रायसेन जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। EOW ने बाड़ी तहसील की तीन सहकारी समितियों से जुड़े तीन कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि किसानों की जानकारी के बिना उनकी जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर मूंग ख
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मामला देहरी कला, भरकच्छ कला और गूगलवाड़ा सहकारी समितियों से जुड़ा है। EOW ने समिति के कर्मचारी श्रीराम ठाकुर, रंजीत ठाकुर और गौरव ठाकुर को आरोपी बनाया है।
जिन किसानों ने पंजीयन नहीं कराया, उनकी जमीन का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि कुछ ऐसे किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल मूंग बेचने के लिए पंजीयन कराने में किया गया, जिन्होंने खुद कोई पंजीयन नहीं कराया था। जांच के दौरान कई किसानों ने बताया कि उनकी जानकारी या सहमति के बिना उनकी जमीन के नाम पर पंजीयन कर दिया गया।
इसके बाद इन्हीं पंजीयनों के आधार पर सरकारी खरीदी में मूंग की मात्रा दर्ज की गई और भुगतान लिया गया।
1500 से 3300 रुपए में खरीदी, 8 हजार से ज्यादा MSP पर बेची
EOW की जांच के मुताबिक बाजार से करीब 1500 से 3300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मूंग खरीदी गई। इसके बाद इसी मूंग को सरकारी खरीदी केंद्रों पर 8558 से 8682 रुपए प्रति क्विंटल के MSP पर बेचा गया।
आरोप है कि बाजार से कम कीमत में खरीदी गई मूंग को किसानों की उपज बताकर सरकारी खरीदी में शामिल किया गया। इस तरह दोनों कीमतों के बीच का अंतर मुनाफे के तौर पर हासिल किया गया।

1500 से 3300 रुपए में खरीदी, 8 हजार से ज्यादा MSP पर बेची गई है।
श्रीराम ठाकुर के नाम पर 151 क्विंटल से ज्यादा मूंग
जांच के अनुसार श्रीराम ठाकुर के नाम से 8.095 और 4.532 हेक्टेयर जमीन का पंजीयन कर 151.524 क्विंटल मूंग की खरीदी दिखाई गई। इसके लिए करीब 13.15 लाख रुपए का भुगतान हुआ, जबकि जांच में इसकी वास्तविक खरीद लागत करीब 4.54 लाख रुपए बताई गई है।
इसी तरह रंजीत ठाकुर और गौरव ठाकुर के नाम से भी पंजीयन कर सरकारी खरीदी का लाभ लेने का आरोप है। तीनों मामलों को मिलाकर जांच में करीब 13.3 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आई है।
किसान को अपनी जमीन के नाम पर पंजीयन मिला, तब खुला मामला
मामला पहली बार तब सामने आया, जब एक किसान ने अपनी जमीन के नाम पर ऐसा पंजीयन देखा, जिसकी उसे कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद सहकारिता विभाग ने मामले की दो बार जांच की।
जांच में नियमों के खिलाफ पंजीयन किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया था। दोनों विभागीय जांच में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी, लेकिन उस समय पुलिस में FIR दर्ज नहीं हुई।
अब EOW ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।