भोपाल, 14 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा विभाग तथा मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) में निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पूर्व-योग्यता शर्तों (PQR) में हेरफेर और विभागीय जांचों में चयनात्मक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी गई शिकायतों के माध्यम से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तथा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जैसी स्वतंत्र एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
ईएम सर्विसेज और निविदा प्रक्रिया में कथित हेरफेर का मामला
नई दिल्ली निवासी शिकायतकर्ता राकेश कुमार द्वारा 23 जुलाई 2026 को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि MPPGCL द्वारा मेसर्स ईएम सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को ओवरहॉलिंग एवं सामग्री आपूर्ति के कार्य आवंटित करने में निविदा शर्तों व PQR में कथित बदलाव किए गए। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2021-2023 के दौरान श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना (SSTPP) में PQR में शिथिलता देकर उक्त कंपनी के लिए पात्रता प्रमाण-पत्र तैयार कराए गए, जिनका उपयोग अन्य ताप विद्युत संयंत्रों (जैसे SGTPS और STPS) में कार्य प्राप्त करने हेतु किया गया।
इसके अलावा, वर्तमान में जारी लगभग ₹25-30 करोड़ अनुमानित लागत की निविदा में भी प्रतिस्पर्धा सीमित करने तथा प्रक्रिया को असामान्य रूप से कम समय में अंतिम रूप देने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण की CVC, CBI या EOW से समयबद्ध स्वतंत्र जांच कराने, वर्ष 2021-2026 के अनुबंधों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और वर्तमान निविदा प्रक्रिया को जांच पूरी होने तक स्थगित रखने का अनुरोध किया है।
CHP आपूर्ति प्रकरण और चयनात्मक कार्रवाई के आरोप
वहीं दूसरी शिकायत में, जबलपुर निवासी विष्णु शास्त्री द्वारा 8 अगस्त 2026 (पत्र दिनांक 27 जुलाई 2026) को प्रस्तुत आवेदन में जून 2024 के सीएचपी (Coal Handling Plant) सामग्री आपूर्ति मामले का मुद्दा उठाया गया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व विभागीय जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बावजूद समान परिस्थितियों में केवल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि अन्य को छोड़ दिया गया। पत्र में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता (वर्तमान कार्यकारी मुख्य अभियंता, SSTPP खंडवा) श्री आर.के. साहू की भूमिका, विभागीय पत्राचार, वित्तीय अभिलेखों और स्थानांतरण के उपरांत कंपनी आवास के कथित अनधिकृत उपयोग की जांच की मांग की गई है। साथ ही निष्पक्ष जांच के हित में संबंधित अधिकारी को जांच पूरी होने तक संवेदनशील जिम्मेदारियों से पृथक रखने का आग्रह किया गया है।
विभागीय पक्ष एवं स्थिति
इस संबंध में ऊर्जा विभाग का रुख और विभागीय कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए दिनांक 11 सितंबर 2026 को वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी एवं नोडल अधिकारी, म.प्र. शासन, ऊर्जा विभाग श्री मनोज द्विवेदी को जानकारी प्रेषित कर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में पूछा गया था। हालांकि, 14 सितंबर 2026 को समाचार लिखे जाने तक विभाग अथवा नोडल अधिकारी की ओर से कोई उत्तर या आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ है।
