August 23, 2026

MP Weather: आधा मानसून बीता, फिर भी 35% बारिश बाकी! 15 जिलों में ज्यादा पानी, यहां सूखे जैसे हालात - Haribhoomi

मध्य प्रदेश में इस बार मानसून ने दस्तक तो देरी से दी, लेकिन बाद के दिनों में कई चरणों में जोरदार बारिश देखने को मिली। इसके बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 65 प्रतिशत आंकड़ा ही पूरा हो पाया है। पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की स्थिति बेहतर है, जबकि इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कई इलाके अभी भी औसत बारिश से पीछे चल रहे हैं।

अगस्त के तीसरे सप्ताह में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया की सक्रियता के चलते प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर तेज रहा। डिंडौरी और सिवनी समेत कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा, जबकि कई इलाकों में झरने भी उफान पर आ गए।

मौसम विभाग के मुताबिक अगले सप्ताह भी प्रदेश में अच्छी बारिश की संभावना है। ऐसे में जिन जिलों में बारिश का आंकड़ा कम है, वहां कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

27.4 इंच की जरूरत, अब तक 24.4 इंच बारिश
प्रदेश में अब तक औसतन 27.4 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन 24.4 इंच पानी ही गिरा है। इस तरह सामान्य आंकड़े से करीब 3 इंच बारिश कम है।

हालांकि बारिश का वितरण पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं रहा। भोपाल, शहडोल, रीवा और जबलपुर संभाग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं।

डैमों में 64% से ज्यादा पानी
लगातार बारिश का असर प्रदेश के बड़े बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रमुख जलाशयों में औसतन 64 प्रतिशत से अधिक जलभराव दर्ज किया गया है।

इंदिरा सागर में करीब 54%, गांधी सागर में 67%, बाणसागर में 65%, बारना में 76%, कोलार में 82%, महान में 77%, राजघाट में 86%, बरगी में 86%, ओंकारेश्वर में 30% और तवा में 46% जलभराव बताया गया है। बरगी और जौहिला समेत कई बांधों के गेट भी खोले जा चुके हैं। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के कई बांधों में अभी पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है।

24 जून को पहुंचा था मानसून
इस साल मध्य प्रदेश में मानसून ने 9 दिन की देरी से 24 जून को दस्तक दी थी। इसके बाद महज 9 दिनों में मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। शुरुआत में देरी का असर बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा और जून में प्रदेश में करीब 30% कम बारिश दर्ज हुई।

जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8% अधिक तक पहुंच गया। हालांकि जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ गया और प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का बड़ा दौर नहीं बना।

इसके बाद जुलाई के तीसरे सप्ताह में मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ी और करीब 3.3 इंच बारिश हुई। चौथे सप्ताह में भी कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह से बारिश का दौर और मजबूत हुआ, जो अब तक कई हिस्सों में जारी है।

उमरिया और डिंडौरी में 34 इंच से ज्यादा बारिश
प्रदेश में बारिश का सबसे ज्यादा असर पूर्वी हिस्से में देखने को मिला है। उमरिया और डिंडौरी में अब तक 34 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।

इसके उलट मुरैना प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है। यहां अब तक करीब 12 इंच बारिश हुई है। पड़ोसी भिंड में बारिश का आंकड़ा लगभग 22 इंच है।

इन जिलों में बारिश कम
जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के स्तर पर बारिश करीब 19% तक कम बताई गई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, डिंडौरी, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में सामान्य से 1% से 51% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी औसत से 2% से 47% तक कम बारिश हुई है।

15 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर है। इनमें अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं।

अब निगाह अगले सप्ताह होने वाली बारिश पर है। यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही रहता है और प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होती है, तो बारिश की मौजूदा कमी काफी हद तक कम हो सकती है।