महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा बोलना अनिवार्य करने और नियम उल्लंघन पर भारी जुर्माने के प्रावधान के खिलाफ मुंबई में चालकों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार से शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल के कारण महानगर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
हड़ताल के पहले दिन मुंबई के विभिन्न इलाकों में लोगों को आवागमन के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।
- Published: 24 Aug 2026, 03:43 PM IST
- Last Updated: 24 Aug 2026, 03:43 PM IST
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की तीन दिवसीय हड़ताल के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य सरकार की ओर से ड्राइवरों के लिए स्थानीय मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने और भारी-भरकम जुर्माना लगाने के फैसले के विरोध में चालक सड़कों पर उतर आए हैं। ड्राइवर यूनियनों का आरोप है कि नियमों की आड़ में आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस द्वारा उनका आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
बुजुर्ग ड्राइवरों का दर्द और जुर्माने का खौफ
हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों का कहना है कि वे दशकों से मुंबई की सड़कों पर गाड़ियां चला रहे हैं, लेकिन अब अचानक उन पर सख्त भाषाई शर्तें थोपी जा रही हैं।
चालकों का तर्क है कि 55 से 60 वर्ष की आयु में नई भाषा सीखना आसान नहीं है। कई चालक स्कूल नहीं गए हैं और वे टूटी-फूटी मराठी बोलने का प्रयास भी करते हैं, फिर भी उनकी बात सुने बिना 15,000 से 20,000 रुपये तक के भारी चालान काटे जा रहे हैं, जिसे वहन करना उनके लिए असंभव है।
सरकार का नियम और विवाद की वजह
राज्य में स्थानीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने यह नियम तय किया है कि मुंबई और एमएमआर (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) में चलने वाले सभी कमर्शियल वाहनों के चालकों को मराठी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए, ताकि वे स्थानीय यात्रियों के साथ आसानी से संवाद कर सकें।
पहले यह नियम केवल परमिट की शर्तों में शामिल था, लेकिन हाल ही में प्रशासन द्वारा इसे सख्ती से लागू करते हुए भारी जुर्माने का प्रावधान किए जाने के बाद यह बड़ा विवाद बन गया।
संजय निरुपम का हस्तक्षेप और मंत्री का आश्वासन
विवाद बढ़ने पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने ऑटो और टैक्सी चालकों के पक्ष में हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि 1 मई से लागू इस आदेश के बाद 85 फीसदी से अधिक ड्राइवरों ने बुनियादी मराठी सीख ली है और 12 अगस्त को सरकार ने एक महीने का अतिरिक्त समय भी दिया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर आरटीओ अधिकारियों द्वारा चालकों को बेवजह परेशान किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से बात की गई है, जिन्होंने आश्वस्त किया है कि नियमों का उल्लंघन कर मनमानी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
लाखों यात्रियों की बढ़ी परेशानी, ट्रेनों में भारी भीड़
हड़ताल के पहले दिन मुंबई के विभिन्न इलाकों में लोगों को आवागमन के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। सड़कों से ऑटो और काली-पीली टैक्सियां नदारद रहने के कारण बेस्ट बसों और लोकल ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ देखने को मिली।
खासकर सुबह के समय दफ्तर जाने वालों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डे पहुंचने वाले मुसाफिरों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ड्राइवर यूनियनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उत्पीड़न बंद नहीं होता और जुर्माने के नियम वापस नहीं लिए जाते, उनका विरोध जारी रहेगा।