पाठ के दौरान मन को शांत रखें और दूसरों के प्रति द्वेष या नकारात्मक भावनाओं से बचने का प्रयास करें।
- पाठ करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखें।
11:42 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने के नियम
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से पहले नौ दिनों तक दीपक प्रज्ज्वलित रखने का संकल्प लिया जाता है। इसके लिए पीतल या मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल कर सकते हैं। दीपक को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी या पाटे पर स्थापित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अखंड ज्योति के लिए गाय के शुद्ध घी का उपयोग करना शुभ माना जाता है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो अपनी परंपरा के अनुसार तिल या सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं।
11:16 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि व्रत के महत्वपूर्ण नियम
- सात्विक भोजन करें और फलाहार व सेंधा नमक का सेवन करें।
- प्याज, लहसुन, मांसाहार और मदिरा से परहेज करें।
- क्रोध, असत्य बोलने और दूसरों की निंदा करने से बचें।
- ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम का पालन करें।
- अपनी ऊर्जा को पूजा-पाठ और मां दुर्गा की भक्ति में लगाएं।
- प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की आरती करें।
- मां दुर्गा के मंत्रों का जाप और ध्यान करें।
- घर और पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखें।
- व्रत के दौरान अपनी सेहत और शरीर की जरूरतों का ध्यान रखें।
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11:01 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में भोजन और व्रत के नियम
- सात्विक भोजन करें और अपनी परंपरा के अनुसार अनाज से परहेज करें।
- फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक का सेवन करें।
- दिनभर फलाहार करें और व्रत के नियमों के अनुसार भोजन करें।
- निर्जल उपवास रखने से बचें, खासकर जब स्वास्थ्य इसकी अनुमति न देता हो।
- मांसाहार, शराब और अन्य मादक पदार्थों से दूर रहें।
- धार्मिक परंपरा के अनुसार प्याज और लहसुन का सेवन न करें।
- क्रोध, आलस्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम के नियमों का पालन करें।
- घर और पूजा स्थल में स्वच्छता व सात्विक वातावरण बनाए रखें।
- व्रत के दौरान पर्याप्त पानी पिएं और सेहत का ध्यान रखें।
10:45 AM, 11-Oct-2026
नौ दिन में कई शुभ योग
नवरात्र के दौरान चार से पांच दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और दो दिन अमृत सिद्धि योग बनने का संयोग है। इसके अलावा महाष्टमी और महानवमी पर भी विशेष योग रहेंगे। शुभ मुहूर्त में भूमि, भवन और वाहन की खरीदारी के साथ गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इस बार शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जाता है। हाथी को सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। नवरात्र के पहले दिन मंदिरों में घट स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होगी।
10:25 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि नौ दिन की पूजा के मंत्र
- मां शैलपुत्री का मंत्र- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
- मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
- मां चन्द्रघण्टा का मंत्र- ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः
- देवी कूष्माण्डा का मंत्र - ॐ कूष्माण्डायै नमः
- देवी स्कंदमाता का मंत्र - ॐ स्कन्दमात्राय नमः
- देवी कात्यायनी का मंत्र - ॐ कात्यायनै नमः
- देवी कालरात्रि का मंत्र - ॐ कालरात्र्यै नमः
- देवी महागौरी का मंत्र - ॐ महागौर्यै नमः
- देवी सिद्धिदात्री का मंत्र- ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
10:15 AM, 11-Oct-2026
घर पर ऐसे करें कलश स्थापना
- कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें।
- इसके बाद वहां मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- अब जिस स्थान पर जौ बोने हैं, वहां साफ मिट्टी से एक छोटा पात्र तैयार करें।
- इसमें जौ के बीज डालकर ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें।
- इसके बाद कलश तैयार करें।
- कलश के बाहर मौली बांधें और उस पर रोली से तिलक लगाएं।
- अब कलश में स्वच्छ जल और थोड़ा गंगाजल डालें।
- इसमें सुपारी और सिक्का भी रखा जा सकता है।
- इसके बाद कलश के मुंह पर आम या अशोक के पत्ते रखें।
- ऊपर जटा वाला नारियल स्थापित करें।
- नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलश पर रखा जाता है।
- कलश और जौ की स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा करें।
- नवरात्रि के दौरान जौ में नियमित रूप से आवश्यकता के अनुसार पानी का छिड़काव करते रहें।