August 13, 2026

Nagar Nigam Dehradun : देहरादून में सांस के मरीजों को राहत, देहरादून नगर निगम ने बंद की डीजल वाली फॉगिंग - Doon Horizon

देहरादून नगर निगम ने डेंगू और मलेरिया को रोकने के लिए बिना डीजल वाली कोल्ड फॉगिंग मशीन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। यह नई मशीन घर के अंदर और बाहर दोनों जगह मच्छरों का खात्मा करेगी जिससे सांस के मरीजों को धुएं से काफी राहत मिलेगी।

देहरादून, 13 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Nagar Nigam Dehradun : 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देहरादून नगर निगम ने शहर में डेंगू और मलेरिया के खतरे को टालने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम ने डीजल से चलने वाली पुरानी फॉगिंग मशीनों की जगह नई कोल्ड फॉगिंग मशीन का एक महीने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर शहर में तेजी से पनप रहे मच्छरों की रोकथाम पर पड़ेगा।

मेयर सौरभ थपलियाल और नगर आयुक्त आलोक पांडे के सख्त निर्देशों के बाद इस नई मशीन का डेमो लिया गया। अधिकारियों ने जमीन पर उतारकर इसकी पूरी कार्यक्षमता और प्रभावशीलता का परीक्षण किया। निगम प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बरसात के मौसम में मच्छरजनित बीमारियों का ग्राफ किसी भी सूरत में ऊपर न जाए।

मेयर सौरभ थपलियाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अभी तक फॉगिंग में कीटनाशक दवाओं को भारी मात्रा में डीजल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता था। इस डीजल आधारित फॉगिंग से निकलने वाला काला और जहरीला धुआं शहर की हवा को काफी प्रदूषित कर रहा था। अस्थमा और सांस संबंधी अन्य रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह धुआं रातों की नींद खराब कर देता था।

पर्यावरण को हो रहे नुकसान और लोगों के गिरते स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर निगम ने यह नई रूपरेखा तैयार की है। निगम अब एक पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के अनुकूल विकल्प की तलाश कर रहा है और यह नई कोल्ड फॉगिंग तकनीक उसी का हिस्सा है। धुएं से होने वाली घुटन से शहरवासियों को बचाने की दिशा में यह एक बेहद असरदार तरीका साबित होगा।

नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने पुरानी और नई तकनीक का तकनीकी अंतर स्पष्ट किया। पुरानी फॉगिंग तकनीक केवल खुले इलाकों के लिए बनी थी और इसे बंद कमरों या घरों के भीतर इस्तेमाल करना कतई सुरक्षित नहीं था। डेमो के लिए मंगवाई गई यह नई कोल्ड फॉगिंग मशीन इंडोर और आउटडोर दोनों जगह पूरी ताकत से अपना काम करती है।

नई मशीन की मदद से अब बंद परिसरों, सरकारी संस्थानों और लोगों के घरों के भीतर भी मच्छरों को पनपने से रोका जा सकेगा। यह मशीन कीटनाशक दवा की बेहद महीन बूंदों का सीधा छिड़काव करती है। इससे डीजल की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती और मच्छर भी आसानी से खत्म हो जाते हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में इस तकनीक का पहले से ही सफल उपयोग हो रहा है।

मुख्य नगर स्वास्थ अधिकारी डॉ. आनंद शुक्ला ने इस पूरे अभियान का लक्ष्य जनता के सामने रखा। डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों का प्रसार रोकना इस समय निगम की सबसे पहली प्राथमिकता है। निगम प्रशासन डीजल फॉगिंग से पैदा होने वाले धुएं के प्रदूषण को जड़ से खत्म करने पर अपना पूरा जोर लगा रहा है।

नागरिकों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण देना अधिकारियों की अहम जिम्मेदारी है। इस एक महीने लंबे पायलट प्रोजेक्ट में तय मानकों के आधार पर ही दवाइयों का इस्तेमाल किया जाना है। एक्वाथ्रीन (Aquathrin) और बीलार्वा (Bilarva) जैसी प्रमाणित कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नई मशीन से किया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट अगले पूरे एक महीने तक शहर के अलग-अलग वार्डों में बारी-बारी से चलाया जाएगा। निगम की टीमें इंडोर और आउटडोर दोनों तरह के हालातों में मशीन की क्षमता और प्रभावशीलता का कड़ाई से आकलन करेंगी। मच्छर नियंत्रण में अगर यह मशीन उम्मीदों पर खरी उतरी तो इसे स्थायी रूप से पूरे शहर में लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।