
Wed, 19 Aug 2026 11:08 AM IST
सार
NASA SpaceX rocket moon crash:
अंतरिक्ष से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा की सतह पर स्पेसएक्स के फाल्कन रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की अब तक की सबसे स्पष्ट पहले और बाद की तस्वीरें भेजी है। 5,400 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हुई इस टक्कर ने चांद पर एक नया निशान छोड़ दिया है। आखिर यह गड्ढा कितना बड़ा है और नासा के कैमरों ने चांद की गहराई से क्या रहस्य बाहर निकाले हैं? जानिए इस रिपोर्ट में।

विस्तार
SpaceX rocket moon crater:
नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने स्पेस एक्स के फाल्कन रॉकेट के ऊपरी हिस्से के चंद्रमा से टकराने वाली जगह की अब तक की सबसे साफ तस्वीरें भेजी है। नासा ने मंगलवार को इस जगह की पहले और बाद की तस्वीरें जारी की। जिनमें रॉकेट के टकराने से बनी नई सतह साफ दिखाई दे रही है। यह फाल्कन रॉकेट का ऊपरी हिस्सा था, जो एक साल से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में घूमने के बाद पांच अगस्त 2026 को करीब 5,400 मील प्रति घंटे यानी 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा से टकराया। यह टक्कर जानबूझकर नहीं कराई गई थी।
चांद पर कितना बड़ा बना गड्ढा?
- नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर से ली गई नई तस्वीरों के अनुसार, रॉकेट के टकराने से बना नया गड्ढा करीब 60 फीट यानी 18 मीटर चौड़ा है और इसकी गहराई दस फीट यानी करीब तीन मीटर से कम है।
- गड्ढे के आसपास गहरे और चमकीले निशान भी दिखाई दे रहे हैं। ये निशान देखने में तितली के पंखों जैसे लगते हैं, जिससे टक्कर के बाद चंद्र सतह से बाहर निकले पदार्थ का फैलाव साफ नजर आता है।

तस्वीरों में क्यों दिख रही हैं गहरी और चमकीली धारियां?
- नई तस्वीरों की सबसे खास चीज गड्ढे से बाहर की ओर निकलने वाली धारियां हैं। इनमें गहरे रंग की धारियां सतह के पास मौजूद पुरानी सामग्री को दिखाती हैं, जो लंबे समय से सौर हवाओं, कॉस्मिक किरणों और छोटे उल्कापिंडों की टक्करों के संपर्क में रही थी।
- इसके उलट चमकीली धारियां चंद्रमा की ज्यादा गहराई से बाहर निकली ताजा चट्टानों और मिट्टी का संकेत देती हैं। इस तरह एक छोटा सा गड्ढा वैज्ञानिकों को चंद्र सतह के नीचे की सामग्री के बारे में भी जानकारी दे सकता है।
कब की हैं ये तस्वीरे?
- एलआरओ ने रॉकेट के टकराने के करीब एक हफ्ते बाद इस जगह की फोटो ली हैं। उस वक्त स्पेसक्राफ्ट चंद्र सतह से करीब 60 मील यानी 96 किलोमीटर ऊपर था और लगभग एक मील प्रति सेकंड की गति से चंद्रमा के चारों ओर घूम रहा था।
- टक्कर वाली जगह का कैमरे के फ्रेम में आना इतना आसान नहीं था। फ्लाइट कंट्रोलर्स को LRO का कोण बदलना पड़ा, ताकि उसके कैमरे सही दिशा में मुड़कर उस स्थान की तस्वीर ले सकें।
टक्कर वाली जगह दिखने में छह दिन क्यों लगे?
LRO चंद्रमा की पोलर ऑर्बिट में चक्कर लगाता है। वह करीब हर दो घंटे में चंद्रमा के चारों ओर एक चक्कर पूरा करता है, लेकिन चंद्रमा की अपनी स्थिति और रोशनी की परिस्थितियों के कारण टक्कर वाली जगह तुरंत कैमरे के लिए उपयुक्त स्थिति में नहीं आई। रिपोर्ट के अनुसार, साइट को LRO की तस्वीरों में दिखाई देने में करीब छह दिन लगे।
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SpaceX का रॉकेट चांद तक कैसे पहुंचा?
- यह रॉकेट का ऊपरी हिस्सा था, जो 2025 में लॉन्च हुए मिशन के बाद अंतरिक्ष में रह गया था। उस मिशन में दो निजी मून लैंडर और एक छोटा रोवर भेजे गए थे। बाद में रॉकेट का ऊपरी चरण चंद्रमा की दिशा में बहता रहा और अंततः इस साल अगस्त में चंद्र सतह से टकरा गया।
- यह घटना नासा की उस व्यापक रणनीति के बीच हुई है, जिसमें चंद्रमा की खोज में कमर्शियल कंपनियों और निजी मिशनों की भूमिका बढ़ रही है।
- बताया जा रहा है कि यह 18 मीटर चौड़ा और तीन मीटर से कम गहरा यह गड्ढा चंद्रमा के विशाल आकार की तुलना में बहुत छोटा है। चांद सतह पर प्राकृतिक उल्कापिंडों की टक्करों से लगातार छोटे-बड़े गड्ढे बनते रहते हैं।
- हालांकि, ऐसी मानव निर्मित टक्करें वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके जरिए यह समझने का मौका मिलता है कि किसी खास आकार और गति की वस्तु के टकराने पर चंद्र मिट्टी और चट्टान किस तरह बाहर निकलती हैं।
- NASA पहले भी LRO के जरिए मानव निर्मित वस्तुओं के चंद्रमा से टकराने के बाद बने गड्ढों का अध्ययन कर चुका है।
दक्षिण कोरिया का Danuri सबसे पहले पहुंचा था तस्वीर लेकर
चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे दक्षिण कोरिया के डानुरी स्पेसक्राफ्ट ने इस टक्कर वाली जगह की तस्वीर सबसे पहले हासिल की थी। हालांकि, नासा के LRO से मिली नई तस्वीरों में गड्ढे और उसके आसपास के निशान ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
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NASA का LRO कब से चांद की निगरानी कर रहा है?
- लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर 2009 से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। यह नासा के सबसे महत्वपूर्ण चंद्र मिशनों में से एक है और उसने चंद्र सतह की हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग समेत लंबे समय से कई वैज्ञानिक अध्ययन किए हैं।
- LRO की जानकारी NASA और उसके अंतरराष्ट्रीय तथा कमर्शियल साझेदारों को भविष्य के रोबोटिक और मानव मिशनों के लिए संभावित लैंडिंग क्षेत्रों को समझने में मदद करती है।